ट्राईफेड वन धन क्रॉनिकल –- जिसमें वन धन योजना पर एक गहन संसाधन एवं इस महत्वपूर्ण योजना में ट्राईफेड की गतिविधियां शामिल हैं और ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना, और 14 शहद निर्माता संगठनों पर राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम  द्वारा निर्मित 9 प्रचार-प्रसार चलचित्र

में ट्राईफेड वन धन क्रॉनिकल  जिसमें वन धन योजना पर एक गहन संसाधन एवं इस महत्वपूर्ण योजना में ट्राईफेड की गतिविधियां शामिल हैं और ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना, और 14 शहद निर्माता संगठनों पर राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम  द्वारा निर्मित 9 प्रचार-प्रसार चलचित्र (Video का लोकार्पण किया गया। इसके अलावा, यूनिसेफ और ट्राईफेड द्वारा जनजातीय संवाद नेटवर्क पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री मुंडा ने कहा, “मुझे ट्राईफेड वन धन क्रॉनिकल जैसी इन सभी उल्लेखनीय पहलों का लोकार्पण करते हुए खुशी हो रही है, जिन पर ट्राईफेड काम कर रहा है। इस महत्वपूर्ण संसाधन के कार्यान्वयन से निश्चित रूप से ट्राईफेड द्वारा शुरू की गई गतिविधियों के बारे में संवाद करने में मदद मिलेगी, जिन्होंने 16 लाख से अधिक जनजातीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है; और भविष्य में इन गतिविधियों पर काम करने वाले अधिकारियों के लिए यह एक नियमावली के रूप में भी काम करेगा। व्यापक प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस पोर्टल) का शुभारंभ भी खरीद आंकड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, जो प्रभावी निर्णय लेने और समग्र पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। यह सराहनीय है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड के दल ने पिछले कुछ वर्षों में कठिन परिस्थितियों के बावजूद काफी कुछ हासिल किया है।

ट्राईफेड जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए कई उल्लेखनीय कार्यक्रम चला रहा है। दो वर्ष की अल्प अवधि में, इसने अब तक 27 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 3,110 वन धन विकास केंद्र समूहों में शामिल 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूहों को स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें 9.27 लाख लाभार्थी शामिल हैं। ये वन धन विकास केंद्र समूह, विकास के विभिन्न चरणों में हैं और अब तक कई सफलता की कहानियां सामने आई हैं। सभी 27 प्रतिभागी राज्यों के वन धन विकास केंद्र समूहों ने, जिनमें महाराष्ट्र, मणिपुर, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, केरल, त्रिपुरा, गुजरात, सिक्किम, आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं, लगभग 600 किस्मों के उत्पादों का उत्पादन शुरू कर दिया है। खुदरा विपणन पहल के तहत अब तक कुल 144 ट्राइब्स इंडिया बिक्री केंद्र खोले जा चुके हैं। इसके अलावा, वन धन केंद्रों के लाभार्थियों द्वारा संग्रहित विभिन्न वनोपजों के मूल्यवर्धन के लिए जगदलपुर (छत्तीसगढ़) और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में दो ट्राईफूड परियोजनाओं को शीघ्र ही चालू किया जा रहा है।

 देश में जनजातीय उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए किए गए कार्यों और वन धन विकास योजना के तहत जनजातीय उद्यमियों की उपलब्धियों का एक दस्तावेज है। इतिवृत्त ट्राईफेड द्वारा संचालित गतिविधियों का गहराई से चित्रण करता है जिसने लगभग 16 लाख जनजातीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है; जिसमें चुनिंदा वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत, प्रशिक्षण प्रदान करना, वन धन विकास केंद्र समूहों में शुरू हुआ मूल्यवर्धन, विकसित नई उत्पाद लाइनें, पैकेजिंग और विपणन के लिए नए विचार लागू करना, अब तक की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं शामिल ह

