नई दिल्ली – आपातकालीन प्रतिक्रिया की उत्कृष्टता और बहु-विषयक चिकित्सा देखभाल के अद्भुत प्रदर्शन के रूप में, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल ने असंभव को संभव कर दिखाया। एक छोटे बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ करके लौटाया, जो फुटबॉल खेलते समय छत से गिरने के बाद अस्पताल पहुँचा था और जिनके जीवित रहने की संभावना लगभग शून्य थी।यह बच्चा अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पता में लाया गया। वह बेहोश था, स्वयं से साँस नहीं ले पा रहा था, धड़कन बहुत कमजोर थी और दिल की धड़कन दर निचले स्तर पर थी। अस्पताल में जब बच्चा आया, उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। जीवित रहने की संभावना बेहद कम थी, लेकिन हमारी आपातकालीन टीम ने कभी उम्मीद नहीं खोई।केवल 15 मिनट के भीतर, अस्पताल की आपातकालीन टीम ने व्यापक निदान पूरा किया और जीवनरक्षक उपचार शुरू कर दिया। बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और रक्तचाप प्रबंधन के साथ हेमोडायनामिक रूप से स्थिर किया गया।आपातकालीन निदान ने गंभीर मस्तिष्कीय चोट, छाती में चोट और फेफड़ों में गंभीर चोटें, साथ ही दोनों ऊपरी और निचले अंगों में कई फ्रैक्चर एक क्लासिक पॉलीट्रॉमा केस में चोटों पर पूरी गंभीरता दिखाई। धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के स्ट्रैटेजिक मेडिकल प्रबंधन ने परिवार से विस्तृत परामर्श के बाद, बहु-विषयक चिकित्सा टीम जिसमें आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ, इंटेंसिविस्ट, न्यूरोसर्जन, पल्मोनोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन शामिल थे, इन सभी ने सावधानीपूर्वक चरणबद्ध उपचार किया।सबकी प्राथमिकता थी पूरी हेमोडायनामिक स्थिरता प्राप्त करना, उसके बाद ही सर्जरी पर विचार करना। ऐसे गंभीर उपचार पर बताते हुए डॉ. निकुंज मित्तल, सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी ने कहा,मस्तिष्कीय चोट की गंभीरता काफी अधिक थी, और बच्चे के बिना किसी न्यूरोलॉजिकल नुकसान के जीवित रहने की संभावना बेहद कम थी। हमने एक सावधानीपूर्ण न्यूरोप्रोटेक्टिव दृष्टिकोण अपनाया। सभी उपचार रणनीति से आज बच्चा पूरी तरह सामान्य मस्तिष्क स्कैन और बिना किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या के स्वस्थ है। यह परिणाम उन्नत न्यूरो-क्रिटिकल केयर के महत्व को साबित करता है। इस अवसर पर डॉ. कपिल कुमार कुर्सीवाल, सीनियर कंसल्टेंट जीआई सर्जरी, ने कहा,हमने पेट की चोटों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया और किसी भी जटिलता से बचाया। हमारी मल्टी स्पेशलिटी टीम की दैनिक चर्चाओं ने सुनिश्चित किया कि हर निर्णय बच्चे के हित में लिया गया।बच्चे को 13 दिन आईसीयू टीम के निगरानी, उन्नत वेंटिलेटर प्रबंधन, मस्तिष्क संरक्षण प्रोटोकॉल और मल्टी-ऑर्गन सपोर्ट प्रदान किया।डॉ. अशुतोष भारद्वाज, डायरेक्टर & सीनियर कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर मेडिसिन ने बताया यह पॉलीट्रॉमा का सबसे चुनौतीपूर्ण मामला था। बच्चा लगभग दो हफ्ते पूरी तरह बेहोश रहा। उसकी ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी और छाती की चोट को प्रबंधित करना अत्यंत सावधानी और लगातार निगरानी मांगता था। लेकिन हर दिन हमें सुधार के छोटे संकेत दिखाई दिए, आखिरकार पूर्ण न्यूरोलॉजिकल रिकवरी देखना मेरे करियर का सबसे संतोषजनक अनुभव रहा।डॉ. मोहित मदान, डायरेक्टर एंड यूनिट हेड ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ने कहा, “चोटें सामान्यतः तत्काल सर्जरी की मांग करती थीं, लेकिन बच्चे की स्थिति को देखते हुए हमने धैर्य और नैदानिक निर्णय अपनाया। चरणबद्ध दृष्टिकोण ने सुनिश्चित किया कि सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित और रिकवरी उत्कृष्ट हो। आज उसके अंग पूरी तरह ठीक हैं।सभी फॉलो-अप मस्तिष्क स्कैन पूर्ण रूप से सामान्य हैं और कोई न्यूरोलॉजिकल दोष नहीं है इतनी गंभीर चोट और दो सप्ताह की कोमा के बाद यह एक असाधारण और दुर्लभ उपलब्धि है।

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