तिरुवनंतपुरम- केरल ने 2026 के शुरुआती महीनों में एस्कलेरा द वीमेन फेस्ट के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले विकास पर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराई है। अपने व्यापक पैमाने, अंतरराज्यीय सहभागिता और जनसहभागिता के कारण यह उत्सव राज्य की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बना है, जिससे समावेशी और प्रगतिशील विकास के लिए केरल की दीर्घकालिक पहचान और मजबूत हुई है। इस महोत्सव का आयोजन केरल राज्य महिला विकास निगम द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से राज्य की राजधानी में किया जा रहा है। उत्सव का प्रमुख आकर्षण महिला उद्यमियों की विशाल प्रदर्शनी है, जिसमें 140 स्टॉल लगाए गए हैं। इसमें आठ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों से आई महिला उद्यमियों की भागीदारी है। एक क्षेत्रीय पहल के रूप में शुरू हुआ यह मंच अब एक राष्ट्रीय पहचान बन चुका है, जहाँ देशभर की महिला-संचालित इकाइयों और आजीविका मॉडलों को प्रस्तुत किया जा रहा है। अपने तीसरे संस्करण में एस्कलेरा एक पारंपरिक प्रदर्शनी के दायरे से आगे निकल चुका है। 2023 में एस्कलेरा एक्सपो श्रृंखला के रूप में शुरू हुई यह पहल अब उद्यमिता, सामाजिक संवाद और नीति विमर्श को जोड़ने वाला एक व्यापक सार्वजनिक मंच बन चुकी है। यह उत्सव पिछले एक दशक में केरल में महिला उद्यमिता, नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में हुई प्रगति का प्रतिबिंब बनकर उभरा है और महिला-केंद्रित विकास के राष्ट्रीय संदर्भ बिंदु के रूप में राज्य की स्थिति को और सुदृढ़ करता है। महिला आर्थिक सशक्तिकरण पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक नीति-फोकस की झलक भी इस महोत्सव में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। केरल की स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास मंत्री वीना जॉर्ज ने दोहराया है कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता सतत विकास की आधारशिला है, जिसके लाभ परिवारों और समुदायों तक व्यापक रूप से पहुँचते हैं। पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार ने महिला विकास निगम के माध्यम से ₹1,850 करोड़ की स्व-रोज़गार ऋण सहायता 1,49,185 महिलाओं को प्रदान की है, जिससे तीन लाख से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन हुआ है।उद्यम प्रदर्शनी के अलावा एस्कलेरा द वीमेन फेस्ट 2026 में कॉन्क्लेव, कौशल-विकास कार्यक्रम और विषयगत चर्चाएँ भी शामिल हैं, जिनमें देश-विदेश से प्रशासक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। समग्र रूप से, इन पहलों ने महोत्सव को महिला सशक्तिकरण के ‘केरल मॉडल’ पर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन का एक प्रमुख मंच बना दिया है और समावेशी, महिला-नेतृत्व वाले विकास की बहस में केरल को अग्रणी पंक्ति में स्थापित किया है।