आज, ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना का प्रभावी ढंग से प्रचार करने और उन पर संवाद करने के लिए 9 प्रचार-प्रसार चलचित्रों  का भी लोकार्पण किया गया। ये आकर्षक सूचनात्मक चलचित्र राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम  द्वारा विकसित किए गए हैं, और ये जल्द ही प्रसारित किए जाएंगे।लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली  पोर्टल, जिसका आज लोकार्पण किया गया था, जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड के अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक तैयार नियंत्रण-पट्ट (dashboard) है। इस नियंत्रण-पट्ट में, खरीद केंद्रों की सूची और उनके स्थानों (मानचित्रों पर नियंत्रण-पट्ट सुईं सहित) और देश भर में की जा रही लघु वनोपजों (एमएफपी) की खरीद से संबंधित आंकड़े, वास्तविक समय के आधार पर उपलब्ध हैं। इस पोर्टल का शुभारंभ, तेजी से विश्लेषणात्मक और प्रभावी निर्णय लेने के लिए, खरीद संबंधी आंकड़ों की तैयार और ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह खरीद गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रदर्शन और दक्षता पर एक प्रतिबिंब देने के लिए बहुत आगे तक जाएगा।

मधुमक्खी पालन गतिविधि को किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में “मीठी क्रांति” (Sweet Revolution) को सफल बनाने के लिए इसके प्रचार और विकास के लिए भारत सरकार द्वारा महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक के रूप में मान्यता दी गई है। अगले पांच वर्ष में किसानों के लिए उच्च-स्तरीय अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए “10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन और संवर्धन” नामक एक केंद्रीय योजना शुरू की गई थी।

इस योजना में, चिन्हित संभावित जिलों / राज्यों में 100 शहद किसान उत्पादक संगठनों का गठन कर मधुमक्खी पालन पर विशेष बल दिया गया है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NHBM) के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) ने देश के 100 क्लस्टर्स में शहद के लिए वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई है। ट्राईफेड को कृषि मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों के गठन के लिए कार्यान्वयन संस्था बनाया गया है। इन 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों का आज माननीय मंत्री द्वारा लोकार्पण किया गया।

इस साझेदारी की सफलता को देखते हुए, यूनिसेफ और ट्राईफेड ने, “जनजातीय संवाद नेटवर्क” − सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन के लिए जनजातीय नेटवर्क [उभरती डिजिटल, सामाजिक, वैकल्पिक और मोबाइल क्रांति पर निर्मित लोगों से लोगों का ‘समृद्धि’ मंच] का शुभारंभ करने के लिए हाथ मिलाया है। ट्राईफेड और यूनिसेफ इस विशाल तंत्र का उपयोग करते हुए , जिसमें 9 करोड़ से अधिक जनजातीय लोग, 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूह, 3,110 वन धन विकास केंद्र समूह, बाजार संघ, हाट बाजार तथा ट्राइब्स इंडिया तन्त्र और राज्य स्तरीय संस्थायें शामिल हैं, एक मजबूत संचार प्रणाली और मंच स्थापित करना चाहते हैं, जिसमें न केवल वन धन विकास केंद्र शामिल हों, बल्कि यह 9 करोड़ लोगों के जीवन का विशाल आधार भी बने।

ट्राईफेड और यूनिसेफ जनजातीय समुदाय के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई माध्यमों तथा संचार रणनीतियों और उपकरणों का उपयोग करेंगे। इस साझेदारी पर मुहर लगाने के लिए आज ट्राईफेड और यूनिसेफ के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए

