नई दिल्ली – सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट लिमिटेड, भारत की सबसे बड़ी पोस्ट-हार्वेस्ट लॉजिस्टिक्स और एग्री-सॉल्यूशंस कंपनी, ने आज अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी किसानधन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड किसानधन में दीपिका अग्रवाल की चीफ रिस्क ऑफिसर के रूप में नियुक्ति की घोषणा की। किसानधन एक अग्रणी मल्टी-एसेट नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी है, जो किसानों, एग्री-उद्यमियों और ट्रेडर समुदाय को वित्तीय व क्रेडिट समाधान प्रदान करती है।अपने नए पद में, दीपिका अग्रवाल किसानधन के एंटरप्राइज-वाइड रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क का नेतृत्व करेंगी। वे कंपनी की विकास रणनीति के अनुरूप गवर्नेंस, क्रेडिट क्वालिटी, कंप्लायंस और रिस्क कंट्रोल्स को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगी।इस नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए संदीप सभरवाल, ग्रुप सीईओ, सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट लिमिटेड, ने कहा,हमें किसानधन की लीडरशिप टीम में दीपिका अग्रवाल का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। क्रेडिट रिस्क, कंप्लायंस और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की उनकी गहरी समझ किसानधन के एग्री-फाइनेंसिंग समाधानों के विस्तार के दौरान उच्चतम गवर्नेंस और रिस्क डिसिप्लिन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी। बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक के विशेष अनुभव के साथ, दीपिका अग्रवाल एक अनुभवी रिस्क प्रोफेशनल हैं। किसानधन से जुड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दीपिका अग्रवाल, चीफ रिस्क ऑफिसर ने कहा,किसानधन से जुड़कर मैं बेहद प्रसन्न हूं, विशेषकर ऐसे समय में जब संगठन एग्री-फाइनेंसिंग में अपने नेतृत्व को और सशक्त कर रहा है। एक मजबूत रिस्क फ्रेमवर्क सतत ऋण वितरण की रीढ़ होता है और वित्तीय समावेशन का एक प्रमुख आधार भी। मेरा फोकस मजबूत गवर्नेंस बनाए रखने, क्रेडिट डिसिप्लिन सुनिश्चित करने और सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करते हुए लेंडिंग इनोवेशन को सपोर्ट करने पर रहेगा। मैं कृषि इकोसिस्टम को सतत रूप से सशक्त बनाने के किसानधन के मिशन में योगदान देने को लेकर उत्साहित हूं। एसएलसीएम के लिए किसानधन एक मजबूत विकास स्तंभ के रूप में उभरा है और एग्री-फाइनेंसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। 3,400 करोड़ से अधिक के लोन बुक के साथ, किसानधन अब तक 7 लाख से अधिक किसानों के जीवन को प्रभावित कर चुका है। किसानों के जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण पर विशेष फोकस के साथ, किसानधन ने 129 से अधिक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन को ऋण प्रदान किए हैं और भारत भर में 245 लोकेशंस पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में कम कागजी कार्यवाही के साथ तेज़ और आसान लोन डिस्बर्समेंट शामिल है, जिससे जमीनी स्तर पर किसानों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ी है।