फरीदाबाद- एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका, दिल्ली के डॉक्टरों ने हरियाणा की एक 54 वर्षीय महिला का हार्ट ट्रांसप्लांट कर उन्हें एक नई जिंदगी प्रदान की है। इस महिला के हृदय ने काम करना बंद कर दिया था। वो सालों से कार्डियेक डिस्फंक्शन के कारण जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही थीं। सर्वोत्तम मेडिकल थेरेपी और आधुनिक प्रक्रियाओं से भी उन्हें मदद नहीं मिल पा रही थी। फिर एक ब्रेन डेड डोनर के स्वस्थ हृदय ने उन्हें जीवन का दूसरा मौका प्रदान किया। मरीज को हॉस्पिटल में गंभीर हालत में लाया गया था। उनका इजेक्शन फ्रैक्शन बहुत कम यानी 15 प्रतिशत रह गया था। उनके पूरे शरीर में सूजन थी और बहुत ज्यादा थकान बनी हुई थी। उन्हें साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। वो चलने या बैठने में असमर्थ थीं। पिछले दिनों में कई बार हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद वो 10 दिनों से इंट्रा-एयोर्टिक बैलून पंप (आई.ए.पी.बी) सपोर्ट (जो हृदय को पंप करने में मदद करता है) पर थीं।डॉ. युगल किशोर मिश्रा, चेयरमैन – मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियेक साईंसेज़ एवं चीफ़ कार्डियोवैस्कुलर सर्जन, दिल्ली, ने कहा, हमारी यह उपलब्धि एक विस्तृत, आत्मनिर्भर हार्ट फेल्योर एवं ट्रांसप्लांट प्रोग्राम का निर्माण करने के लिए सालों के अथक परिश्रम का नतीजा है। हम हार्ट फेल्योर के अलग-अलग चरणों में मरीजों का इलाज व सर्जरी कर चुके हैं। हम सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें सही समय पर सही उपचार मिल सके। हार्ट ट्रांसप्लांट से मरीज को न केवल जीवन का एक और मौका मिला है, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को आशा व बेहतर जीवन भी प्राप्त हुए हैं। मरीज के शरीर ने नए हार्ट के लिए अच्छी प्रतिक्रिया दी और वो 15 दिनों में ही अच्छी रिकवरी करने लगीं। कई महिलाओं में कार्डियेक समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पहचानना और इलाज करना बहुत जरूरी होता है।