ट्राईफेड ने जेडी सेंटर ऑफ आर्ट्स के सहयोग से, ओडिशा राज्य के मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़, कोरापुट और रायगढ़ जिलों में जनजातीय कला और परंपरा का सामाजिक एवं सांस्कृतिक शोध कार्य और मानवशास्त्रीय अध्ययन किया। ‘जनजातीय आजीविका: ‘संपोषण से संवहनीयता’ शीर्षक वाला यह शोध प्रतिवेदन, जनजातीय समूहों की रचनात्मक क्षमताओं और आसपास के पर्यावरण के साथ उनके परस्पर जुड़ाव पर प्रकाश डालता है। यह प्रतिवेदन जनजातीय कला और शिल्प की जानकारी के भंडार का गठन करता है और उन बिन्दुओं को भी शामिल करता है जो जनजातीय समुदाय के सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय जीवन शैली और आजीविका को नियंत्रित करते हैं। ज्ञान के इस भंडार में 7 संगीत वाद्ययंत्रों की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, 2 चित्रकारी एवं वस्त्र, 3 आजीविका कला एवं शिल्प, 20 से अधिक जनजातीय आभूषण और औषधीय गुणों वाले 72 लघु वनोपज शामिल हैं। माननीय जनजातीय कार्य द्वारा आज इस शोध प्रतिवेदन का भी अनावरण किया गया।

स्थानीय के लिए मुखर और आत्म निर्भर भारत के निर्माण पर प्रधानमंत्री के जोर के साथ, ट्राईफेड, जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में काम करने वाली बुनियादी संस्था के रूप में, नई पहल शुरू करना और उनका संचालन करना जारी रखेगी, जो जनजातीय लोगों की आय और आजीविका में बढोत्तरी करने के साथ-साथ, उनके जीवन और परंपराओं का संरक्षण भी कर सके।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ट्राईफेड जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए कई उल्लेखनीय कार्यक्रम चला रहा है। दो वर्ष की अल्प अवधि में, इसने अब तक 27 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 3,110 वन धन विकास केंद्र समूहों में शामिल 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूहों को स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें 9.27 लाख लाभार्थी शामिल हैं। ये वन धन विकास केंद्र समूह, विकास के विभिन्न चरणों में हैं और अब तक कई सफलता की कहानियां सामने आई हैं। सभी 27 प्रतिभागी राज्यों के वन धन विकास केंद्र समूहों ने, जिनमें महाराष्ट्र, मणिपुर, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, केरल, त्रिपुरा, गुजरात, सिक्किम, आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं, लगभग 600 किस्मों के उत्पादों का उत्पादन शुरू कर दिया है। खुदरा विपणन पहल के तहत अब तक कुल 144 ट्राइब्स इंडिया बिक्री केंद्र खोले जा चुके हैं। इसके अलावा, वन धन केंद्रों के लाभार्थियों द्वारा संग्रहित विभिन्न वनोपजों के मूल्यवर्धन के लिए जगदलपुर (छत्तीसगढ़) और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में दो ट्राईफूड परियोजनाओं को शीघ्र ही चालू किया जा रहा है।

 

 

ट्राईफेड वन धन: जनजातीय धैर्य और उद्यम का एक इतिवृत्त (क्रॉनिकल):

ट्राईफेड वन धन इतिवृत्त देश में जनजातीय उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए किए गए कार्यों और वन धन विकास योजना के तहत जनजातीय उद्यमियों की उपलब्धियों का एक दस्तावेज है। इतिवृत्त ट्राईफेड द्वारा संचालित गतिविधियों का गहराई से चित्रण करता है जिसने लगभग 16 लाख जनजातीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है; जिसमें चुनिंदा वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत, प्रशिक्षण प्रदान करना, वन धन विकास केंद्र समूहों में शुरू हुआ मूल्यवर्धन, विकसित नई उत्पाद लाइनें, पैकेजिंग और विपणन के लिए नए विचार लागू करना, अब तक की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं शामिल हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना:

