नोएडा- हृदय रोग बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है और इसकी शुरुआत अक्सर सीने में असहजता, सांस फूलना, असामान्य थकान या शारीरिक परिश्रम के दौरान भारीपन जैसे चेतावनी संकेतों से होती है। जब डॉक्टर हृदय की धमनियों में रुकावट का पता लगाते हैं, तो उपचार का तरीका रुकावट की गंभीरता, मरीज के लक्षणों और उसकी समग्र सेहत पर निर्भर करता है। कुछ मरीज दवाओं और जीवनशैली में सुधार से ही अच्छा लाभ उठाते हैं, जबकि अन्य को रक्त प्रवाह को तेजी से बहाल करने वाली प्रक्रियाओं से फायदा होता है। उद्देश्य हमेशा एक ही रहता है—ऐसा उपचार चुनना जो सबसे सुरक्षित और लंबे समय तक प्रभावी परिणाम दे। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डायरेक्टर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एवं हेड–स्ट्रक्चरल हार्ट प्रोग्राम, डॉ. विवेक कुमार कहते हैं, आधुनिक कार्डियोलॉजी में अब उपचार के कई उन्नत विकल्प उपलब्ध हैं। ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट्स हार्ट अटैक और गंभीर रुकावटों के दौरान आज भी जीवनरक्षक भूमिका निभाते हैं। इन सिद्ध उपचारों के साथ-साथ एक नया विकल्प ड्रग-कोटेड बैलून चुनिंदा मरीजों के लिए अतिरिक्त विकल्प के रूप में उभर रहा है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर एक बैलून की मदद से धमनी को धीरे-धीरे खोलते हैं, जो सीधे रक्त वाहिका की दीवार तक दवा पहुंचाता है। इससे बिना किसी स्थायी इम्प्लांट के प्राकृतिक रूप से धमनी के ठीक होने में मदद मिलती है। यह तरीका कुछ विशेष प्रकार की संकरी धमनियों और खास रुकावट पैटर्न में प्रभावी पाया गया है। ड्रग-कोटेड बैलून थेरेपी उन मरीजों के लिए राहत देती है जो स्टेंट के बिना उपचार के लिए उपयुक्त होते हैं। यह लक्षित दवा के साथ धमनी को सुरक्षा देते हुए प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया को समर्थन देती है। स्टेंट्स, ड्रग-कोटेड बैलून और दवाएं मिलकर सुरक्षित और प्रभावी उपचारों का एक व्यापक विकल्प प्रदान करती हैं। डॉक्टर प्रत्येक मामले का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करते हैं ताकि यह तय किया जा सके कि दवाएं, स्टेंट, ड्रग-कोटेड बैलून, ड्रग-कोटेड बैलून या बायपास सर्जरी में से कौन-सा विकल्प लंबे समय में सर्वोत्तम परिणाम देगा। इन विकल्पों के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ आज मरीज अपने उपचार को लेकर अधिक आत्मविश्वासी और जागरूक महसूस कर रहे हैं।
