नई दिल्ली – आरजीसीआईआरसी ने अपने रोहिणी केंद्र में जीव शरदः शतम् विशिंग यंग कैंसर वॉरियर्स: हेल्थ, हैप्पीनेस एंड होप” शीर्षक से एक विशेष सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन आरजीसीआईआरसी के दो विभाग फिलैंथ्रॉपी विभाग और पेशेंट वेलफेयर सर्विसेज एंड द डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी एंड बीएमटी द्वारा किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बाल कैंसर सर्वाइवरशिप, समग्र पुनर्वास और उपचार के बाद जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करना था। यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक चर्चा तक सीमित नहीं था, बल्कि युवा सर्वाइवर्स की दृढ़ता का उत्सव मनाने और उनके लिए दीर्घकालिक सहयोग प्रणालियों को मजबूत करने का एक मंच भी था। चिकित्सकों, संस्थान के नेतृत्व, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कॉर्पोरेट सीएसआर प्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों, सर्वाइवर्स और अभिभावकों ने बाल कैंसर देखभाल के विकसित होते परिदृश्य और उपचार के बाद आशा को बनाए रखने की सामूहिक ज़िम्मेदारी पर विचार साझा किए। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण हीलिंग हार्ट्स: स्टोरीज़ ऑफ यंग कैंसर वॉरियर्स (खंड 2) पुस्तक का विमोचन रहा, जिसमें साहस, संघर्ष और पुनर्प्राप्ति की प्रेरणादायक कहानियाँ संकलित हैं। कार्यक्रम की शुरुआत आरजीसीआईआरसी के सीईओ श्री डी. एस. नेगी (सेवानिवृत्त आईएएस), अंतरिम सीईओ डॉ. डी. एस. गंगवार तथा चेयरमैन श्री अशोक अग्रवाल के नेतृत्व संबोधनों से हुई। तीनों ने पीडियाट्रिक कैंसर की व्यापक और समग्र देखभाल के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। श्री डी. एस. नेगी ने कहा,चिकित्सा विज्ञान ने बाल कैंसर के उपचार में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि केवल जीवित रहना ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। संरचित फॉलो-अप, मनोवैज्ञानिक सहयोग और सामाजिक पुनर्स्थापन बाल कैंसर देखभाल के आवश्यक घटक हैं। डॉ. डी. एस. गंगवार ने बहु-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “समग्र देखभाल का अर्थ है शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक सभी आयामों को संबोधित करना। सर्वाइवरशिप कार्यक्रम निरंतर देखभाल, पारिवारिक परामर्श और उपचार के दीर्घकालिक प्रभावों की सतत निगरानी पर आधारित होने चाहिए। श्री अशोक अग्रवाल ने कहा,पीडियाट्रिक कैंसर सर्वाइवरशिप एक साझा ज़िम्मेदारी है। स्वास्थ्य संस्थानों, परोपकारी संगठनों, कॉर्पोरेट क्षेत्र, स्वयंसेवकों और परिवारों को मिलकर युवा योद्धाओं के लिए स्थायी सहयोग प्रणाली विकसित करनी होगी। सम्मेलन के दौरान आयोजित क्लिनिकल सत्रों में दीर्घकालिक बाल ऑन्कोलॉजी देखभाल और सर्वाइवरशिप मॉडल पर चर्चा की गई। आरजीसीआईआरसी (नीति बाग) की मेडिकल डायरेक्टर एवं पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी एवं हीमेटोलॉजी निदेशक डॉ. गौरी कपूर ने कहा,आज कई पीडियाट्रिक कैंसर पूर्णतः उपचार योग्य हैं। हमारा लक्ष्य है कि सर्वाइवर्स नियोजित फॉलो-अप, उपचार के दीर्घकालिक प्रभावों की निगरानी और समग्र पुनर्वास के माध्यम से स्वस्थ वयस्क जीवन की ओर अग्रसर हों। मुख्य वक्तव्य एस्सेल सोशल वेलफेयर फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती रेव़ा नैयर (सेवानिवृत्त आईएएस) ने दिया। उन्होंने कैंसर देखभाल में सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. पायल मल्होत्रा, सलाहकार पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी एंड बीएमटी, ने समय पर हस्तक्षेप और निरंतर देखभाल के महत्व पर बल दिया। सम्मेलन में लाभार्थी समूहों और स्वयंसेवकों की प्रेरक कहानियाँ भी साझा की गईं, जिन्होंने यह दर्शाया कि सहयोग की भावना अस्पताल की सीमाओं से परे भी प्रभाव डालती है। पुनर्वास सेवाओं, जिसमें हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी भी शामिल है, पर विशेष सत्र में उपचार के बाद जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने पर चर्चा की गई।

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