आज, ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना का प्रभावी ढंग से प्रचार करने और उन पर संवाद करने के लिए 9 प्रचार-प्रसार चलचित्रों (Videos) का भी लोकार्पण किया गया। ये आकर्षक सूचनात्मक चलचित्र राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NIFD) द्वारा विकसित किए गए हैं, और ये जल्द ही प्रसारित किए जाएंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) पोर्टल:लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) पोर्टल, जिसका आज लोकार्पण किया गया था, जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड के अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक तैयार नियंत्रण-पट्ट (dashboard) है। इस नियंत्रण-पट्ट में, खरीद केंद्रों की सूची और उनके स्थानों (मानचित्रों पर नियंत्रण-पट्ट सुईं सहित) और देश भर में की जा रही लघु वनोपजों (एमएफपी) की खरीद से संबंधित आंकड़े, वास्तविक समय के आधार पर उपलब्ध हैं। इस पोर्टल का शुभारंभ, तेजी से विश्लेषणात्मक और प्रभावी निर्णय लेने के लिए, खरीद संबंधी आंकड़ों की तैयार और ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह खरीद गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रदर्शन और दक्षता पर एक प्रतिबिंब देने के लिए बहुत आगे तक जाएगा।

14 शहद किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन:

मधुमक्खी पालन गतिविधि को किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में “मीठी क्रांति” (Sweet Revolution) को सफल बनाने के लिए इसके प्रचार और विकास के लिए भारत सरकार द्वारा महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक के रूप में मान्यता दी गई है। अगले पांच वर्ष में किसानों के लिए उच्च-स्तरीय अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए “10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन और संवर्धन” नामक एक केंद्रीय योजना शुरू की गई थी।

इस योजना में, चिन्हित संभावित जिलों / राज्यों में 100 शहद किसान उत्पादक संगठनों का गठन कर मधुमक्खी पालन पर विशेष बल दिया गया है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NHBM) के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) ने देश के 100 क्लस्टर्स में शहद के लिए वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई है। ट्राईफेड को कृषि मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों के गठन के लिए कार्यान्वयन संस्था बनाया गया है। इन 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों का आज माननीय मंत्री द्वारा लोकार्पण किया गया।

 

 

 

 

 

 

 

‘जनजातीय संवाद नेटवर्क’ को आगे बढ़ाने के लिए यूनिसेफ के साथ साझेदारी:

यूनिसेफ के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ते हुए, ट्राईफेड ने “कोविड टीका संघ, सुरक्षित वन, धन उद्यम” नामक एक अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य जनजातीय समुदाय में कोविड-19 टीकाकरण में तेजी लाना था। अभियान का केंद्र तीन प्रमुख “ज” यानी जीवन, जीविका और जागरूकता हैं, और अभियान का मंत्र है “संवाद से संबंध”। जनजातीय कार्य मंत्री जी ने यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से इसका लोकार्पण किया और अब इसे पूरे भारत के 100 जनजातीय जिलों में शुरू किया जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस साझेदारी की सफलता को देखते हुए, यूनिसेफ और ट्राईफेड ने, “जनजातीय संवाद नेटवर्क” − सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन के लिए जनजातीय नेटवर्क [उभरती डिजिटल, सामाजिक, वैकल्पिक और मोबाइल क्रांति पर निर्मित लोगों से लोगों का ‘समृद्धि’ मंच] का शुभारंभ करने के लिए हाथ मिलाया है। ट्राईफेड और यूनिसेफ इस विशाल तंत्र का उपयोग करते हुए , जिसमें 9 करोड़ से अधिक जनजातीय लोग, 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूह, 3,110 वन धन विकास केंद्र समूह, बाजार संघ, हाट बाजार तथा ट्राइब्स इंडिया तन्त्र और राज्य स्तरीय संस्थायें शामिल हैं, एक मजबूत संचार प्रणाली और मंच स्थापित करना चाहते हैं, जिसमें न केवल वन धन विकास केंद्र शामिल हों, बल्कि यह 9 करोड़ लोगों के जीवन का विशाल आधार भी बने।

