नई दिल्ली -आज डायरेक्ट सैलिंग उद्यमिता की दृष्टि से भारत के मुख्य प्लेटफॉर्म्स में से एक बन चुका है, जो विक्रेताओं को स्थायी आजीविका के साधन उपलब्ध करा रहा है, खास बात यह है कि महिलाएं इस विकास में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई, जिसे आज भारत मंडपम में एसोसिएशन ऑफ़ डायरेक्ट सेलिंग एंटिटीज़ ऑफ़ इंडिया ने अपने रिसर्च पार्टनर कांतार के सहयोग से जारी किया। कांतार दुनिया की मुख्य मार्केटिंग डेटा और एनालिटिक्स कंपनियों में से एक है।रिपोर्ट के अनुसार, 91 लाख भारतीय एक्टिव डायरेक्ट सैलर हैं, जिनमें से 47 फीसदी महिलाएं हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह उद्योग रु23,522 करोड़ का था तथा एक अनुमान के मुताबिक यह 7 फीसदी सीएजीआर की दर से बढ़ते हुए अगले वित्तीय वर्ष तक रु 25,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा। आज भारत दुनिया के टॉप 15 डायरेक्ट सेलिंग मार्केट्स में 11वें स्थान पर है।रिपोर्ट जारी करते हुए प्रेसिडेंट डॉ. संजीव कुमार ने कहा,यह रिपोर्ट भरोसेमंद मात्रात्मक और गुणात्मक आंकड़ों के साथ इस बात पर रोशनी डालती है कि डायरेक्ट सैलिंग भारत के विकास में कितना बड़ा योगदान दे रही है। 91 लाख से अधिक भारतीय अपनी आजीविका के लिए डायरेक्ट सैलिंग पर ही निर्भर हैं जिनमें से लगभग आधी महिलाएं हैं – और यह उद्यमिता की भावना पर आधारित है। पिछले एक दशक में, यह उद्योग स्व-रोज़गार, कौशल और महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने के सरकार के विज़न के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ा है। आने वाले समय में भी ADSEI नियमों के अनुपालन एवं ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने के लिए सरकार के प्रतिबद्ध पार्टनर की भूमिका निभाता रहेगा।डायरेक्ट सैलिंग में एक्टिव सैलर्स की बात करें तो इनमें 47 फीसदी महिलाएं हैं, यानि यह भारत का मुख्य प्लेटफॉर्म है जो देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं को शामिल करता है। कम निवेश, काम के प्रत्यास्थ घंटों और किसी खास क्वालिफिकेशन की ज़रूरत न होने के कारण, यह अर्ध-शहरी और ग्रामीण भारत की महिलाओं के लिए खास तौर पर सुलभ है। इस तरह यह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देता है। यह भारत सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके तहत 2014 से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और वित्तीय समावेशन (जिसमें लखपति दीदी पहल भी शामिल है) पर विशेष रूप से ज़ोर दिया जा रहा है।लगभग 69 फीसदी एक्टिव डायरेक्ट सैलर्स की उम्र 25 से 44 वर्ष के बीच है, और 32 फीसदी से अधिक लोगों के अनुसार उन्हें डायरेक्ट सैलिंग से हर महीने अच्छी कमाई होती है। कमाई के अलावा, उन्हें सेल्स, कम्युनिकेशन, बुनियादी वित्तीय साक्षरता और छोटे-मोटे बिज़नेस से जुड़े कौशल भी मिलते हैं। इस तरह कुशल भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है।वैलनेस, पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक्स मिलकर कुल बिक्री का 86 फीसदी से ज़्यादा हिस्सा बनाते हैं; ये श्रेणियां ग्राहकों के भरोसे और रोज़मर्रा के घरेलू इस्तेमाल पर आधारित हैं। 26.8 फीसदी मार्केट शेयर के साथ उत्तरी क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है, इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र की हिस्सेदारी 24.5 फीसदी है।औपचारिकता और भरोसा रिपोर्ट इस बात पर रोशनी डालती है कि ग्राहक सुरक्षा (डायरेक्ट सेलिंग) नियम, 2021- को इस सेक्टर के औपचारीकरण, इसकी विश्वसनीयता बढ़ाने और काम के लिए स्पष्ट निर्देश तय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। सर्वे में हिस्सा लेने वाले डायरेक्ट सेलर्स का कहना है कि मौजूदा नीतियां उद्योग जगत पर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर रही हैं। आज लोग डायरेक्ट सेलिंग को अच्छा मानते हैं, और उन्हें उम्मीद है कि अगले दो सालों में यह उद्योग तेज़ी से विकसित होगा।ADSEI के संरक्षक गौतम बाली ने कहा, रु23,522 करोड़ की इस रकम के पीछे 91 लाख भारतीय हैं जिन्होंने खुद पर भरोसा करने का फैसला किया। इनमें से लगभग 43 लाख महिलाएं हैं, जिनमें से कई छोटे कस्बों और गांवों की गृहिणियां हैं, जो अपनी खुद की कमाई कर रही हैं वो भी पहली बार। यह कमाई बच्चे की स्कूल फीस, परिवार की सेहत और घर की बचत में काम आती है, और महिला को उन फैसलों में अपनी बात रखने का मौका देती है जिनसे उन्हें पहले दूर रखा जाता था। लगभग तीन में से दो विक्रेताओं के लिए, डायरेक्ट सैलिंग अब उनकी मुख्य आजीविका बन चुकी है। हालांकि बहुत से लोग अपना बिज़नेस जमने से पहले ही इसे छोड़ देते हैं। अगर इसे सही ढंग से किया जाए, तो डायरेक्ट सैलिंग भारत में बिज़नेस शुरू करने का सबसे लोकतांत्रिक ज़रिया बन सकता है।
