नई दिल्ली – प्रभा खेतान फाउंडेशन और “इजरायल दूताबास “ की ओर से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में “भारत-इजरायल साहित्यक संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर इजरायल की जानीमानी लेखिका, उद्यमी और क्यूरेटर आइरिस आर्गामन, बाल साहित्य और कविता लेखिका यारा शेहोरी, इज़राइली साहित्य संस्थान की निदेशक सिगालित गेलफंड, संजू रंजन (डायरेक्टर एवं जॉइंट सेक्रेटरी, मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया), कविता भारद्वाज (कल्चर अटैची, एंबेसी ऑफ इजराइल) समेत बड़ी संख्या में भारतीय लेखक और प्रकाशक व मीडियाकर्मी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रभा खेतान के सीनियर एडवाइजर (आर्ट एंड कल्चर) डा. के. श्रीनिवासराव ने किया। श्री राव ने कहा कि प्रभा खेतान का नये साल का यह पहला कार्यक्रम हैं और दिल्ली की इतनी सर्द शाम में इतने कम समय के बुलावे पर इतने लोग में कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए इसके लिए मैं सभी का आभारी हूं। इस मौके पर इजराइली लेखक समूह ने अपने-अपने रचनाकर्म के बारे में विस्तार से बताया। बाल साहित्य से लेकर महिलाओं पर लिखे जा रहे साहित्य पर भी चर्चा हुई। इस बीच दर्शकों द्वारा इजरायल में मचे उथल पूथल को लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किए । लेखिका यारा शेहोरी ने कहा कि हम सभी बहुत ही कठिन समय में जी रहे हैं। हम एक बहुत ही अशांत पड़ोस में रहते हैं, और हम स्वयं भी उसी पड़ोस का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि हमने बहुत ही बहुत खून खराबा देखा है, और उसके बारे में बहुत कुछ जानते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य का काम है लोगों को जोड़ना, एक दूसरे के बीच पुल बनाना, अलग-अलग पक्षों के बीच संवाद स्थापित करना। हम राजनेता नहीं हैं। हमें दुनिया को नए सिरे से देखने और कल्पना करने की ज़रूरत है। हमें दु:ख के बारे में लिखना है, आशा के बारे में लिखना है, और उन रहस्यमय चीज़ों के बारे में भी, जो हमें इंसान बनाती हैं। मैं यह नहीं कह रही हूं कि मैं किसी आदर्श जगह से आती हूं। लेकिन हम लेखक समुदाय अपने कर्मों और अपने शब्दों से उसे बदलने की कोशिश कर रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि एक दिन हम ऐसी दुनिया में जिएँगे जहाँ कभी किसी बंदूक की ज़रूरत न हो। अंजू रंजन ने डा. श्रीनिवास राव ने मुझे इस पहले भारत-इज़रायली लेखक सम्मेलन में आमंत्रित किया इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करती हूँ । उन्होंने कहा कि यह भारत-इज़रायल लेखकों को एक मंच पर लाने की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरु आत है। हमें लेखकों को खंडों में नहीं बाँटना चाहिए, बल्कि उन्हें एक-दूसरे से मिलने, संस्कृति-भाषा जानने और लेखन क्षेत्रों का आदान-प्रदान करने का अवसर देना चाहिए। हमने इज़रायल के तीन प्रमुख लेखकों को सुना। आईरिस सामाजिक मुद्दों, बच्चों और समुद्री प्रदूषण पर लिखती हैं। सिगलित इज़रायली साहित्य को विदेशी भाषाओं में प्रचारित करने वाला संस्थान चलाती हैं। उन्होंने कहा कि हम वही लिखते हैं जो देखते हैं। इज़रायल में बच्चे तो भारत में प्रदूषण हमें प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने नेपाल (भूकंप), स्कॉटलैंड (डायस्पोरा जीवन), दक्षिण अफ्रीका (अपार्टाइड में भारतीय भूमिका, अहमद कतराडा) में रहकर अनुभव ग्रहण किए। लेखक का कर्तव्य है दुनिया को अपनी अनुभूतियाँ बताना। मैं मुख्यत: हिंदी में लिखती हूँ। मेरी पुस्तक ‘एक तरंगन दो तरंगन‘ बाल्यकाल स्मृतियों पर है। उन्होंने अपनी कतिवा ‘मोन मुखर रात‘ पढ़कर सुनाई। इस अवसर पर श्रीराव ने सभी को पस्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया ।