ट्राईफेड और यूनिसेफ जनजातीय समुदाय के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई माध्यमों तथा संचार रणनीतियों और उपकरणों का उपयोग करेंगे। इस साझेदारी पर मुहर लगाने के लिए आज ट्राईफेड और यूनिसेफ के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ओडिशा के जनजातीय आजीविका पर जेडी सेंटर ऑफ आर्ट्स के सहयोग से तैयार किया गया शोध प्रतिवेदन:

अंत में, ट्राईफेड ने जेडी सेंटर ऑफ आर्ट्स के सहयोग से, ओडिशा राज्य के मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़, कोरापुट और रायगढ़ जिलों में जनजातीय कला और परंपरा का सामाजिक एवं सांस्कृतिक शोध कार्य और मानवशास्त्रीय अध्ययन किया। ‘जनजातीय आजीविका: ‘संपोषण से संवहनीयता’ शीर्षक वाला यह शोध प्रतिवेदन, जनजातीय समूहों की रचनात्मक क्षमताओं और आसपास के पर्यावरण के साथ उनके परस्पर जुड़ाव पर प्रकाश डालता है। यह प्रतिवेदन जनजातीय कला और शिल्प की जानकारी के भंडार का गठन करता है और उन बिन्दुओं को भी शामिल करता है जो जनजातीय समुदाय के सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय जीवन शैली और आजीविका को नियंत्रित करते हैं। ज्ञान के इस भंडार में 7 संगीत वाद्ययंत्रों की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, 2 चित्रकारी एवं वस्त्र, 3 आजीविका कला एवं शिल्प, 20 से अधिक जनजातीय आभूषण और औषधीय गुणों वाले 72 लघु वनोपज शामिल हैं। माननीय जनजातीय कार्य द्वारा आज इस शोध प्रतिवेदन का भी अनावरण किया गया।

स्थानीय के लिए मुखर और आत्म निर्भर भारत के निर्माण पर प्रधानमंत्री के जोर के साथ, ट्राईफेड, जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में काम करने वाली बुनियादी संस्था के रूप में, नई पहल शुरू करना और उनका संचालन करना जारी रखेगी, जो जनजातीय लोगों की आय और आजीविका में बढोत्तरी करने के ) का लोकार्पण किया गया। इसके अलावा, यूनिसेफ और ट्राईफेड द्वारा जनजातीय संवाद नेटवर्क पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री मुंडा ने कहा, “मुझे ट्राईफेड वन धन क्रॉनिकल जैसी इन सभी उल्लेखनीय पहलों का लोकार्पण करते हुए खुशी हो रही है, जिन पर ट्राईफेड काम कर रहा है। इस महत्वपूर्ण संसाधन के कार्यान्वयन से निश्चित रूप से ट्राईफेड द्वारा शुरू की गई गतिविधियों के बारे में संवाद करने में मदद मिलेगी, जिन्होंने 16 लाख से अधिक जनजातीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है; और भविष्य में इन गतिविधियों पर काम करने वाले अधिकारियों के लिए यह एक नियमावली के रूप में भी काम करेगा। व्यापक प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस पोर्टल) का शुभारंभ भी खरीद आंकड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, जो प्रभावी निर्णय लेने और समग्र पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। यह सराहनीय है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड के दल ने पिछले कुछ वर्षों में कठिन परिस्थितियों के बावजूद काफी कुछ हासिल किया है।”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ट्राईफेड जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए कई उल्लेखनीय कार्यक्रम चला रहा है। दो वर्ष की अल्प अवधि में, इसने अब तक 27 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 3,110 वन धन विकास केंद्र समूहों में शामिल 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूहों को स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें 9.27 लाख लाभार्थी शामिल हैं। ये वन धन विकास केंद्र समूह, विकास के विभिन्न चरणों में हैं और अब तक कई सफलता की कहानियां सामने आई हैं। सभी 27 प्रतिभागी राज्यों के वन धन विकास केंद्र समूहों ने, जिनमें महाराष्ट्र, मणिपुर, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, केरल, त्रिपुरा, गुजरात, सिक्किम, आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं, लगभग 600 किस्मों के उत्पादों का उत्पादन शुरू कर दिया है। खुदरा विपणन पहल के तहत अब तक कुल 144 ट्राइब्स इंडिया बिक्री केंद्र खोले जा चुके हैं। इसके अलावा, वन धन केंद्रों के लाभार्थियों द्वारा संग्रहित विभिन्न वनोपजों के मूल्यवर्धन के लिए जगदलपुर (छत्तीसगढ़) और रायगढ़ (महाराष्ट्र) में दो ट्राईफूड परियोजनाओं को शीघ्र ही चालू किया जा रहा है।

