नई दिल्ली – ऑर्थोटिक्स एंड प्रोस्थेटिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, दिल्ली चैप्टर ने राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय प्रोस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटिस्ट दिवस 2026 का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पुनर्वास, सहायक तकनीक और दिव्यांगता समावेशन के भविष्य पर चर्चा करने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नीति निर्माता, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, शिक्षाविद, स्टार्टअप्स और स्थापित कंपनियाँ एक साथ मंच पर आईं।यह कार्यक्रम एलिम्को के संस्थागत कायाकल्प, विभाग की पर्पल डॉट पहल इंजीनियरिंग नवाचार में आईआईटी के योगदान, सरकारी योजनाओं, व्यावसायिक मान्यता और भारत एवं विदेशों में रोजगार के अवसरों पर केंद्रित रहा।एलिम्को के सीएमडी श्री प्रवीण कुमार ने भारत के पुनर्वास परिवेश (इकोसिस्टम) को मजबूत करने के लिए आपसी सहयोग और सरकारी पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व पर प्रकाश डाला।एलिम्को के सीएमडी श्री प्रवीण कुमार ने स्वदेशी विनिर्माण और किफायती सहायक तकनीक पर भी जोर देते हुए कहा, “पुनर्वास का भविष्य तकनीकी नवाचार को सामर्थ्य और सुगमता के साथ जोड़ने में निहित है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उन्नत सहायक समाधान उन लोगों तक पहुँचें जिन्हें इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।आरसीआई के सदस्य सचिव, श्री आशीष ठाकरे (आईएएस) ने पर्पल डॉट पहल और पुनर्वास सेवाओं में व्यावसायिक मान्यता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षण और मानकों के महत्व को रेखांकित किया।ओपीएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एम.सी. दास ने इस बात पर बल दिया कि दिव्यांगजनों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ सुनिश्चित कराने के लिए व्यापक जागरूकता और आउटरीच अत्यंत आवश्यक हैं।ओपीएआई दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष श्री राजेश दास ने सुगम और समावेशी गतिशीलता में रेलवे क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डाला और योग्य प्रोस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटिस्ट के लिए करियर के अवसरों का विस्तार करने हेतु मजबूत घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय भर्ती नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।ओपीएआई दिल्ली चैप्टर के उपाध्यक्ष श्री शंभू कुमार यादव ने जोर देकर कहा कि उभरती हुई तकनीकों को प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर किफायती और सुलभ समाधानों के माध्यम से जमीनी स्तर पर दिव्यांगजनों तक पहुँचना चाहिए।आईपीओडी 2026 के आयोजन सचिव एवं ओपीएआई दिल्ली चैप्टर के सचिव डॉ. अगेंद्र कुमार ने पेशेवरों, सरकार, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों और लाभार्थियों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान करते हुए कहा,हमारा उद्देश्य केवल कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए; इसका उद्देश्य गतिशीलता को पुनर्स्थापित करना, आत्मविश्वास जगाना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने में सक्षम बनाना होना चाहिए।एक्सोबॉट डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड (EXOBOT dynamics private limited) के संस्थापक एवं सीईओ श्री मुनीश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय बायोनिक्स किस प्रकार वैश्विक सहायक तकनीकों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।इसी कंपनी ने एक प्रायोजन कार्यक्रम के तहत 10 लाभार्थियों को ‘ग्रिपएक्स मायो हैंड्स’ (gripX myo hands) वितरित किए।कार्यक्रम के दौरान इंस्टालिम्ब ने एक 3D स्कैनिंग मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया।इस कार्यक्रम में कई स्टार्टअप्स और स्थापित कंपनियों की भी भागीदारी रही, जिन्होंने सहायक तकनीक और पुनर्वास में अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया। विचार-विमर्श में जॉब फेयर और लाइव इंटरव्यू, उद्यमिता व इन्क्यूबेशन, अंतर्राष्ट्रीय करियर अवसर, सरकार-उद्योग सहयोग और उन्नत तकनीकें शामिल रहीं जिनमें बायोनिक प्रोस्थेटिक्स, माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित प्रणालियाँ, 3D प्रिंटिंग, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट रिहैबिलिटेशन समाधान शामिल हैं।आईपीओडी 2026 ने प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स को भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक अभिन्न अंग मानने और नवाचार, व्यावसायिक विकास, किफायती तकनीक व समावेशी रोजगार के माध्यम से इस पूरे परिवेश को मजबूत करने के महत्व को पुनः दोहराया।इसका मुख्य संदेश बिल्कुल स्पष्ट था: गतिशीलता एक अधिकार है, पुनर्वास एक आवश्यकता है, और समावेशन हर किसी की जिम्मेदारी है।
