नई दिल्ली- ट्राया हैल्थ ने आज अपनी ‘फीमेल हेयर हैल्थ स्टडी’ के नतीजे सबके सामने रखे। पूरे भारत की 3,80,363 महिलाओं के आंकड़ों पर टिकी इस स्टडी में तनाव का स्तर, नींद की क्वालिटी, पाचन की सेहत और बाल गिरने के तरीके की जांच हुई। नतीजों में दिखा कि बाल झड़ने से परेशान महिलाओं में तनाव, नींद की कमी और पेट की समस्याएं ज्यादा आम हैं। बाल पतले होने या मांग चौड़ी होने की शिकायत वाली महिलाओं में ये तीनों वजहें खास तौर पर प्रमुख रहीं।इन नतीजों पर ट्राया की राय साफ है: तनाव, नींद और पाचन, तीनों बाल झड़ने के जाने-माने जैविक कारण हैं और तीनों का काम करने का अपना अलग, भलीभांति दर्ज तरीका है। लंबे समय का तनाव कोर्टिसोल को बढ़ाता है, जिससे बालों के बढ़ने की अवधि घट जाती है। कमजोर नींद रात में रोम कूपों की मरम्मत को रोकती है। पाचन में गड़बड़ी आयरन, विटामिन डी और ज़िंक जैसे उन पोषक तत्वों के सोखे जाने में बाधा डालती है, जो रोम कूपों के विकास के लिए जरूरी हैं।इसके बावजूद ज्यादातर महिलाएं इस समस्या का हल तेल, शैम्पू और ऊपर से लगाए जाने वाले उपचारों में खोजती हैं। यह स्टडी बताती है कि बालों के पीछे शरीर के भीतर असल में क्या हो रहा है।स्टडी की 52 प्रतिशत महिलाएं मध्यम से तेज तनाव में हैं, और हर 4 में से 1 से ज्यादा (25.3 प्रतिशत) लगभग रोज तनाव महसूस करती हैं। लंबे समय तक रहने वाला तनाव बाल झड़ने का जाना-माना जैविक कारण है। शरीर के मुख्य तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के बढ़ने पर बालों की सक्रिय विकास अवधि छोटी हो जाती है और रोम कूप समय से पहले आराम की अवस्था में चले जाते हैं। लगातार तनाव एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन को भी बिगाड़ सकता है, जो बालों की बढ़त को सहारा देता है और रोम कूपों को सुरक्षित रखता है। इन हार्मोनों में गड़बड़ी होने पर बाल झड़ने का खतरा बढ़ जाता है।इसका असर धीरे-धीरे दिखता है। तनाव से बाल अचानक नहीं झड़ते, बल्कि कई महीनों तक तनाव जमा होता है और फिर बाल झड़ना शुरू होता है। बदलाव धीमा होने की वजह से ज्यादातर महिलाएं अपने तनाव और बालों की समस्या के बीच कड़ी नहीं जोड़ पातीं।स्टडी की 38.1 प्रतिशत महिलाएं ठीक से सो नहीं पा रहीं। खराब नींद भी बाल झड़ने का जाना-माना जैविक कारण है। गहरी नींद में शरीर ग्रोथ हार्मोन छोड़ता है, जो रोम कूपों की कोशिकाओं के नवीनीकरण के लिए जरूरी है। रात की नींद बार-बार टूटे तो मरम्मत का वक्त घट जाता है। जिन रोम कूपों की पूरी मरम्मत नहीं होती, वे हर चक्र के साथ पतले और कमजोर बाल बनाते हैं। वक्त के साथ बालों का घनापन कम होता जाता है और बाल धीरे-धीरे, दूर-दूर तक झड़ने लगते हैं। ज्यादातर महिलाएं इसे तनाव या उम्र का असर समझ लेती हैं, जबकि बरसों से बढ़ती नींद की कमी को कारण के रूप में लगभग कभी नहीं पहचाना जाता।स्टडी की 51.7 प्रतिशत महिलाओं को पेट की तकलीफें हैं, जैसे एसिडिटी, पेट फूलना (ब्लोटिंग), गैस या कब्ज़।जिन पोषक तत्वों पर रोम कूप निर्भर रहते हैं, वे आंतों में ही सोखे जाते हैं। पाचन ठीक न हो तो खाना पर्याप्त होने के बावजूद इनका अवशोषण कम हो सकता है। कोई महिला अच्छा खाती हो और सप्लीमेंट भी लेती हो, फिर भी अगर उसकी आंतें पोषण को सही ढंग से प्रोसेस नहीं कर रहीं, तो रोम कूपों में पोषण की कमी हो सकती है। महिलाओं में बाल झड़ने की सबसे आम, मगर सबसे कम पहचानी जाने वाली वजहों में से एक आयरन की कमी है, जो अक्सर अनदेखी रह जाती है क्योंकि पेट से इसके संबंध की जांच कभी होती ही नहीं।बालों का झड़ना इस बात का संकेत है कि शरीर के भीतर कुछ गड़बड़ है। मैंने हजारों महिलाओं से बात की है, जो भीतर देखने के बजाय किसी चमत्कार की उम्मीद में बार-बार प्रोडक्ट्स और सप्लीमेंट्स बदलती रहती हैं। उनमें से लगभग किसी को भी नहीं बताया गया कि उनका स्ट्रेस, उनकी नींद या उनकी गट हैल्थ उनके बालों से जुड़ी है। भारत में यह बात लंबे समय से उठी ही नहीं। यह स्टडी इसी बातचीत को शुरू करने की हमारी कोशिश है।तनाव, नींद और पाचन एक-दूसरे से अलग नहीं चलते, ये आपस में असर डालते हैं। तनाव नींद बिगाड़ता है, और कम नींद कोर्टिसोल को ऊंचा बनाए रखती है, जिससे हार्मोन असंतुलित होते हैं और बालों की बढ़त पर असर पड़ता है। पेट और दिमाग एक-दूसरे को संकेत भेजते हैं, इसलिए पेट की परेशानी और तनाव एक-दूसरे को और बढ़ा सकते हैं, जबकि कमजोर अवशोषण से रोम कूपों तक जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता। स्टडी में ये तीनों अक्सर साथ मिले। 46.6 प्रतिशत महिलाओं में इनमें से दो या ज्यादा मौजूद थे।
