झारखंड- पवित्र तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी स्थित गुणायतन में जैन परंपरा के अत्यंत महत्वपूर्ण जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव का भव्य आयोजन मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया है। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की परंपरा के प्रख्यात संत हैं। वे अपने प्रवचनों और विविध सामाजिक पहलों के माध्यम से आत्मजागरण, अहिंसा और संयम का संदेश देते रहे हैं।गुणायतन केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मा की परमात्मा की ओर यात्रा का जीवंत केंद्र है। जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक आत्मा में अनंत शक्तियां निहित होती हैं। कर्मों के आवरण हटने के साथ ये शक्तियां प्रकट होती जाती हैं और आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप की ओर अग्रसर होती है। इसी आध्यात्मिक उत्कर्ष को गुणस्थान के माध्यम से समझाया जाता है।इसी दर्शन को अनुभवात्मक रूप देने के लिए गुणायतन अनुभव केंद्र की स्थापना की गई है, जहां जैन दर्शन के 14 गुणस्थान को अत्यंत कलात्मक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह केंद्र साधकों को आत्मा की आंतरिक यात्रा को समझने और अनुभव करने का अवसर देता है। यहां निर्मित पंचायतन शैली का भव्य शिल्पकारी युक्त पत्थर मंदिर भारतीय स्थापत्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण जैनेश्वरी दीक्षा है, जिसमें दीक्षार्थी गृह, परिवार और समस्त सांसारिक बंधनों का पूर्ण त्याग कर संन्यास जीवन स्वीकार करते हैं। यह जीवन अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों पर आधारित होता है और मोक्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज तथा मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित संत संघ का स्वागत भक्ति, आरती और जयघोष के साथ किया गया। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी इस महोत्सव को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।इस आयोजन की एक विशेष झलक के रूप में, मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित ग्लोबल प्रामाणिक पाठशाला के माध्यम से बच्चे, उनके अभिभावक और वॉलंटियर्स विभिन्न देशों से सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं। मेहंदी और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए यह दीक्षा महोत्सव वैश्विक स्तर पर हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा,गुणायतन आत्मा की परमात्मा तक की यात्रा का प्रतीक है। यह केवल तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मजागरण का एक जीवंत अनुभव है, जहां धर्म, दर्शन और विज्ञान का सुंदर संगम होता है। यह दीक्षा महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि आत्मबोध, त्याग और आंतरिक शांति की ओर प्रेरित

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