नई दिल्ली – जीआई ग्रुप होल्डिंग की नई रिपोर्ट द राइज़ ऑफ एस्पिरेशनल इंडिया: इंडिया’ज़ कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर इवोल्यूशन, इनोवेशन एंड द रोड अहेड से पता चलता है कि भारत का फास्ट मूविंग कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स (एफएमसीडी) बाजार एक बुनियादी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब खरीदारी केवल जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि आकांक्षाओं और स्मार्ट जीवनशैली अपग्रेड से प्रेरित होकर की जा रही है। बढ़ती आय, तकनीक को तेजी से अपनाने और आसान वित्तीय विकल्पों की उपलब्धता के कारण, उपभोक्ताओं का व्यवहार हर वर्ग में बदल रहा है। यह रिपोर्ट ब्रांड्स, रिटेलर्स और नीति-निर्माताओं के लिए व्यावहारिक सुझाव देती है, ताकि वे 11% की अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहे इस बाजार का बेहतर लाभ उठा सकें, जिसके 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। रिपोर्ट उपभोक्ताओं की एक ‘दोहरी मानसिकता’ को भी उजागर करती है एक तरफ वे पैसे का पूरा मूल्य चाहते हैं, तो दूसरी ओर वे छोटे, समझदार और अधिक चयनात्मक परिवारों के लिए प्रीमियम व फीचर से भरपूर उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि खरीदारी की प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव आया है। अब भारतीय उपभोक्ता कीमत से ज्यादा ‘परफॉर्मेंस’ (प्रदर्शन) को महत्व दे रहे हैं। 68% लोगों के लिए उत्पाद की खूबियां खरीदारी का सबसे बड़ा पैमाना हैं। इसके बाद 61% लोग रिव्यूज़ को, 59% कीमत को और 55% वारंटी को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि 73% खरीदार अभी भी पैसे का पूरा मूल्य देने वाले विकल्प चुनते हैं, लेकिन लगभग 70% लोग बेहतर प्रदर्शन मिलने पर मिड-टियर या प्रीमियम उत्पादों पर खर्च करने को तैयार हैं। इससे साफ है कि बाजार में आकांक्षा और व्यवहारिकता दोनों साथ-साथ चल रही हैं। रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण रुझान सामने आया है युवा और अपग्रेड पर ध्यान देने वाला उपभोक्ता वर्ग तेजी से उभर रहा है। युवा पेशेवर एफएमसीडी की कुल बिक्री का 37% हिस्सा रखते हैं और फाइनेंस पर होने वाली खरीदारी में उनका योगदान लगभग 45% है। इससे पता चलता है कि क्रेडिट की आसान उपलब्धता ने आधुनिक और प्रीमियम उत्पादों की मांग को काफी बढ़ा दिया है। खासकर युवा पीढ़ी में फाइनेंसिंग की भूमिका अहम है; 74% जेन ज़ी उपभोक्ता ईएमआई या अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें जैसे विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि अब टिकाऊ उत्पादों की खोज, चयन और उनकी खरीद की पूरी प्रक्रिया में एक ढांचागत बदलाव आ चुका है। ब्रांड के प्रति वफादारी भी अब पहले जैसी स्थिर नहीं रही है, क्योंकि उत्पादों को बदलने का समय अब कम होता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 46% उपभोक्ता हर दो से तीन साल में अपने टिकाऊ उत्पाद बदल देते हैं, जबकि 63% लोग अपग्रेड करते समय अक्सर ब्रांड भी बदल लेते हैं। ऐसे में खरीदारी का अनुभव, बिक्री के बाद की सहायता और सर्विस की विश्वसनीयता बाजार में मुख्य अंतर पैदा करने वाले कारक बनते जा रहे हैं, खासकर तब जब ग्राहकों में अपग्रेड करने की इच्छा लगातार बनी हुई है। इन निष्कर्षों के बारे में जीआई ग्रुप होल्डिंग की कंट्री मैनेजर, सोनल अरोड़ा ने कहा,यह रिपोर्ट भारत में बढ़ती उपभोक्ता आकांक्षाओं के संदर्भ में एफएमसीडी बाजार की बारीकियों को गहराई से समझाती है। एफएमसीडी 3.0 के दौर में स्मार्ट होम्स, क्रेडिट के जरिए बढ़ती पहुंच, अस्थायी ब्रांड वफादारी, छोटे रिप्लेसमेंट चक्र और व्यावहारिक व प्रीमियम ग्राहकों के बीच का अंतर ये सभी ऐसे बदलाव हैं जो उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के बाजार को नई दिशा देंगे। ये निष्कर्ष बताते हैं कि कर्मचारियों का प्रशिक्षण, अनुभव आधारित रिटेल, शानदार बिक्री-पश्चात सेवा और पीएलआई कार्यक्रमों के जरिए विस्तार अब बेहद जरूरी है। जो कंपनियां इन बदलावों के अनुसार खुद को ढाल लेंगी, वे अपनी लचीली और ग्राहक-केंद्रित रणनीतियों के जरिए भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगी। रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि एफएमसीडी का भविष्य ‘सबके लिए एक जैसा’ नहीं होगा। जो ब्रांड स्मार्ट इकोसिस्टम, वित्तीय साझेदारी, अनुभव आधारित बिक्री और विभिन्न पीढ़ियों की जरूरतों को समझेंगे जैसे जेन ज़ी की डिजिटल-फर्स्ट खरीदारी से लेकर पारंपरिक उपभोक्ताओं की भरोसे पर आधारित पसंद तक वे ही इस बदलते परिदृश्य में आगे रहेंगे। ग्राहकों की पसंद, शहरों की अलग अलग प्रोफाइल और जीवनशैली में हो रहे सुधारों का सम्मान करके कंपनियां भारत की ‘आकांक्षी लहर’ की पूरी क्षमता का लाभ उठा सकती हैं और आने वाले वर्षों में मजबूती से आगे बढ़ सकती हैं।
