नई दिल्ली- यह साहस और उम्मीद की ऐसी कहानी है जिसमें एक बच्ची और मां ने हालात के आगे घुटने टेकने से इंकार कर दिया। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला के डॉक्टरों ने इस 11-वर्षीय बच्ची का, जिसके बाएं पैर में स्टेज 4 का बोन कैंसर फैल चुका था और उसने दोनों फेफड़ों को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया था, सफल उपचार कर इस मामले से उपजे डर, अनिश्चितता और निराशा के भाव को पूरी तरह से दूर कर दिया है।इस जटिल और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण मामले का प्रबंधन डॉ अर्चित पंडित, डायरेक्टर एंड हेड ऑफ डिपार्टमेंट, सर्जिकल ओंकोलॉजी के नेतृत्व में एक समर्पित मल्टीडिसीप्लीनरी टीम ने डॉ विनीत गोयल, कंसल्टेंट, सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला के साथ मिलकर किया। इस बच्ची को जब उपचार के लिए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला लाया गया तो वह चलने में असमर्थ थी और उसका बचपन अचानक ही दर्द, बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटने, तथा डर से सहमते हुए बीत रहा था। वह अपने पैर में मैलिग्नेंट बोन ट्यूमर की वजह से व्हीलचेयर और बैसाखियों पर निर्भर थी और इस बीमारी ने उसे न सिर्फ थका दिया था बल्कि काफी तोड़ भी दिया था। मरीज के परिवार को पहले यह बताया गया था कि ऐसे में पैर काटना ही जीवनरक्षा का एकमात्र समाधान था, जिसे सुनकर बच्ची और उसकी मां पूरी तरह से बिखर गए थे।लेकिन फोर्टिस की टीम ने पैर काटने को इलाज के रूप में स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया और मरीज का पैर बचाने के लिए अधिक एडवांस तकनीक का सहारा लिया, जिससे बच्ची का आत्मसम्मान, मोबिलिटी और उसका भविष्य सभी सुरक्षित हो सकें। इस मामले की और जानकारी देते हुए डॉ अर्चित पंडित, डायरेक्टर एंड हेड ऑफ डिपार्टमेंट, सर्जिकल ओंकोलॉजी ने कहा,सर्जिकल ओंकोलॉजी में प्रगति, प्रिसीजन कीमोथेरेपी और मिनीमॅली इन्वेसिव लंग सर्जरी ऐसी उपचार प्रक्रियाएं हैं जो एडवांस कैंसर ग्रस्त बच्चों के क्लीनिकल परिणामों को बदलकर रख देती हैं, बशर्ते उपचार समय पर मिले और विस्तृत हो। उपचार के बाद, आज यह बच्ची बिना किसी सहारे के स्वयं चलने-फिरने में सक्षम है, वह कैंसर-मुक्त हो चुकी है और स्वास्थ्य लाभ कर रही थी यह परिणाम इस शक्तिशाली संदेश से कम नहीं है कि स्टेज 4 के लंग कैंसर का, जो कि फेफड़ों तक फैल चुका हो, सर्जरी और कीमोथेरेपी के मेल से उपचार संभव है। डॉ विनीत गोयल, कंसल्टेंट, सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला ने कहा,जब यह बच्ची पहली बार हमारे पास आयी थी, तो काफी री हुई थी, वह दर्द से भी जूझ रही थी और चलने में अक्षम थी। कैंसर के इलाज के अलावा हमारे ऊपर उसका बचपन सुरक्षित करने और उसका भविष्य बचाने की जिम्मेदारी भी थी। पैर काटने की बजाय पैर को सुरक्षित बचाने के विकल्प को चुनने से यह बच्ची दोबारा चलने-फिरने, दौड़ने और आजीवन विकलांगता की बजाय आत्मनिर्भरता के साथ जीने लायक हो चुकी है। डॉ विक्रम अग्रवाल, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला ने कहा,यह मामला काफी चुनौतियों से भरा था। लेकिन डॉक्टरों की हमारी समर्पित टीम ने, जिसका नेतृत्व डॉ अर्जित पंडित और डॉ विनीत गोयल कर रहे थे, उत्कृष्ट विशेषज्ञता और शानदार टीमवर्क का प्रदर्शन किया।
