नागपुर- महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने कहा कि राज्य में बिजली कटौती की वजह कोविड-19 पाबंदियों में ढील के बाद बिजली की बढ़ी मांग है। राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में कोयले की आपूर्ति और मालगाडय़िों के कथित कुप्रबंधन के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराते हुए दावा किया कि राज्य के पास केवल छह दिनों के लिए कोयले का भंडार रह गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजली उत्पादन के लिए कोयले की आपूर्ति में अंतर को पाटने के लिए काम कर रही है ताकि बिजली कटौती से बचा जा सके। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सरकार की योजना की कमी की वजह से कोयले की कमी हुई है जिसका नतीजा है कि राज्य में बिजली की किल्लत हो रही है। राउत ने कहा कि कोयले की कमी केवल महाराष्ट्र में नहीं है, बल्कि पूरे भारत में है और दावा किया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने सभी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों से इसपर चर्चा की थी और उनसे कोयला आयात करने को कहा था। उन्होंने कहा, पूरे देश में कोविड-19 महामारी में कमी आने और अर्थव्यवस्था के खुलने के बाद बिजली की मांग में कई गुना की वृद्धि हुई है। खुले बाजार से खरीदने के लिए बिजली उपलब्ध नहीं है। इसी प्रकार कोयला आपूर्ति और रेलवे रैक को लेकर कोई उचित प्रबंधन नहीं होने से राज्यों को इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। राउत ने आगे कहा कि राज्य सरकार के पास कोयले का जो भंडार है वह अधिक से अधिक छह दिनों तक चलेगा। उन्होंने कहा, हम उपलब्ध कोयले का 62 प्रतिशत इस्तेमाल कर सकते हैं और बाकी को मानसून के लिए रखते हैं। यह मौजूदा स्थिति है। राउत ने कहा कि राज्य सरकार ने कोयले की खरीद के लिए 2,200 करोड़ रुपए केंद्र को दिए लेकिन अतिरिक्त आपूर्ति से पहले पिछले बकाए का भगुतान करने को कहा गया। मंत्री ने कहा, हमने मौजूदा स्थिति से मुख्यमंत्री को सूचित कर दिया है। हम बिजली उत्पादन और आपूर्ति में अंतर को पाटने के लिए काम कर रहे हैं ताकि राज्य में बिजली कटौती न हो।