नई दिल्ली –  केसीआर… एक ऐसी शख्सियत नहीं हैं जिन्हें केवल तेलंगाना आंदोलनकारी या फिर तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर याद किया जा सके। वे एक आविष्कारक आर्किटेक्ट हैं जिन्होंने तेलंगाना राज्य को हर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा स्थान दिलाया है। वे एक हरित श्रमिक हैं जिन्होंने सत्ता में रहते हुए न केवल राज्य को औद्योगिक… सामाजिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए, बल्कि तेलंगाना को पर्यावरण के मामले में दूसरे राज्यों के लिए एक आदर्श बनाने के लिए भी बहुत मेहनत की है। वे एक प्रकृति प्रेमी हैं जिन्होंने राज्य में करोड़ों पौधे लगाए हैं और हरित तेलंगाना की टैगलाइन हासिल की है। उन्होंने न केवल पंचायतों में पार्कों के रखरखाव को प्राथमिकता दी है, बल्कि राज्य में पौधों की संख्या भी काफी अधिक बढ़ाई है और पूरे देश को यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि अगर कोई पूछे तेलंगाना राज्य कहाँ है, तो सभी कहेंगे वो देखो हरे-भरे पौधे… पेड़ों के नीचे आराम से फल-फूल रहा हैं। इसी क्रम में, 17 फरवरी को केसीआर के जन्मदिन के अवसर पर, सभी में पर्यावरण के प्रति उत्साह जगाने के लिए पौधे लगाने का कार्यक्रम किया जा रहा है। इस बार केसीआर के जन्मदिन के अवसर पर गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के बेसिन में स्थित सुंदरबन डेल्टा क्षेत्र में दस हज़ार मैनग्रूव पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है। यह एक बड़ा कार्यक्रम है, जिसे पूर्व राज्यसभा सदस्य जोगिनपल्ली संतोष कुमार के नेतृत्व में किया जा रहा है। केसीआर के शासन में पर्यावरण की सुरक्षा सरकार की मुख्य जिम्मेदारियों में से एक थी। राज्य में जो करोड़ों नए पौधे लगाए गए थे वे अब बड़े पेड़ बन गए हैं। नवगठित तेलंगाना राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में, केसीआर ने न केवल योजनायी बल्कि राज्य के विकास की नींव रखने के लिए भी ज़िम्मेदार ली थी। उनके नेतृत्व में, हरित-हारम ने एक लंबे समय के पर्यावरणीय बदलाव के तौर पर आकार लिया इस अच्छे संकल्प के साथ कि नए राज्य की नींव पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित होनी चाहिए, उन्होंने जंगलों के क्षेत्रफल को बढ़ाने, भू-गर्भ जल स्तर को ठीक करने, जैवविविधताओं को बचाने और पर्यावरण रेसिलिएंस को तेलंगाना के विकास के रास्ते का हिस्सा बनाने जैसे लक्ष्य के साथ आगे बढ़े। हरित आंदोलन तेलंगाना से होते हुए सारे देश में फैल गया है। हरित आन्दोलन की महानता न केवल तेलंगाना में मिली सफलताओं में ही नहीं, बल्कि राज्य की सीमाओं के बाहर इसकी प्रेरणा में भी है। संतोष कुमार के विचारों से शुरू हुआ ग्रीन इंडिया चैलेंज से इस मुद्दे पर देश में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है। 2018 में शुरू हुए इस पर्यावरण आंदोलन ने जंगलों में करोड़ों बीज बोए हैं। युवाओं, विद्यार्थियों ने हाथ मिलाकर करोड़ों पौधों को जीवन दिया है। इस आंदोलन में युवा, जन प्रतिनिधि, निजी संगठन, कॉर्पोरेट और नागरिक समाज भी शामिल हुए हैं और यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया है। वे कई लोगों के लिए आदर्श बन गए हैं। इस ग्रीन इंडिया चैलेंज के तहत 195 मिलियन पौधे लगाए गए हैं और 20,000 से अधिक जलाशयों को फिर से जीवित किया गया है, जो कि एक बहुत बड़ा सुधार है। अब, केसीआर के जन्मदिन के अवसर पर, सुंदरबन के जंगलों में 10,000 पौधे लगाने का कार्य शुरू किया गया है, जो गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा में लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। ये मैंग्रोव जंगल के किनारों को काफी अच्छी सुरक्षा प्रदान करने में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। किनारों को तूफ़ानों से बचाने, लहरों की तेजी को रोकने और जीव विविधताओं को बचाने में इन मैनग्रोव जंगलों की भूमिका काफी अहम होती है। लेकिन लगातार आने वाले तूफ़ानों, खारे पानी का मिट्टी में समा जाने और मिट्टी के स्वभाव पर असर डालने, अनियमित बारिश, आइला, अम्फान, यास और सित्रांग जैसे तूफानों ने इस क्षेत्र में काफी अधिक प्रभाव डाला है। इससे मैनग्रोव जंगलों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। वहीं, केसीआर का जन्मदिन इन जंगलों में और अधिक शक्ती संग्रहित करने की प्रक्रिया के लिए एक खास मंच बन रहा है।केसीआर के 72वें जन्मदिन के अवसर पर, सुंदरबन के मैनग्रोव जंगलों में 10,000 पौधे लगाए गए। युवाओं, विद्यार्थियों और स्थानीय जनता के सहयोग से सुंदरबन के जंगलों में इन पौधों को लगाने के साथ हम देशभर में यह संदेश को फैला रहे हैं कि हम पर्यावरण की रक्षा के आंदोलन को और आगे ले जाने के लिए कटिबद्ध हैं। इस आंदोलन का उद्देश्य न केवल इस पीढ़ी को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देना चाहते है कि ये जंगल तटीय क्षेत्रों की रक्षा में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं। हमारा लक्ष्य सभी पर्यावरण प्रेमियों को एक साथ लाना और इस प्रक्रिया को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना है और केसीआर से मिली प्रेरणा को पूरे देश में फैलाना है।

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