नोएडा- फिक्की ने वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गनाइजेशन और इंडियन मेडिकल पार्लियामेंटेरियंस फोरम के सहयोग से नई दिल्ली में तीसरे राष्ट्रीय स्ट्रोक समिट का आयोजन किया। 2022 और 2025 में आयोजित पिछले सफल सत्रों के आधार पर, यह समिट अब भारत में स्ट्रोक के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण बहु-हितधारक मंच के रूप में विकसित हो चुका है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा थे, जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित किया।
विश्व स्तर पर स्ट्रोक अब भी मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण बना हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय रजिस्ट्री डेटा एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है भारत में स्ट्रोक के हर सात में से एक मरीज की उम्र 45 वर्ष से कम है। यह रुझान देश में स्ट्रोक देखभाल व्यवस्था को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है, जिसमें जन जागरूकता बढ़ाना और स्ट्रोक प्रबंधन को समयबद्ध, सुलभ व उच्च गुणवत्ता मानकों पर आधारित बनाना शामिल है। इसी जरूरत को देखते हुए, इस वर्ष के समिट में समय पर उपचार तक पहुंच बढ़ाने, स्ट्रोक-तैयार स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण और राज्य-स्तरीय योजनाओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। समिट के दौरान ही हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दो वैश्विक दिग्गज कंपनियों—मेडट्रॉनिक और फिलिप्स ने भारत में एक रणनीतिक सहयोग की घोषणा की। मेडट्रॉनिक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और वाइस प्रेसिडेंट मंदीप सिंह कुमार ने कहा, भारत में स्ट्रोक के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के एकजुट प्रयासों की आवश्यकता है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी बुनियादी ढांचे, तकनीक और विशेषज्ञता के अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली स्ट्रोक देखभाल देश के हर कोने तक पहुंच सके। जब सरकार नीतियों, फंडिंग और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से इन पहलों का सक्रिय समर्थन करती है, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रोक का इलाज जनता के लिए अधिक सुलभ, किफायती और कुशल बन जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और टेक इनोवेटर्स की ताकत को जोड़कर, हम एक मजबूत और समावेशी स्ट्रोक केयर इकोसिस्टम बना सकते हैं जो न केवल जीवन बचाता है बल्कि पूरे भारत के मरीजों के लिए दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों में भी सुधार करता है।’
