नई दिल्ली – कला, संस्कृति और बौद्धिक विमर्श का एक समृद्ध साहित्यिक संध्या डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में आयोजित की गई, जिसमें प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना, विचारक और लेखिका डॉ. सोनल मानसिंह की पुस्तक ए ज़िग्ज़ैग माइंड पुस्तक का लोकार्पण हुआ। यह कार्यक्रम डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय परिसर स्थित इंदिरा मिरी कन्वेंशन हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से उनके साहित्यिक उपक्रम ‘किताब’ के तहत ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के साथ एक साझेदारी में के तहत आयोजित किया गया था । यह पुस्तक डॉ. मानसिंह के एक कलाकार, संसद सदस्य और सांस्कृतिक दूत के रूप में उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक चिंतन में अपने गहन योगदान के लिए प्रसिद्ध डॉ. मानसिंह ने इस पुस्तक के माध्यम से अपने असाधारण जीवन-यात्रा, विचारों और अनुभवों की एक अंतरंग झलक प्रस्तुत की, जिन्होंने उनके गतिशील दृष्टिकोण को आकार दिया है।इस कार्यक्रम में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जितेन हजारिका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात लेखिका प्रो. करबी डेका हजारिका मौजूद थीं। कार्यक्रम के दौरान, डॉ. सोनल मानसिंह ने शिक्षाविद् लखीप्रिया गोगोई के साथ एक सारगर्भित संवाद किया, जिसमें उन्होंने पुस्तक के विभिन्न विषयों पर चर्चा की और कला, पहचान, रचनात्मकता तथा भारत के बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा, हमारे महाकाव्यों और पौराणिक कथाओं में सशक्त महिला पात्रों, कंबोडिया में अपने अनुभवों तथा यह बताया कि कैसे नृत्य ने वहाँ के उत्पीड़ित लोगों को संबल दिया। जर्मनी में हुए एक जीवन-घातक दुर्घटना से उबरने की उनकी कहानी ने भी श्रोताओं को प्रभावित किया। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान समय में पारिस्थितिक संतुलन को लेकर अपनी चिंता भी व्यक्त की। श्रोताओं ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया। इस आयोजन को ‘एहसास वीमेन ऑफ डिब्रूगढ़ का भी सहयोग प्राप्त हुआ, जिसका प्रतिनिधित्व सुश्री प्रीति बागरोडिया और सुश्री तृष्णा देओराह ने किया, जो क्षेत्र में सांस्कृतिक सहभागिता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने में निरंतर सक्रिय हैं।यह पुस्तक लोकार्पण एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन के रूप में सामने आया, जिसने विद्वानों, छात्रों, साहित्य प्रेमियों और समुदाय के सदस्यों को एक साथ लाकर संवाद, रचनात्मकता और विचारों की शक्ति का उत्सव मनाया।
