नई दिल्ली – फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया ने आईफेक्स 2026 के जरिए भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए करीब 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात कारोबार का लक्ष्य रखा है। मकसद दो हैं दुनिया भर के बाजारों में भारत की मौजूदगी बढ़ाना, और नए विदेशी ग्राहक बनाना। यह कोशिश ऐसे समय हो रही है जब वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में भारत का फार्मा निर्यात पिछले साल की इसी अवधि से करीब 6.8% बढ़ा है।आईफेक्स का 12वां संस्करण 7 से 9 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। इसे फार्मेक्सिल, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सहयोग से आयोजित कर रही है। तीन दिन की इस प्रदर्शनी और सम्मेलन में 800 से अधिक प्रदर्शक, 600 से अधिक विदेशी कंपनियां और करीब 30,000 कारोबारी आगंतुक जुटेंगे, जिनमें निर्माता, निर्यातक, खरीदार, वितरक और खरीद एजेंसियां शामिल हैं। भारतीय फार्मा उत्पाद इस समय 150 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। आईफेक्स 2026 का पूरा जोर इसी पर रहेगा कि भारतीय कंपनियां अलग-अलग बाजारों के खरीदारों से जुड़ें और यह जुड़ाव निर्यात के सौदों में बदले। तय कार्यक्रम के तहत होने वाली खरीदार-विक्रेता बैठकों में भारतीय निर्माता और निर्यातक विदेशी कंपनियों से सीधे बात कर सकेंगे, चाहे बात प्रोडक्ट सोर्सिंग की हो, आपूर्ति की साझेदारी की, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की, या किसी और कारोबारी रिश्ते की। पहली तिमाही का यह प्रदर्शन दुनिया के पेचीदा व्यापार माहौल के बीच आया है, और यही बताता है कि भारत को अपनी फार्मा मौजूदगी नए बाजारों और नई उत्पाद श्रेणियों तक ले जानी क्यों चाहिए। ये रुझान आईफेक्स 2026 की अहम पृष्ठभूमि बनेंगे, जहां भारतीय कंपनियां फॉर्मूलेशन, एपीआई, बायोलॉजिकल्स, वैक्सीन, बायोसिमिलर, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और मेडिकल डिवाइस में अपनी ताकत दिखाएंगी। इतने बड़े दायरे को देखते हुए बाजारों में फैलाव आईफेक्स 2026 की चर्चाओं का मुख्य विषय रहेगा। आयोजन भारतीय कंपनियों को मौका देगा कि वे अलग-अलग इलाकों की मांग परखें, सोर्सिंग की बदलती जरूरतें समझें, और अपने मौजूदा विदेशी बाजारों से आगे जाकर नए खरीदारों से रिश्ता बनाएं। भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए यह मौका खास है। विदेशी खरीदारों की मौजूदगी उन्हें सीधे उन बाजारों और खरीद नेटवर्क तक पहुंचा देगी, जहां तक पहुंचने में आमतौर पर बहुत समय और पैसा लगता है। कंपनियां अपनी ताकत सामने रख सकेंगी, हर बाजार की अपनी जरूरतें समझ सकेंगी, और नए इलाकों में उतरने या फैलने की कारोबारी संभावनाएं परख सकेंगी। प्रदर्शनी में जेनेरिक्स, एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स फिनिश्ड फॉर्मूलेशन, बायोसिमिलर, वैक्सीन, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और मेडिकल डिवाइस में भारत की ताकत दिखेगी। सोर्सिंग साझेदारी, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक के हस्तांतरण पर भी बात होगी, जो बताता है कि दुनिया भर के बाजारों से भारत के फार्मा रिश्ते कितने फैल चुके हैं। फार्मेक्सिल के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा,फार्मा निर्यात में वृद्धि अलग-अलग उत्पादों और बाजारों में भारतीय कंपनियों की मजबूती को दिखाती है। अब मौका यह है कि विदेशी ग्राहकों के साथ जुड़ाव बढ़ाकर और ऐसे क्षेत्रों की पहचान करके इस आधार को और मजबूत किया जाए जहां भारतीय क्षमताएं दुनिया की मांग पूरी कर सकें। आईफेक्स 2026 इसी जुड़ाव को आसान बनाने और भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी ग्राहकों के साथ कारोबारी रिश्ते बनाने के मौके पैदा करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। फार्मेक्सिल के वाइस चेयरमैन भाविन मेहता ने कहा,भारत के पास फॉर्मूलेशन, एपीआई, वैक्सीन, बायोसिमिलर और दूसरे फार्मा क्षेत्रों में पहले से ही बेहतरीन निर्माण क्षमताएं हैं। अगला मौका इन क्षमताओं को अलग-अलग विदेशी बाजारों में उभर रही मांग से जोड़ने का है। खरीदारों से सीधी बातचीत कंपनियों को, खास तौर पर एमएसएमई को, यह समझने में मदद करती है कि हर बाजार की क्या जरूरतें हैं और वे कहां असरदार तरीके से मुकाबला कर सकते हैं। फार्मेक्सिल के डायरेक्टर जनरल राजा भानु ने कहा,हम आईफेक्स 2026 के केंद्र में कारोबारी जुड़ाव को रख रहे हैं। खरीदार-विक्रेता बैठकों को इस तरह व्यवस्थित किया जा रहा है ताकि सोर्सिंग की जरूरतों, उत्पादों और संभावित साझेदारियों पर केंद्रित चर्चा हो सके। मकसद ऐसी बातचीत शुरू कराना है, जिसे भाग लेने वाली कंपनियां और खरीदार प्रदर्शनी के बाद भी कारोबारी सौदों में बदल सकें।आईफेक्स के चेयरमैन निपुण जैन ने कहा,दुनिया का फार्मा कारोबार जितना क्षमता पर टिका है, उतना ही भरोसे पर। आईफेक्स इस समीकरण के दोनों पहलुओं को एक साथ लाता है विस्तार के लिए तैयार भारतीय कंपनियां, और भरोसेमंद साझेदार तलाश रहे विदेशी खरीदार। हमारा इरादा बातचीत को व्यापार में बदलने का है, यानी खरीदार की जरूरत समझने से लेकर सही भारतीय साझेदार तलाशने और उस चर्चा को सौदे तक ले जाने का। जब ये साझेदारियां कामयाब होती हैं, तो वे अगले बाजार तक भारतीय फार्मा की क्षमता पहुंचाने का सबसे मजबूत जरिया बनती हैं। फौरी कारोबारी बातचीत के अलावा आईफेक्स 2026 उद्योग को यह मंच भी देगा कि वह दुनिया के बदलते फार्मा माहौल से तालमेल बिठा सके। इसमें सोर्सिंग के बदलते तरीके, उभरते बाजारों के मौके, और भारतीय निर्यातकों की यह जरूरत शामिल है कि वे अपना भौगोलिक और उत्पाद दायरा और चौड़ा करें। 2013 में शुरुआत के बाद से आईफेक्स भारतीय फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों को विदेशी बाजारों से सीधे जुड़ने का मंच देता आया है। 2026 का संस्करण उसी काम को ऐसे समय आगे बढ़ा रहा है जब भारत का फार्मा निर्यात अपनी मुख्य श्रेणियों में बढ़त दिखा रहा है, और पूरा ध्यान इस पर है कि विदेशी भागीदारी भारतीय निर्यातकों के लिए कारोबारी मौकों में बदले।
