नई दिल्ली- भारत के प्रमुख डिजिटल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म में से एक हंगामा ओटीटी ने हसरतें सीजन 3 के लॉन्च की घोषणा की है। यह इसकी बेहद पसंद की जाने वाली एंथोलॉजी का अगला अध्याय है, जो महिलाओं की भीतरी दुनिया, अनकही इच्छाओं और शांत विद्रोह को लगातार सामने लाता रहा है। पहले दो सीजन की शानदार सफलता के बाद, यह सीजन और ऊंचा स्तर तय करता है। इसमें दमघोंटू शादियां, सख्त परंपराएं, राजनीतिक इस्तेमाल और भावनात्मक उपेक्षा से गढ़ी गई जिंदगियों की परतें खोली गई हैं। सालों में, हसरतें ने उन कहानियों के लिए एक मजबूत जगह बनाई है, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं। महिलाओं की इच्छाओं, पहचान और सामाजिक बंधनों के बीच के संघर्ष को ईमानदारी और बेबाकी से दिखाने के कारण इसने दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाया है। सीजन 3 में यह शो छह दमदार एपिसोड लेकर आया है, जिनमें थ्रिलर, क्राइम और ड्रामा के तत्व शामिल हैं। हर कहानी साहसी, निजी और पूरी तरह मानवीय है। हसरतें सीजन 3 के पहले दो एपिसोड 22 जनवरी को रिलीज हुए, इसके बाद 27 जनवरी को दो एपिसोड आए और अंतिम दो एपिसोड 4 फरवरी को रिलीज किए गए। हसरतें सीजन 3 छह मजबूत कहानियों के जरिए उन महिलाओं की यात्रा दिखाता है, जो चुप्पी, संघर्ष और आत्मबोध के बीच रास्ता तलाश रही हैं। हल्ला बोल में ज्योति की कहानी है, जो एक प्रताड़ित पत्नी है और राजनीति में कठपुतली की तरह धकेल दी जाती है, लेकिन धीरे-धीरे अपनी आवाज ढूंढती है और नियंत्रण के खिलाफ खड़ी होती है। ब्यूटी पार्लर में लखनऊ की ब्यूटीशियन सलमा गरीबी, मातृत्व और उपेक्षित शादी के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी गरिमा की कीमत पर मिलने वाली सुरक्षा का सामना करती है। मिडनाइट ब्राइड अनन्या की कहानी है, जो एक युवा विधवा है और हवेली में सख्त नियमों में बंधी हुई है, जहां कला और एक अनपेक्षित मौजूदगी के जरिए उसकी दबाई गई इच्छाएं सामने आती हैं। दो अनजाने में एक प्रताड़ित पत्नी और एक झूठे आरोप में फंसे शख्स की मुलाकात दंगों से भरी एक रात में होती है, जहां दोनों को नाजुक सी उम्मीद मिलती है। गुपचुप रसोई में नजरअंदाज की गई फूड कॉलम्निस्ट निर्मला को अपनी रसोई में विद्रोह की जगह मिलती है, जहां उसे पहचान भी मिलती है और खतरा भी। वहीं नया किरायेदार में स्मिता की खामोश तड़प दिखाई गई है, पति के गायब होने के बाद उसकी जिंदगी लगातार निगरानी में गुजर रही है, जिसे एक युवा संगीतकार की एंट्री हिला देती है। अपने किरदार और कहानी के बारे में बात करते हुए मोनालिसा कहती हैं,गुपचुप रसोई बिना शोर किए आजादी की कहानी है। मुझे ऐसे फेमिनिस्ट किरदार निभाना सच में पसंद है, जो महिलाओं, उनकी आत्मसम्मान और खुद को प्राथमिकता देने की जरूरत पर बात करते हैं। निर्मला का दबाए जाने और अपमानित होने से लेकर अपने कुकिंग के जुनून के जरिए आत्मसम्मान खोजने का सफर बहुत सी महिलाओं को खुद से जुड़ा लगेगा। यह खुद को चुनने, अनपेक्षित जगहों पर ताकत ढूंढने और यह समझने की कहानी है कि आजादी की शुरुआत भीतर से होती है।

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