ऑडियो ही एकमात्र साधन था जिसके द्वारा लोग सीखते और सिखाते थे। बल्कि, टीवी के आविष्कार से पहले भी वायरलेस रेडियो संचार, सूचनाओं को साझा करने के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक हिस्सा था।

 

क्या ऑडियो अभी भी साक्षरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? क्या ऑडियो या पॉडकास्ट सुनने से छात्र बेहतर पाठक बन सकते हैं? या फिर यह कंटेंट का उपभोग करने का मात्र एक और निष्क्रिय तरीका ही बन पायेगा? वर्तमान शोध बताती है कि ज़्यादातर युवा दिमाग, यात्रा करते समय या अपने ख़ाली समय में, किताबें पढ़ने के बजाय ऑडियो कहानियां या अन्य ऑडियो कंटेंट को सुनना पसंद कर रहे हैं।

इसे सही माना जाए तो अब यहाँ यह प्रश्न उठता है कि क्या ऑडियो लर्निंग इन युवा और बढ़ते दिमागों के लिए ज्ञान वितरण का भविष्य बन सकती है?

वर्तमान में, भारत की जनसंख्या 1.4 बिलियन है, और 1.1 बिलियन के पास मोबाइल डिवाइस या स्मार्टफोन हैं। 1.1 अरब लोगों में से 622 मिलियन सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, यानी 43% आबादी। इंटरनेट का उपयोग करने वाले ये सभी लोग ऑडियो सुन सकते हैं क्योंकि इसके लिए केवल एक मोबाइल हैंडसेट और न्यूनतम इंटरनेट की आवश्यकता होती है। ऑडियो कंटेंट का आसानी से उपभोग और भारत के टियर 3 और 4 बाज़ारों में तेज़ी से बढ़ती इंटरनेट सुविधा को देखते हुए, कोई भी इस बात की सराहना करेगा कि ऑडियो के माध्यम से कंटेंट की खपत की संभावना बेहतर हुई है। इसलिए, हमारे देश में ऑडियो-आधारित डिजिटल शिक्षा के अवसर और संभावनाएं बहुत अधिक हैं।

आइए एक और पहलू पर नज़र डालें; 850 मिलियन लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं और उनमें से 70% ग्रामीण भारत में रहते हैं। अगर हम इन्हें शिक्षित करने की बात करें, तो डिजिटल माध्यम, ख़ासकर ऑडियो प्लेटफॉर्म ही आगे बढ़ने का रास्ता है

इस समय भारत में डिजिटल क्रांति बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कई डिजिटल प्लैटफॉर्म्स के इस्तेमाल का आदी हो रहा है। आसानी से स्मार्टफोन तक पहुंच और किफ़ायती मोबाइल डेटा ने इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने का काम किया है। ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स पर अलग-अलग प्रकार के कंटेंट का भण्डार उपलब्ध है। इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में डिजिटल कंटेंट की खपत में तेज़ी और ओटीटी प्लैटफॉर्म्स के प्रभावशाली विकास के साथ, लोगों को अपने समयानुसार, अपने व्यक्तिगत उपकरणों पर कंटेंट पाने की आदत हो गई है। साथ ही, स्क्रीन टाइम बढ़ने के दुष्परिणामों के कारण, लोग अब अपने सीखने की ज़रुरत को पूरा करने के लिए और विशेष रूप से ज्ञान प्राप्त करने के लिए पॉडकास्ट, ऑडियोबुक्स आदि के ज़रिए ऑडियो कंटेंट की ओर रुख कर रहे हैं। वास्तव में, भारत का पॉडकास्ट बाज़ार 34.5% CAGR से बढ़ रहा है और KPMG रिपोर्ट के अनुसार 2023 तक उसी दर से बढ़ता रहेगा।
इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में ऑडियो कंटेंट की मांग में काफ़ी वृद्धि हुई है। महामारी की वजह से हुआ लॉकडाउन इसका एक प्रेरक कारक बना है। पहले से अधिक लोग अब ई-लर्निंग और मनोरंजन के लिए ऐसे पॉडकास्ट्स का चयन कर रहे हैं जो क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट देते हैं।

इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौती और भारत की ग्रामीण आबादी के लिए संसाधनों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए, ऑडियो किसी भी तरीक़े के कंटेंट का सबसे सुविधाजनक ज़रिया बन रहा है। इसी तरह, हमारे देश में प्रचलित 19,500 विभिन्न भाषाओं/बोलियों को देखते हुए, शिक्षा के क्षेत्र में भी अधिकतम कवरेज प्रदान करने की क्षमता ऑडियो में ही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऑडियो कंटेंट बनाने में समय कम लगता है और इसे कम बैंडविड्थ वाले क्षेत्र में भी ऐक्सेस किया जा सकता है, यहां तक कि एक बेसिक मोबाइल फोन पर भी। जबकि अन्य माध्यमों में ऐसी सुविधा नहीं है, क्योंकि उनमें स्क्रीन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस तरह से, अपने कुछ नया करने के दृष्टिकोण के साथ, पॉडकास्ट-आधारित प्लैटफॉर्म्स या ऑडियो कंटेंट, डिजिटल लर्निंग में आने वाली मुश्किलों या अंतर को ख़त्म कर रहे हैं. ये एक बड़ी संख्या में लोगों को सीखने में मदद कर रहे हैं, खासकर भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उन लोगों की जो केवल स्थानीय भाषाओं से परिचित होते हैं और इस तरह एक वांछित बदलाव ला रहे हैं। दूसरी ओर, यह भी सच है कि लोग अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में समाचार और कहानियाँ सुनना पसंद करते हैं। तो ऑडियो कंटेंट ये सब सुविधाएं प्रदान करता है; इसका एक अतिरिक्त लाभ ये भी है कि इसे विभिन्न डिजिटल उपकरणों के माध्यम से आसानी से टैप किया जा सकता है. इसमें लोगों की सुनने की रुचि और ज़रूरतों के अनुसार चुनने के लिए विकल्पों की, जैसे शैक्षिक, प्रेरणादायक, समाचार, कहानियां, मनोरंजन आदि की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। ये सभी, किसी को भी एक आवश्यक एक्पोज़र प्रदान करने के लिए पर्याप्त हैं

ऑडियो, न केवल भाषा की बाधा को समाप्त कर रहा है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत के दूर-दराज़ के हिस्सों के छात्रों को भी सशक्त बना रहा है। जब पैसिव लर्निंग की बात आती है, तो ऑडियो के अपने विशिष्ट लाभ होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि छात्रों को किसी विषय की सम्पूर्ण मिले और सीखने के लिए अधिक समय मिले। ऑडियो कंटेंट को बच्चों सहित, कोई भी आसानी से समझ सकता है।

सदियों से, सीखने की प्रक्रिया में सुनना एक प्रमुख तत्व रहा है. लेकिन जब रेडियो जैसे पारंपरिक स्वरूपों से तुलना करें तो, इसकी संवादात्मकता अर्थात इंटरएक्टिविटी भी इस डिजिटल प्रगति की एक महत्वपूर्ण विशेषता बन गई है। ऑडियो कंटेंट ध्यान को ज़्यादा आकर्षित करता है और इसमें छात्रों की एकाग्रता शक्ति को बढ़ाने की क्षमता होती है। कुल मिलाकर, इसने सीखने को एक आसान और आनंददायक अनुभव बना दिया है। पॉडकास्ट का कम लागत में ज़्यादा प्रभावशाली होना भी एक अतिरिक्त लाभ है।

ऑडियो कंटेंट को बड़े पैमाने पर अपनाना भारत के लिए ‘शिक्षा में क्रांति’ ला सकता है। इसलिए, हमें शिक्षा पर पुनर्विचार करना चाहिए और ऑडियो को ध्यान में रखते हुए सीखने के और नए तरीक़े विकसित करने चाहिए। ऑडियो फॉर्मेट पहले से ही डिजिटल लर्निंग की ज़रूरतों को पूरा करने की अपनी क्षमता दिखा रहा है। इसने भारत के विविध, युवा और बढ़ते दिमाग़ों को ज्ञान प्रदान करने का अपना रास्ता पक्का कर लिया है