नई दिल्ली – भारत सरकार के माननीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026′ के सस्टेनेबिलिटी एंड सर्कुलैरिटी इम्पैक्ट पवेलियन में क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और ग्लोबल अलायंस फॉर टेक्सटाइल सस्टेनेबिलिटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘इंडिया टेक्सटाइल्स एंड अपेरल CXO ब्लूप्रिंट 2030′ जारी की।इस अवसर पर श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ‘भारत टेक्स’ के दौरान वैश्विक खरीदारों की उपस्थिति में इस रिपोर्ट का जारी होना बिल्कुल उपयुक्त समय पर हुआ है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में प्रस्तुत निष्कर्ष भारत के वस्त्र इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों से आह्वान किया कि वे रिपोर्ट में दिए गए व्यावहारिक सुझावों का लाभ उठाकर विकास के नए अवसरों को साकार करें और भारतीय वस्त्र क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और मजबूत बनाएं।CMAI के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने कहा,भारत ने एक प्रमुख विनिर्माण गंतव्य (मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन) के रूप में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। हमारी विकास यात्रा का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि हम ग्राहकों और वैश्विक ब्रांडों के लिए अधिक मूल्य सृजित करने वाली क्षमताओं का कितनी सफलतापूर्वक निर्माण करते हैं। इंडिया टेक्सटाइल्स एंड अपैरल CXO ब्लूप्रिंट 2030’ का उद्देश्य उद्योग जगत के लीडर्स को नवाचार, सहयोग, स्थिरता और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप उपलब्ध कराना है। हमारा सामूहिक लक्ष्य भारतीय उद्यमों को केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन तक सीमित न रखते हुए विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करने में मदद करना है। इंडिया टेक्सटाइल्स एंड अपेरल CXO ब्लूप्रिंट 2030’ एक रोडमैप है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सस्टेनेबिलिटी, ट्रेसेबिलिटी (उत्पाद की सोर्सिंग का पता लगाना), उत्पाद नवाचार और तकनीक-आधारित मैन्युफैक्चरिंग की ओर हो रहे बदलावों के बीच भारतीय कपड़ा और परिधान उद्यमों को अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह CXOs, निर्माताओं, ब्रांड्स, नीति निर्माताओं और इकोसिस्टम के भागीदारों के लिए एक गाइड के रूप में काम करेगा, जो भारत को एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार कपड़ा व परिधान निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत के विकास का अगला चरण केवल मैन्युफैक्चरिंग के बड़े पैमाने (Scale) से तय नहीं होगा, बल्कि पूरी वैल्यू चेन (मूल्य श्रृंखला) में क्षमताएं विकसित करने की उद्योग की योग्यता पर निर्भर करेगा। हालांकि भारत वर्तमान में कपड़ा और परिधान का दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है, जो वैश्विक व्यापार में लगभग 4.1% की हिस्सेदारी रखता है और लगभग 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है, लेकिन वैश्विक व्यापार में तेजी से विस्तार के बावजूद भारत का निर्यात लगातार छह वर्षों से लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर पर स्थिर है।भारत के वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र ने वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है, जबकि घरेलू बाजार के 250 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि विनिर्माण के पैमाने को वैश्विक नेतृत्व में बदलने के लिए लागत आधारित प्रतिस्पर्धात्मकता से क्षमता-आधारित प्रतिस्पर्धात्मकता (कैपेबिलिटी कॉम्पिटिटिवनेस) की ओर बदलाव आवश्यक है।रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक सोर्सिंग रणनीतियों में बदलाव और यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के साथ नए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के कारण भारत के अवसर मजबूत हो रहे हैं, जिससे पारदर्शी और टिकाऊ सप्लाई चेन की मांग बढ़ रही है। हालांकि, रिपोर्ट सचेत भी करती है कि ये फायदे निर्यात वृद्धि में तभी बदलेंगे जब उद्यम सही उत्पादों, दस्तावेज़ीकरण, ट्रेसेबिलिटी सिस्टम और परिचालन क्षमताओं के साथ पूरी तरह तैयार होंगे।यह ब्लूप्रिंट पांच प्राथमिकताओं की पहचान करता है, जो आने वाले दशक में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता तय करेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, ये प्राथमिकताएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इन्हें केवल अलग-थलग सस्टेनेबिलिटी पहलों के रूप में देखने के बजाय उद्यम की मुख्य रणनीति में शामिल किया जाना चाहिए सर्कुलैरिटी ( चक्रियता)एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी (एंड टू एंड ट्रेसेबिलिटी)संसाधन-कुशल विनिर्माण उत्पाद विविधीकरण एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से तकनीक को अपनानाCMAI के ईएसजी (ESG) समिति के अध्यक्ष और मानद महासचिव नवीन सैनानी ने कहा, “सस्टेनेबिलिटी अब केवल एक आकांक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह व्यावसायिक प्रतिस्पर्धात्मकता का मुख्य हिस्सा बनती जा रही है। यह ब्लूप्रिंट चर्चा से क्रियान्वयन की ओर उद्योग के संक्रमण को दर्शाता है। यह उद्यमों, विशेष रूप से एमएसएमई (MSMEs) को यह समझने में मदद करता है कि कैसे सस्टेनेबिलिटी, तकनीक और परिचालन उत्कृष्टता मिलकर लचीलेपन को मजबूत कर सकते हैं और नए व्यावसायिक अवसर खोल सकते हैं। हमारा ध्यान व्यावहारिक कार्रवाई को सक्षम बनाने पर है जो दीर्घकालिक मूल्य तैयार करे।GATS के निदेशक परविंदर सिंह ने कहा,भारत के पास दुनिया के सबसे मजबूत कपड़ा विनिर्माण इकोसिस्टम में से एक है। अब अवसर इन क्षमताओं को मजबूत सहयोग, ज्ञान साझाकरण और बेहतर क्रियान्वयन के माध्यम से जोड़ने का है। यह ब्लूप्रिंट उद्यमों, समूहों (क्लस्टर्स) और संस्थानों को एक एकीकृत इकोसिस्टम के रूप में काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जहां सस्टेनेबिलिटी और प्रतिस्पर्धात्मकता एक-दूसरे को मजबूती प्रदान करते हैं, जिससे भारत को स्थायी वैश्विक नेतृत्व बनाने में मदद मिलेगी।
