नई दिल्ली – नाबार्ड के नेतृत्व में गठित दिल्ली की अल्पकालिक सहकारी ऋण संस्थाओं (Short Term Cooperative Credit Institutions) पर उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) बैठक की अध्यक्षता श्री पांडुरंग के. पोले, आईएएस, सचिव (सहकारिता), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) ने की। बैठक में सहकारी संस्थाओं के प्रदर्शन की समीक्षा की गई तथा दिल्ली के सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।बैठक में श्री नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय, श्री कृष्ण कुमार सिंह, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (आरसीएस), जीएनसीटीडी, श्री अशोक कुमार, महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) तथा श्री राजीव कुमार कादयान, कार्यवाहक प्रबंध निदेशक, दिल्ली राज्य सहकारी बैंक (दिल्ली एसटीसीबी) सहित कांगड़ा कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड एवं जैन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रतिनिधियों तथा आरबीआई, आरसीएस, दिल्ली एसटीसीबी, नैबकॉन्स, नाबार्ड एवं अन्य हितधारक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।समिति ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के प्रदर्शन, नियामकीय अनुपालन, प्रौद्योगिकी पहलों तथा सुशासन संबंधी पहलुओं की समीक्षा की। चर्चा के दौरान अध्यक्ष ने बैंक के प्रमुख वित्तीय एवं व्यावसायिक मानकों में लंबे समय से बने हुए ठहराव पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि वर्तमान प्रवृत्तियों के बने रहने से संस्था की दीर्घकालिक प्रासंगिकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यथास्थिति का दृष्टिकोण” अब व्यवहार्य नहीं है तथा व्यवसाय विस्तार, ग्राहक आधार वृद्धि, नवाचार, डिजिटल रूपांतरण और बेहतर ग्राहक सेवा पर केंद्रित परिवर्तनकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।बैठक का एक प्रमुख निर्णय दिल्ली के सहकारी क्षेत्र का व्यापक निदानात्मक अध्ययन (डायग्नोस्टिक स्टडी) कराने की स्वीकृति रहा, जिसे नाबार्ड की ओर से नैबकॉन्स द्वारा संचालित किया जाएगा। यह अध्ययन दिल्ली के सहकारी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल होगी, क्योंकि अब तक राज्य में सहकारी संस्थाओं की संस्थागत, प्रशासनिक, परिचालन एवं व्यावसायिक स्थिति का इस स्तर पर कोई समग्र निदानात्मक अध्ययन नहीं किया गया है। अध्ययन के आधार पर सहकारी क्षेत्र के पुनरोद्धार, प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए साक्ष्य-आधारित रोडमैप तैयार किया जाएगा।समिति ने दिल्ली में सहकारी विकास के लिए समग्र एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अध्यक्ष महोदय ने उल्लेख किया कि शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) आरबीआई के नेतृत्व वाले टीएएफसीयूबी (TAFCUB) तंत्र के अंतर्गत पृथक रूप से विनियमित होते हैं। उन्होंने कहा कि एचएलसी में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उनकी भागीदारी से दिल्ली के सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र का अधिक व्यापक मूल्यांकन संभव होगा तथा क्षेत्र के विकास हेतु समन्वित नीतिगत प्रयासों को बल मिलेगा।बैठक के समापन पर नियामकीय अनुपालन को सुदृढ़ बनाने, संस्थागत सुशासन को मजबूत करने, डिजिटल रूपांतरण को गति देने, क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने तथा निदानात्मक अध्ययन को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
