नई दिल्ली- सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान NEXT IAS के करोल बाग केंद्र में IRSS अधिकारी प्रेम शंकर झा की पुस्तक ‘Modified Governance From Ancient Traditions to Citizen-Centric Administration का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासन, न्याय, सामाजिक क्षेत्र, साहित्य और प्रकाशन जगत से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ बड़ी संख्या में सिविल सेवा अभ्यर्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में श्री बी. सिंह, Chairman and Director, NEXT IAS,श्रीमती गीतांजलि शर्मा, Judge एवं Vice Chairman, NADA; प्रेम शंकर झा, IRSS एवं पुस्तक के लेखक; सामाजिक कार्यकर्ता डी. पी. सिंह प्रभात प्रकाशन के स्वामी प्रभात तथा प्रख्यात लेखक शिव शंकर झा की गरिमामयी उपस्थिति रही।पुस्तक के लेखक प्रेम शंकर झा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए Governance की बदलती अवधारणा, नागरिक-केंद्रित प्रशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। अपने प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर उन्होंने कहा कि Governance को केवल सरकारी संस्थानों, नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। प्रभावी शासन की वास्तविक कसौटी इस बात में निहित है कि प्रशासन नागरिकों की आवश्यकताओं, अपेक्षाओं और सहभागिता को किस प्रकार अपनी नीतियों और कार्यप्रणाली में स्थान देता है।उन्होंने सिविल सेवा अभ्यर्थियों से आग्रह किया कि वे Governance को केवल UPSC के पाठ्यक्रम के एक हिस्से के रूप में न देखें। उनके अनुसार, शासन की वास्तविक समझ तभी विकसित होती है, जब उसे नागरिक जीवन, सार्वजनिक नीति, प्रशासनिक जवाबदेही और राष्ट्र निर्माण की व्यापक प्रक्रिया से जोड़कर समझा जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन केवल सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है; जागरूक, जिम्मेदार और सहभागी नागरिक भी एक सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला होते हैं।प्रेम शंकर झा ने विशेष रूप से Gen Z और Gen Alpha की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक और सूचना तक व्यापक पहुंच ने नई पीढ़ी के लिए Governance को समझने और उसमें भागीदारी के नए अवसर पैदा किए हैं। आज के युवा केवल सरकारी नीतियों के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे सार्वजनिक विमर्श, नागरिक सहभागिता, नवाचार और नीति संबंधी विचारों में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपनी जागरूकता, तकनीकी क्षमता और सामाजिक समझ का उपयोग सकारात्मक परिवर्तन और बेहतर शासन व्यवस्था के निर्माण में करने के लिए प्रेरित किया।Modified Governance: From Ancient Traditions to Citizen-Centric Administration में प्रेम शंकर झा ने भारत की प्राचीन एवं पारंपरिक शासन अवधारणाओं से लेकर आधुनिक नागरिक-केंद्रित प्रशासन तक की यात्रा को समकालीन संदर्भ में समझने का प्रयास किया है। पुस्तक Governance को भारतीय सामाजिक संदर्भ, प्रशासनिक अनुभव, संस्थागत विकास और बदलती नागरिक अपेक्षाओं के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करती है।श्री बी. सिंह, Chairman and Director, NEXT IAS एवं MADE EASY Group, ने इस अवसर पर कहा कि सिविल सेवा की तैयारी केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि भावी प्रशासकों में शासन, समाज और नागरिकों के बीच संबंधों की व्यापक समझ भी विकसित होनी चाहिए। कार्यक्रम का एक विशेष व्यक्तिगत और शैक्षणिक पक्ष यह भी रहा कि प्रेम शंकर झा कभी श्री बी. सिंह के विद्यार्थी रहे हैं। वर्षों बाद अपने विद्यार्थी की पुस्तक के विमोचन का हिस्सा बनना इस अवसर को और भी विशेष बनाता है।कार्यक्रम में उपस्थित श्रीमती गीतांजलि शर्मा, डी. पी. सिंह, प्रभात जी और प्रख्यात लेखक शिव शंकर झा की सहभागिता ने संवाद को प्रशासनिक, सामाजिक, साहित्यिक और बौद्धिक दृष्टि से और व्यापक बनाया। विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों की उपस्थिति ने Governance को केवल प्रशासनिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि समाज, नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यापक विमर्श के रूप में सामने रखा।
