नई दिल्ली – पोषण विज्ञान, खाद्य विनियमन, कार्डियोलॉजी और ऑयल टेक्नोलॉजी के प्रमुख विशेषज्ञों ने पाम ऑयल और मानव स्वास्थ्य, पोषण एवं स्थिरता में इसकी भूमिका पर विज्ञान-आधारित चर्चा का आह्वान किया। यह चर्चा हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कानपुर में आयोजित मानव स्वास्थ्य, पोषण और स्थिरता में पाम ऑयल की भूमिका- संतुलित सत्य विषय पर हुई। ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग, हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी कानपुर और ऑयल टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल जोन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सेमिनार में पोषण विज्ञान, चिकित्सा अनुसंधान, खाद्य विनियमन, स्थिरता और ऑयल टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया, ताकि पाम ऑयल से जुड़े पुराने मिथकों को दूर कर साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जा सके। सेमिनार के दौरान साझा की गई वैज्ञानिक जानकारियों ने पता चला कि पाम ऑयल संतृप्त और असंतृप्त फैटी एसिड का एक संतुलित मिश्रण है, जो रोजमर्रा का खाना पकाने के लिए उपयुक्त है, खासतौर से जब इसे बैलेंस्ड डाइट के रूप में लिया जाए। इसकी उच्च ऑक्सीडेटिव स्थिरता इसे तेज आंच पर खाना पकाने की स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की अनुमति देती है, जिससे अन्य वनस्पति तेलों की तुलना में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने और हानिकारक यौगिकों के निर्माण को कम करने में मदद मिलती है। पाम ऑयल विटामिन ई टोकोट्रिएनोल्स का एक प्राकृतिक स्रोत भी है, जो अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाने जाते हैं। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सेहत के लिए किसी एक तेल को पूरी तरह छोड़ देना ही काफी नहीं है। इसके बजाय, हम दिन भर में क्या और कैसा खाना खाते हैं, हमारी जीवनशैली कैसी है और हम चीजों का इस्तेमाल कितने संयम से करते हैं, ये बातें हमारी सेहत पर कहीं ज्यादा असर डालती हैं। यह विचार-विमर्श 2021 में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स- ऑयल पाम के उद्देश्यों के अनुरूप भी रहा, जिसका लक्ष्य घरेलू खाद्य तेल उत्पादन को मजबूत करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने एक फसल के रूप में ऑयल पाम की दक्षता पर प्रकाश डाला और बताया कि यह अन्य प्रमुख वनस्पति तेल फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर अधिक उपज देता है। जब इसे जिम्मेदार खेती के तरीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थिरता के ढांचे का समर्थन मिलता है, तो ऑयल पाम की खेती ग्रामीण आजीविका, आर्थिक विकास और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। सेमिनार के महत्व के बारे में, हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कानपुर के स्कूल ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. प्रवीण यादव ने कहा, पाम ऑयल को लेकर अक्सर लोगों के बीच दो अलग-अलग राय देखने को मिलती है। इस तरह के आयोजनों से एक संतुलन बनता है, जहाँ हम बातों को केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर नहीं, बल्कि विज्ञान और जिम्मेदारी के साथ समझते हैं। जब हम सेहत, पोषण और पर्यावरण को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ जोड़कर देखते हैं, तो विशेषज्ञों और आम जनता, दोनों के लिए सही फैसला लेना आसान हो जाता है।