 

 

ट्राईफेड वन धन: जनजातीय धैर्य और उद्यम का एक इतिवृत्त (क्रॉनिकल):

ट्राईफेड वन धन इतिवृत्त देश में जनजातीय उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए किए गए कार्यों और वन धन विकास योजना के तहत जनजातीय उद्यमियों की उपलब्धियों का एक दस्तावेज है। इतिवृत्त ट्राईफेड द्वारा संचालित गतिविधियों का गहराई से चित्रण करता है जिसने लगभग 16 लाख जनजातीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है; जिसमें चुनिंदा वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत, प्रशिक्षण प्रदान करना, वन धन विकास केंद्र समूहों में शुरू हुआ मूल्यवर्धन, विकसित नई उत्पाद लाइनें, पैकेजिंग और विपणन के लिए नए विचार लागू करना, अब तक की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं शामिल हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना:

आज, ट्राइब्स इंडिया, ट्राईफूड, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना तथा वन धन योजना का प्रभावी ढंग से प्रचार करने और उन पर संवाद करने के लिए 9 प्रचार-प्रसार चलचित्रों (Videos) का भी लोकार्पण किया गया। ये आकर्षक सूचनात्मक चलचित्र राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NIFD) द्वारा विकसित किए गए हैं, और ये जल्द ही प्रसारित किए जाएंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) पोर्टल:लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) पोर्टल, जिसका आज लोकार्पण किया गया था, जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड के अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक तैयार नियंत्रण-पट्ट (dashboard) है। इस नियंत्रण-पट्ट में, खरीद केंद्रों की सूची और उनके स्थानों (मानचित्रों पर नियंत्रण-पट्ट सुईं सहित) और देश भर में की जा रही लघु वनोपजों (एमएफपी) की खरीद से संबंधित आंकड़े, वास्तविक समय के आधार पर उपलब्ध हैं। इस पोर्टल का शुभारंभ, तेजी से विश्लेषणात्मक और प्रभावी निर्णय लेने के लिए, खरीद संबंधी आंकड़ों की तैयार और ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह खरीद गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रदर्शन और दक्षता पर एक प्रतिबिंब देने के लिए बहुत आगे तक जाएगा।

14 शहद किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन:

मधुमक्खी पालन गतिविधि को किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में “मीठी क्रांति” (Sweet Revolution) को सफल बनाने के लिए इसके प्रचार और विकास के लिए भारत सरकार द्वारा महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक के रूप में मान्यता दी गई है। अगले पांच वर्ष में किसानों के लिए उच्च-स्तरीय अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए “10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन और संवर्धन” नामक एक केंद्रीय योजना शुरू की गई थी।

इस योजना में, चिन्हित संभावित जिलों / राज्यों में 100 शहद किसान उत्पादक संगठनों का गठन कर मधुमक्खी पालन पर विशेष बल दिया गया है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NHBM) के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) ने देश के 100 क्लस्टर्स में शहद के लिए वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई है। ट्राईफेड को कृषि मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों के गठन के लिए कार्यान्वयन संस्था बनाया गया है। इन 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों का आज माननीय मंत्री द्वारा लोकार्पण किया गया।

 

 

 

 

 

 

 

‘जनजातीय संवाद नेटवर्क’ को आगे बढ़ाने के लिए यूनिसेफ के साथ साझेदारी:

