नई दिल्ली- दिल्ली के ग्रामीणों ने केजरीवाल सरकार द्वारा की जा रही अनदेखी, नाइंसाफी और वादाखिलाफी के विरोध में एक बार फिर संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। नजफगढ़ के रावता गांव में 365 गांवों की पंचायत ने आगामी 27 अप्रैल से न्याययुद्ध का ऐलान किया है। पंचायत को दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी, दिल्ली भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनोद सहरावत और पंचायत के संयोजक सतबीर यादव ने संबोधित किया। बिधूड़ी ने कहा कि बवाना और नरेला में किसानों की 300 एकड़ जमीन पर खड़ी फसल जलकर तबाह हो गई है लेकिन दिल्ली सरकार ने इसके लिए अब तक मुआवजे का ऐलान नहीं किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इन गांवों का स्वयं दौरा करना तो दूरए किसी अधिकारी को भी नुकसान का जायजा लेने के लिए वहां नहीं भेजा। पिछले साल दिल्ली के 128 गांवों की 20 हजार एकड़ जमीन की खड़ी फसल पानी में डूब गई लेकिन मुआवजे का ऐलान करके भी मुआवजा नहीं बांटा गया। दिल्ली के ग्रामीण केजरीवाल सरकार की इस अनदेखी के कारण बहुत आक्रोशित हैं। इसलिए अब उन्होंने न्याययुद्ध का ऐलान किया है। उन्होंने कहा क इससे पहले भी दिल्ली सरकार ने किसानों से किया कोई वादा पूरा नहीं किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2018 में घोषणा की थी कि दिल्ली के किसानों को धान तथा अन्य फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का 50 प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान किया जा रहा है और सरकार इस पर 100 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष खर्च कर रही है जबकि सच्चाई यह है कि किसानों को अब तक एक पैसा नहीं दिया गया। इसलिए सरकार चार वर्षों के 400 करोड़ रुपए का भुगतान करे। दिल्ली सरकार ने गांवों के विकास के लिए यह फंड जारी किया जाए। गांवों में दाखिल खारिज और गिरदावरी की प्रक्रिया रुकी हुई है जिससे किसी किसान की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारियों का नाम रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो रहा और उन्हें मालिकाना हक नहीं मिल रहा।
