नई दिल्ली – LNJ Bhilwara Group ने नई दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में एक युगपुरुष का आयोजन किया। गुरू-शिष्य के दिव्य संबंध से प्रेरित इस नाटक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 600 सीटों वाला ऑडिटोरियम हाउसफुल रहा, दर्शकों में नाटक को लेकर उत्साह साफ झलक रहा था। ठाकुर रामकृष्ण परमहंस के जीवन से प्रेरित, श्री एल.एन. झुनझुनवाला, 65 वर्षों से रामकृष्ण मिशन के साथ जुड़े हुए हैं। वे दर्शकों के लिए ऐसा नाटक लाना चाहते थे जो गुरू एवं शिष्य के बीच के पवित्र बंधन पर रोशनी डाले। इसी विचार के साथ उन्होंने लेखक एवं निर्देशक जे.पी. सिंह को नाटक की कहानी लिखने के लिए मार्गदर्शन दिया। दिल्ली के जाने-माने थिएटर ग्रुप रंगभूमि ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ मंच पर नाटक का प्रदर्शन किया। गौरतलब है रंगभूमि 1992 से थिएटर में सक्रिय है और पिछले सालों के दौरान कई बेहतरीन नाटक पेश कर चुका है। यह सांस्कृतिक पहल गुरू-शिष्य की प्रथा को बढ़ाने, देश की आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखने और ठाकुर रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं को अपनाने के लिए ग्रुप के समर्पण को दर्शाती है। थिएटर और इस तरह के प्रोग्रामों के ज़रिए ग्रुप लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस नाटक के ज़रिए यह दिखाया गया कि कैसे श्री रामकृष्ण परमहंस ने नरेनद्रनाथ को स्वामी विवेकानंद बनने की आध्यात्मिक यात्रा में सहयोग किया। अपने गुरू के मार्गदर्शन में विवेकानंद ने संदेश दिया ‘उठो, जागो और तब तक मत रूको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।’ जागृति और दृढ़ता का यह संदेश कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है। भारत में गुरू-शिष्य की पावन परम्परा को उजागर करने वाली नाटक की कहानी दर्शकों के दिल को छू गई। जहां गुरू का सम्मान न सिर्फ एक शिक्षक के रूप में बल्कि ऐसी दिव्य शक्ति के रूप में किया जाता है, जो शिष्य को अज्ञानता से आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती है। इस अवसर पर श्री एल.एन. झुनझुनवाला ने कहा,यह देखकर अच्छा लगता है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और थिएटर प्रशंसक एक ही छत के नीचे इकट्ठा हुए हैं। रंगभूमि ने इससे पहले भी श्री अरबिंदो के जीवन को खूबसूरती से चित्रित किया है और युगपुरुष के साथ उन्होंने एक बार फिर से इतिहास एवं आध्यात्म को मंच पर जीवंत कर दिया है। विवेकानंद ने आत्म-खोज एवं सेवा का जो संदेश दिया वह आज के समाज में बेहद प्रासंगिक है। हम विवेकानंद के इसी संदेश को नाटक के ज़रिए दर्शकों तक पहुंचाना चाहते थे। इससे पहले भी ग्रुप ने अरबिंदो आश्रम में निरजन कारावास, बाजी प्रभो और भवानी भारती जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है। पिछले साल, श्री एल.एन. झुनझुनवाला के 96वें जन्मदिन पर ग्रुप ने दिल्ली के श्रीराम ऑडिटोरियम में दक्षिणेश्वर एक उत्तरन, एक समन्वय का प्रदर्शन किया था।इसी साल कमानी ऑडिटोरियम में दो दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह भीलवाड़ा सुर संगम का आयोजन भी किया गया था, जहां जाने-माने कलाकार जैसे श्री पूर्बायन चैटर्जी, पंडित साजन स्वरांश मिश्रा, पंडित प्रत्यूष बैनर्जी और पंडित उल्हास कशालकर तथा पूरे शहर से संगीत के पारखी मौजूद रहे। पिछले सालों के दौरान भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित दिग्गजों जैसे विदूषी किशोरी अमोनकर, उस्ताद राशिद खान, उस्ताद सुजात खान, पंडित अजय-कौशिकी चक्रवर्ती, पंडित शिव कुमार शर्मा ने बीएसएस मंच की शोभा बढ़ाई है। युगपुरुष जे.पी. सिंह के सबसे शानदार प्रोडक्शन्स में से एक है, जिसके हर पहलु ने दर्शकों को खूब लुभाया फिर चाहे सैट हो, लाईट डिज़ाइन, साउंड या कॉस्ट्यूम्स। मंच पर तीन लेयर्स के चलते सभी दृश्यों में अद्भुत गहराई देखने को मिली, खासतौर पर वह दृश्य जहां विवेकानंद को रामकृष्ण परमहंस की दिव्यता का बोध होता है, जिसे एक पौराणिक कथा के ज़रिए प्रस्तुत किया गया है। यह नाटक अपने आप में बेहद प्रभावशाली था। बेहतरीन कलाकारों के अभिनय और संगीतमय आध्यात्मिक प्रस्तुति ने इस शाम को यादगार बना दिया।