भोपाल- भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने प्रदेश के रायसेन किले में स्थित सोमेश्वर धाम शिव मंदिर के शिवलिंग पर 11 अप्रैल को गंगाजल चढ़ाने का ऐलान किया है। गौरतलब है कि किले में स्थित यह मंदिर हर साल महाशिवरात्रि के दिन खुलता है और अन्य दिनों में यहां ताला लगा रहता है। उनके इस निर्णय से रायसेन जिला प्रशासन पशोपेश में है, क्योंकि इस मंदिर के ताले साल में केवल एक ही दिन महाशिवरात्रि के दिन खुलते हैं और उस दिन महाशिवरात्रि नहीं है, जबकि बाकी दिन मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते यह मंदिर बंद रहता है। उमा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, यह मान्यता है कि नवरात्रि के बाद, पहले सोमवार को शिवजी का अभिषेक करना चाहिए। मैं शिवजी के किसी सिद्ध स्थान को तलाश ही रही थी कि नवरात्रि के बाद के 11 अप्रैल सोमवार को गंगोत्री से लाए हुए गंगाजल से अभिषेक करूं। उन्होंने कहा, अचानक कल मध्यप्रदेश के एक प्रतिष्ठित अखबार से रायसेन में कथा कर रहे प्रतिष्ठित कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी के हवाले से यह जानकारी मिली कि रायसेन के किले में एक ऐसा सिद्ध शिवलिंग है। विश्व प्रसिद्ध प्रामाणिक इतिहासकार अब्राहम इराली ने अपनी पुस्तक एम्परर्स ऑफ द पिकॉक थ्रोन में लिखा है कि किस तरह से रायसेन के राजा पूरणमल, शेरशाह सूरी के विश्वासघात के शिकार हुए। उन्होंने कहा कि किले के चारों तरफ घेरा डालकर शेरशाह सूरी ने राजा पूरणमल से संधि कर ली, फिर उनके परिवार एवं उनके सहायकों के टेंट को शेरशाह सूरी ने अपने अफगान सैनिकों के साथ घेर लिया तथा रात में राजा पूरणमल एवं उनके परिजनों को घेर कर मार डाला। उमा ने कहा, जब मैं 11 अप्रैल को उस सिद्ध शिवलिंग पर गंगोत्री से लाया हुआ गंगाजल चढ़ाऊंगी तब राजा पूरणमल, उनकी पत्नी रत्नावली, उनके मार डाले गए दोनों मासूम बेटों एवं शेरशाह सूरी की वहशी दुर्दशा की शिकार होकर मर गई उनकी अबोध कन्या का मैं तर्पण करूंगी। उमा के निजी कार्यालय ने रायसेन जिलाधिकारी को उनके इस कार्यक्रम के बारे सूचना दे दी है और इसके लिए उनसे आवश्यक बंदोबस्त करने की अपील भी की है। वहीं, रायसेन जिले में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपील की है कि वह रायसेन किले में स्थित प्रसिद्ध सोमेश्वर धाम में भगवान को ताले से मुक्त करके दैनिक पूजा सुनिश्चित करें। इतिहासकर राजीव लोचन चौबे के अनुसार अफगान राजा शेरशाह सूरी ने 1543 में तत्कालीन शासक पूरनमल को धोखे से हराकर रायसेन के इस किले पर कब्जा कर लिया था और तब मंदिर में ताला लगाकर बंद कर दिया। उसने मंदिर परिसर में एक मस्जिद भी बना दी थी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इस परिसर में मंदिर और मस्जिद का विवाद खड़ा हो गया था और पुरातत्व विभाग ने भी मंदिर में ताले नहीं खोले।उन्होंने कहा कि 1974 में मंदिर के ताले खोलने के लिए रायसेन के लोगों ने बड़ा आंदोलन किया, जिसके चलते पहली बार मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी ने इस पहाड़ी पर स्थित मंदिर के ताले खुद खुलवाए थे और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगा था। तब से यह साल में एक दिन महाशिवरात्रि के दिन ही खुलता है, जबकि साल के बाकी दिन बंद रहता है। उमा के जलाभिषेक कार्यक्रम के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में रायसेन के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट एल के खरे ने कहा, अभी तक जिला प्रशासन द्वारा इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जब भी कोई फैसला लिया जाएगा, यह मीडिया को पता चल जाएगा