नई दिल्ली- केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता में शासन व्यवस्था और जनसेवा वितरण में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता है, बशर्ते इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप बढ़ावा दिया जाए। भारत एआई मिशन द्वारा आयोजित केरल क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन के समापन सत्र का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन में एआई के उपयोग को लेकर राज्य सरकार की दृष्टि साझा की। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक सहभागिता को मजबूत किया जा सकता है। सार्वजनिक प्रतिक्रिया को सेवाओं में शामिल कर सरकार को अधिक संवेदनशील बनाया जा सकता है, वहीं किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, युवाओं के लिए नए रोजगार अवसरों और नवाचार-आधारित विकास के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। केरल के सशक्त डिजिटल इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने के-फॉन केरल स्टार्टअप मिशन और डिजिटल विश्वविद्यालय जैसी पहलों को तकनीक-आधारित शासन के प्रमुख आधार बताया। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डेटा सुरक्षा और निजता सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। सम्मेलन से निकले विचार, उन्होंने कहा, सार्थक बदलाव के उत्प्रेरक बनेंगे और राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़ी चर्चाओं में योगदान देंगे। नवाचार से प्रभाव तक: विभिन्न क्षेत्रों में एआई की संभावनाओं का साकार रूप विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, एआई शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पैनल चर्चाओं और तकनीकी सत्रों में शासन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, साइबर सुरक्षा और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में एआई के उपयोग पर चर्चा की गई। मुख्य वक्तव्य देते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत भारत एआई मिशन की मुख्य परिचालन अधिकारी कविता भाटिया ने कहा कि फरवरी में नई दिल्ली में आयोजित होने वाला भारत एआई शिखर सम्मेलन 2026 ऐतिहासिक होगा। उन्होंने बताया कि भारत पहली बार इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचें। भाटिया ने कहा,वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स, तकनीकी विशेषज्ञों और छात्रों को एक मंच पर लाकर भारत ग्लोबल साउथ के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है,भाटिया ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 25,000 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और प्रतिभागियों की संख्या एक लाख से अधिक होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि केरल जैसे राज्य, जिनके पास उच्च गुणवत्ता वाले मानव संसाधन हैं, देश के लिए एक प्रमुख डिजिटल सेवा प्रदाता बन सकते हैं।
