नई दिल्ली – आरजीसीआईआरसी ने फेस्टोमिक्स  2 का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न किया। यह दो दिवसीय अकादमिक कार्यक्रम “प्रिसीजन थ्रू ओमिक्स” विषय पर आधारित था, जिसका आयोजन 30 और 31 जनवरी 2026 को आरजीसीआईआरसी, रोहिणी में किया गया। पिछले वर्ष आयोजित इसके प्रथम संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, फेस्टोमिक्स 2 में पैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स, ऑन्कोलॉजी तथा ट्रांसलेशनल रिसर्च से जुड़े अग्रणी विशेषज्ञों ने भाग लिया और आधुनिक कैंसर उपचार में ओमिक्स-आधारित तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर गहन चर्चा की। उद्घाटन समारोह में श्री डी. एस. नेगी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार, डॉ. सुधीर रावल तथा डॉ. अनुराग मेहता की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस सम्मेलन ने एक व्यापक मंच प्रदान किया, जहाँ जीनोमिक्स, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स, एपिजेनेटिक्स तथा मेटाबोलोमिक्स के माध्यम से कैंसर निदान, जोखिम वर्गीकरण तथा उपचार चयन में हो रहे परिवर्तनों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। क्लिनिशियन, पैथोलॉजिस्ट, प्रयोगशाला वैज्ञानिकों तथा प्रशिक्षुओं की सक्रिय सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि नियमित ऑन्कोलॉजी प्रैक्टिस में मॉलिक्यूलर इंटीग्रेशन का महत्व लगातार बढ़ रहा है। अकादमिक सत्रों के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया, जिनमें कैंसर जीनोमिक्स में प्रगति, नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस), पीसीआर-आधारित डायग्नॉस्टिक्स, फ्लोरेसेंस इन सिटू हाइब्रिडाइजेशन (फिश), लिक्विड बायोप्सी, मेथाइलेशन क्लासिफायर्स, मेटाबोलोमिक्स तथा जटिल मॉलिक्यूलर रिपोर्ट्स की व्याख्या शामिल रही। इन सत्रों में मॉलिक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों जैसे गुणवत्ता नियंत्रण, पैनल चयन, डेटा की व्याख्या तथा क्लिनिकल प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई, जिससे जिम्मेदारी के साथ प्रिसीजन अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। फेस्टोमिक्स 2 में मॉलिक्यूलर डेटा को क्लिनिकल निर्णय प्रक्रिया के साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। केस-आधारित चर्चाओं के माध्यम से यह दर्शाया गया कि मॉलिक्यूलर इनसाइट्स किस प्रकार उपचार विकल्पों को दिशा दे सकते हैं, रोग की भविष्यवाणी को अधिक सटीक बना सकते हैं तथा सॉलिड ट्यूमर्स और हेमेटोलॉजिकल मैलिग्नेंसीज़ में मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड चर्चाओं को सशक्त बना सकते हैं। विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, सारकोमा, थायरॉयड कैंसर तथा पीडियाट्रिक मैलिग्नेंसीज़ में उभरते बायोमार्कर्स पर भी प्रकाश डाला, जिससे ओमिक्स के व्यापक अनुप्रयोग स्पष्ट हुए। इस अवसर पर डॉ. (कर्नल सेवानिवृत्त) अनुराग मेहता, प्रिंसिपल डायरेक्टर, लेबोरेटरी सर्विसेज़ एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, आरजीसीआईआरसी, तथा फेस्टोमिक्स 2 के आयोजन अध्यक्ष ने चर्चाओं के ट्रांसलेशनल महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, मॉलिक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स और ओमिक्स-आधारित तकनीकें अब केवल रिसर्च लैबोरेटरी तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि आज ऑन्कोलॉजी प्रैक्टिस का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। फेस्टोमिक्स का उद्देश्य जटिल मॉलिक्यूलर डेटा और अर्थपूर्ण क्लिनिकल निर्णय प्रक्रिया के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि जीनोमिक्स और प्रिसीजन डायग्नॉस्टिक्स में हुई प्रगति अंततः ऑन्कोलॉजी रोगियों के लिए साक्ष्य-आधारित और व्यक्तिगत उपचार में परिवर्तित हो सके। कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख संस्थानों से आए प्रतिष्ठित फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें अग्रणी ऑन्कोलॉजी सेंटर्स, टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर्स तथा डायग्नॉस्टिक लेबोरेटरीज़ के विशेषज्ञ शामिल थे। इससे मॉलिक्यूलर साइंस और क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी के बीच विचारों का समृद्ध आदान-प्रदान संभव हुआ। इंटरएक्टिव सत्रों और पैनल चर्चाओं ने सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित किया तथा रोगी के सर्वोत्तम प्रबंधन के लिए मल्टीडिसिप्लिनरी चर्चा के महत्व को रेखांकित किया। सम्मेलन का समापन डॉ. सुनील पासरीचा, वरिष्ठ परामर्शदाता, हिस्टोपैथोलॉजी, आरजीसीआईआरसी, तथा कार्यक्रम के आयोजन सचिव के समापन वक्तव्य के साथ हुआ।

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