नई दिल्ली- अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज वेलफेयर एसोसिएशन ने रेलवे मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से रेलवे प्लेटफॉर्मों पर संचालित खान-पान स्टॉल, ट्रॉली, ट्रे, ढाबा और अन्य वेंडिंग यूनिट्स के लाइसेंसधारकों को तत्काल राहत देने की मांग की है। एसोसिएशन ने सरकार का ध्यान इस ओर भी दिलाया है कि आज से देशभर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की क़ीमतों में क़रीब एक हज़ार रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है ऐसे में वेंडरों के सामने भारी परेशानी खड़ी हो गई है ।एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंदर गुप्ता ने रेल मंत्री को भेजे पत्र में कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट, विशेषकर मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध और LNG गैस संयंत्रों पर हमलों के कारण LPG गैस और कच्चे तेल की भारी कमी उत्पन्न हो गई है। इसके चलते 14 किलो के गैस सिलेंडर की कीमत 2,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही, 1 मार्च 2026 से सरकार द्वारा कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है, जिससे छोटे विक्रेताओं की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।पत्र में बताया गया कि चाय और मिनरल वाटर, जो कुल बिक्री का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं, उनकी दरों में पिछले 10 वर्षों से कोई संशोधन नहीं हुआ है। जहां शहरों में मिनरल वाटर 20 रुपये में बिकता है, वहीं रेलवे प्लेटफॉर्मों पर इसे केवल 15 रुपये में बेचना पड़ता है। हाल ही में रेलनीर (Rail Neer) की MRP भी 14 रुपये कर दी गई, जिससे विक्रेताओं का लाभ और कम हो गया।लाइसेंसधारकों ने यह भी बताया कि उन पर 18% GST, 5% GST ऑन सेल्स, 12% लाइसेंस फीस, 10–15% वेंडर्स कमीशन और 5–10% अन्य करों का अतिरिक्त बोझ है। कुल मिलाकर लगभग 50% राशि टैक्स और शुल्क में चली जाती है, जबकि वास्तविक लाभ मात्र 30% के आसपास ही रह जाता है।एसोसिएशन के अनुसार, देशभर में 20 से 30 प्रतिशत ढाबे, रेस्टोरेंट और होटल पहले ही इस आर्थिक संकट के कारण बंद हो चुके हैं। कई लाइसेंसधारकों ने अपनी 20% से 50% यूनिट्स तक सरेंडर करने के लिए आवेदन दे दिए हैं, क्योंकि वे लगातार भारी नुकसान झेल रहे हैं और कोविड-19 महामारी के वित्तीय प्रभाव से अब तक उबर नहीं पाए हैं।पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत में LPG आपूर्ति को सामान्य स्तर पर पहुंचने में अभी लगभग 3 वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में एसोसिएशन ने रेलवे प्रशासन से महामारी काल की तरह लाइसेंस फीस में राहत देने और चाय व मिनरल वाटर की बिक्री दरों में वृद्धि करने की मांग की है।एसोसिएशन ने अपील की है कि रेलवे, जो एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक संस्था है, अपने हितधारकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर शीघ्र निर्णय ले और प्रभावित लाइसेंसधारकों को आवश्यक राहत प्रदान करे।

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