यूनिसेफ के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ते हुए, ट्राईफेड ने “कोविड टीका संघ, सुरक्षित वन, धन उद्यम” नामक एक अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य जनजातीय समुदाय में कोविड-19 टीकाकरण में तेजी लाना था। अभियान का केंद्र तीन प्रमुख “ज” यानी जीवन, जीविका और जागरूकता हैं, और अभियान का मंत्र है “संवाद से संबंध”। जनजातीय कार्य मंत्री जी ने यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से इसका लोकार्पण किया और अब इसे पूरे भारत के 100 जनजातीय जिलों में शुरू किया जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस साझेदारी की सफलता को देखते हुए, यूनिसेफ और ट्राईफेड ने, “जनजातीय संवाद नेटवर्क” − सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन के लिए जनजातीय नेटवर्क [उभरती डिजिटल, सामाजिक, वैकल्पिक और मोबाइल क्रांति पर निर्मित लोगों से लोगों का ‘समृद्धि’ मंच] का शुभारंभ करने के लिए हाथ मिलाया है। ट्राईफेड और यूनिसेफ इस विशाल तंत्र का उपयोग करते हुए , जिसमें 9 करोड़ से अधिक जनजातीय लोग, 52,976 वन धन स्वयं सहायता समूह, 3,110 वन धन विकास केंद्र समूह, बाजार संघ, हाट बाजार तथा ट्राइब्स इंडिया तन्त्र और राज्य स्तरीय संस्थायें शामिल हैं, एक मजबूत संचार प्रणाली और मंच स्थापित करना चाहते हैं, जिसमें न केवल वन धन विकास केंद्र शामिल हों, बल्कि यह 9 करोड़ लोगों के जीवन का विशाल आधार भी बने।

ट्राईफेड और यूनिसेफ जनजातीय समुदाय के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई माध्यमों तथा संचार रणनीतियों और उपकरणों का उपयोग करेंगे। इस साझेदारी पर मुहर लगाने के लिए आज ट्राईफेड और यूनिसेफ के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ओडिशा के जनजातीय आजीविका पर जेडी सेंटर ऑफ आर्ट्स के सहयोग से तैयार किया गया शोध प्रतिवेदन:

अंत में, ट्राईफेड ने जेडी सेंटर ऑफ आर्ट्स के सहयोग से, ओडिशा राज्य के मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़, कोरापुट और रायगढ़ जिलों में जनजातीय कला और परंपरा का सामाजिक एवं सांस्कृतिक शोध कार्य और मानवशास्त्रीय अध्ययन किया। ‘जनजातीय आजीविका: ‘संपोषण से संवहनीयता’ शीर्षक वाला यह शोध प्रतिवेदन, जनजातीय समूहों की रचनात्मक क्षमताओं और आसपास के पर्यावरण के साथ उनके परस्पर जुड़ाव पर प्रकाश डालता है। यह प्रतिवेदन जनजातीय कला और शिल्प की जानकारी के भंडार का गठन करता है और उन बिन्दुओं को भी शामिल करता है जो जनजातीय समुदाय के सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय जीवन शैली और आजीविका को नियंत्रित करते हैं। ज्ञान के इस भंडार में 7 संगीत वाद्ययंत्रों की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, 2 चित्रकारी एवं वस्त्र, 3 आजीविका कला एवं शिल्प, 20 से अधिक जनजातीय आभूषण और औषधीय गुणों वाले 72 लघु वनोपज शामिल हैं। माननीय जनजातीय कार्य द्वारा आज इस शोध प्रतिवेदन का भी अनावरण किया गया।

स्थानीय के लिए मुखर और आत्म निर्भर भारत के निर्माण पर प्रधानमंत्री के जोर के साथ, ट्राईफेड, जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में काम करने वाली बुनियादी संस्था के रूप में, नई पहल शुरू करना और उनका संचालन करना जारी रखेगी, जो जनजातीय लोगों की आय और आजीविका में बढोत्तरी करने के