नई दिल्ली-राजधानी के प्रेस क्लब में मंगलवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकआंदोलन न्यास की कार्यकारी अध्यक्ष Kalpana Inamdar ने देश और दुनिया की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से ठोस और त्वरित कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जिस तरह के तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है, उसका सीधा असर भारत के आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने जानकारी दी कि संगठन की ओर से प्रधानमंत्री Narendra Modi को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है, जिसमें भारत से वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आग्रह किया गया है। उनका कहना था कि भारत की ऐतिहासिक और कूटनीतिक स्थिति ऐसी है कि वह इस दिशा में प्रभावी पहल कर सकता है।Lokandolan Nyas की ओर से उठाए गए मुद्दों में सबसे प्रमुख महंगाई का सवाल रहा। कल्पना इनामदार ने कहा कि आज आम नागरिक दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते युद्ध जैसे हालात और दूसरी तरफ देश के भीतर लगातार बढ़ती महंगाई। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। “जब डीजल महंगा होता है तो खेत से बाजार तक सामान पहुंचाने की लागत बढ़ती है, जिसका बोझ आखिरकार उपभोक्ता पर ही आता है,” उन्होंने कहा। इस स्थिति में मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए घर चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में टैक्स का हिस्सा काफी अधिक है। उनका कहना था कि यदि सरकार चाहे तो टैक्स में कटौती करके आम जनता को तत्काल राहत दी जा सकती है। साथ ही एलपीजी गैस पर सब्सिडी को फिर से लागू करने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई।वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर बात करते हुए Kalpana Inamdar ने कहा कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव केवल इन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्थिरता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के इन सभी देशों के साथ संतुलित संबंध हैं, जो उसे एक भरोसेमंद मध्यस्थ बना सकते हैं।उन्होंने जोर देकर कहा कि “आज दुनिया को हथियारों की नहीं, संवाद और विश्वास की जरूरत है।” भारत अगर इस समय पहल करता है, तो न केवल वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है, बल्कि इसका सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी पड़ेगा।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगठन की ओर से पांच प्रमुख मांगें भी सामने रखी गईं। इनमें भारत को एक तटस्थ और सक्रिय मध्यस्थ के रूप में सामने आने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल कमी, एलपीजी गैस पर सब्सिडी की बहाली और महंगाई पर नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास शामिल हैं।उन्होंने कहा कि मौजूदा समय केवल आर्थिक संकट का नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट का रूप लेता जा रहा है। जब एक मजदूर अपनी दैनिक आय से परिवार का पेट नहीं भर पा रहा, जब एक मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत नहीं कर पा रहा, तब यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं रह जाता उन्होंने कहा।प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में Kalpana Inamdar ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस गंभीर स्थिति को समझते हुए जल्द से जल्द ठोस और जनहित में निर्णय ले। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर आम नागरिकों के हित में काम करने का है।इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि महंगाई और वैश्विक तनाव जैसे मुद्दे अब केवल नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह इन दोनों मोर्चों पर संतुलन बनाते हुए प्रभावी कदम उठाए।
