नई दिल्ली – भारत में ऑनलाइन डेटिंग लंबे समय तक एक तय पैटर्न पर चलती रही पहले फोटो, फिर प्रोफाइल, और उसके बाद बातचीत, अगर बात वहां तक पहुँचे तो। लेकिन आज युवा भारत में यह क्रम धीरे-धीरे बदल रहा है। अब लोग सिर्फ़ यह नहीं देख रहे कि सामने वाला कैसा दिखता है, बल्कि यह भी महसूस करना चाहते हैं कि उससे बात करना कैसा लगता है। इसी बदलाव के केंद्र में है संगीत। हालिया ट्रेंड रिपोर्ट्स और प्लेटफॉर्म इनसाइट्स बताती हैं कि जेन-ज़ी डेटर्स के लिए संगीत अब आकर्षण के सबसे अहम संकेतों में शामिल हो गया है। बहुत से युवाओं का कहना है कि समान म्यूज़िक टेस्ट किसी व्यक्ति को तुरंत ज़्यादा रिलेटेबल बना देता है। एक प्लेलिस्ट या पसंदीदा गाना कई बार उस भावनात्मक संदर्भ को बता देता है, जो एक अच्छी तरह लिखा बायो भी नहीं बता पाता। संगीत मूड, यादों, स्वभाव और सोच का संकेत देता है बिना कुछ समझाए। यह बदलाव केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि व्यवहार में आई थकान का नतीजा भी है। लगातार स्वाइप-आधारित डेटिंग ने युवाओं को मानसिक रूप से थका दिया है। ऐसे में लोग अब ऐसे संकेत खोज रहे हैं जो ज़्यादा इंसानी और कम लेन-देन जैसे लगें। संगीत इसमें स्वाभाविक भूमिका निभाता है। किसी एक सिंगर या म्यूज़िक एरा की साझा पसंद बातचीत को सहज बना देती है, वहीं म्यूज़िक टेस्ट का न मिलना कई बार भावनात्मक दूरी का संकेत भी बन जाता है। फोटो जहां सजाई-संवरी होती हैं, वहीं म्यूज़िक पसंद अक्सर ज़्यादा सहज और सच्ची होती है। आज की डेटिंग में संगीत व्यक्तित्व का सबसे ईमानदार संकेत बन गया है,कहते हैं Anirban Banerjee, को फाउंडर और CMO, Flutrr। “तस्वीरें क्यूरेट की जाती हैं, बायो एडिट किए जाते हैं, लेकिन म्यूज़िक टेस्ट स्वाभाविक होता है। यह किसी व्यक्ति के मूड, यादों और भावनात्मक स्वभाव को दर्शाता है। खासकर जेन-ज़ी के लिए, एक साझा गाना या प्लेलिस्ट, किसी परफेक्ट इंट्रोडक्शन से कहीं ज़्यादा जल्दी अपनापन पैदा कर देती है। वैश्विक डेटिंग रिपोर्ट्स भी इस ट्रेंड को मजबूत करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग चार में से तीन जेन-ज़ी यूज़र्स मानते हैं कि संगीत की अनुकूलता, शारीरिक आकर्षण जितनी या उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। भारत में यह जुड़ाव और गहरा है, जहां गाने भाषा, संस्कृति और यादों से जुड़े होते हैं। बॉलीवुड से लेकर इंडी म्यूज़िक तक, संगीत अक्सर यह बता देता है कि कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से कैसे जुड़ता है। डेटिंग प्लेटफॉर्म्स यह भी देख रहे हैं कि म्यूज़िक आधारित बातचीत ज़्यादा देर तक चलती है और शुरुआती झिझक कम होती है। जब लोग किसी गाने, लिरिक्स या मूड के ज़रिये बात शुरू करते हैं, तो बातचीत ज़्यादा निजी और सहज हो जाती है, बजाय सामान्य “हाय” या “क्या हाल है” जैसे संदेशों के।संगीत का असर ऑनलाइन तक सीमित नहीं है। आज युवा कॉफी डेट्स की जगह कॉन्सर्ट्स, लाइव गिग्स और म्यूज़िक-आधारित अनुभवों को डेट के रूप में चुन रहे हैं। ऐसे माहौल में बातचीत का दबाव कम होता है और साझा अनुभव के ज़रिये जुड़ाव स्वाभाविक रूप से बनता है। अनिरबान बनर्जी के अनुसार, यह एक बड़े सांस्कृतिक बदलाव का संकेत है। डेटिंग अब स्वाइप आधारित जजमेंट से हटकर वाइब-आधारित कनेक्शन की ओर बढ़ रही है। वे कहते हैं। “संगीत लोगों को धीमा होने, भावनात्मक संकेत समझने और बिना दबाव बातचीत शुरू करने में मदद करता है। यह संवाद की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उसे ज़्यादा मानवीय बना रहा है। सुरक्षा और सहजता भी इस बदलाव का अहम हिस्सा हैं। खासकर महिलाओं और पहली बार डिजिटल डेटिंग करने वालों के लिए, संगीत-आधारित जुड़ाव भरोसा बनाने का एक कम दबाव वाला तरीका बन रहा है। यह बातचीत की रफ्तार को संतुलित करता है और डेटिंग को प्रदर्शन की बजाय अनुभव बनाता है। जैसे जैसे डेटिंग संस्कृति बदल रही है, एक बात साफ़ है युवा भारत अब सिर्फ़ स्क्रीन पर अच्छे दिखने वाले मैच से संतुष्ट नहीं है। उन्हें ऐसे रिश्ते चाहिए जो महसूस में सही लगें। और अब यह एहसास अक्सर किसी स्वाइप से नहीं, बल्कि किसी गाने से शुरू होता है।

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