हर सोमवार भारत की बदलती अर्थव्यवस्था की एक कहानी बयां करता है। यह कहानी अब केवल शेयर बाजार के सूचकांकों या रिटेल बिक्री के जरिए नहीं लिखी जाती, बल्कि हवाई अड्डे की कतारों, हाईवे के ट्रैफिक, वीकेंड पर कैफे की बुकिंग और छोटी-मोटी सैर-सपाटे या अनुभवों से भरी सोशल मीडिया फीड के जरिए सामने आती है। इस बात पर विचार किए बिना रहना मुश्किल है कि मोबिलिटी और वाई-फाई के बीच बंटी यह हाइब्रिड जीवनशैली धीरे-धीरे पर्सनल फाइनेंस की मानसिकता को सावधानी से बदलकर आत्मविश्वास में कैसे बदल रही है।हमारी नयी स्टडी, ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी 2026’, यह उजागर करता है कि उपभोक्ता स्थानीय और बाहरी यात्राओं, बाहर खाने, खरीदारी करने और फिल्में देखने पर सबसे अधिक खर्च कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि 57% उत्तरदाताओं ने पिछले वर्ष की तुलना में अपनी आय में वृद्धि दर्ज की है, जबकि 53% उत्तरदाताओं का कहना है कि वे अधिक बचत करने में सक्षम हैं, जिससे विलासिता या शौक पर खर्च के लिए पर्याप्त गुंजाइश बच जाती है। आज के उपभोक्ता बचत कर रहे हैं, दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए निवेश कर रहे हैं और साथ ही, सचेत रूप से उन अनुभवों के लिए पैसे आवंटित कर रहे हैं जो रोजमर्रा के जीवन को समृद्ध बनाते हैं। यह बदलाव वित्तीय अनुशासन में गिरावट को नहीं, बल्कि वित्तीय आत्मविश्वास में वृद्धि को दर्शाता है।जब दीर्घकालिक लक्ष्यों की बात आती है, तो 31% उत्तरदाताओं के लिए घर खरीदना अभी भी सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है, जिसके बाद 25% लोग व्यवसाय शुरू करने या उसे बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं। इस बीच, बदलते जियोपॉलिटिकल एनवायरनमेंट ने उपभोक्ताओं का ध्यान अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दीर्घकालिक लक्ष्यों से हटाकर निकट भविष्य के छोटे और अधिक बार किए जाने वाले अनुभवों की ओर आकर्षित किया है। उपभोक्ता अब इस बात को लेकर अधिक विचारशील हो रहे हैं कि उनकी डिस्क्रेशनरी इनकम कहां खर्च हो रही है, जिससे वे भविष्य की आकांक्षाओं और वर्तमान अनुभवों के बीच संतुलन बना रहे हैं।
शायद इस स्टडी से निकलकर आने वाला सबसे दिलचस्प निष्कर्ष यह है कि यह अतिरिक्त खर्च कहां जा रहा है। स्थानीय यात्रा और दर्शनीय स्थलों का भ्रमण मासिक डिस्क्रेशनरी एक्सपेंडिचर की सबसे बड़ी श्रेणी के रूप में उभरा है। पिछले छह महीनों को देखें तो, आउटस्टेशन यात्रा सभी आयु समूहों, विशेष रूप से युवा उपभोक्ताओं के बीच अहम प्लान्ड खर्चों में शामिल है। मोबिलिटी के बारे में हमारी सोच के लिए इसके महत्वपूर्ण मायने हैं।आज मोबिलिटी केवल परिवहन तक सीमित नहीं है। यह वह बुनियादी ढांचा है जो रोजगार, शिक्षा, उद्यमिता और तेजी से बढ़ते अवकाश/मनोरंजन को सक्षम बनाता है। एक दोपहिया वाहन जो सप्ताह के दौरान किसी व्यक्ति को कुशलतापूर्वक आवागमन में मदद करता है, वही वीकेंड में परिवार के साथ अचानक तय की गई यात्रा को भी संभव बनाता है। एक निजी वाहन निर्भरता को कम करता है, अवसरों तक पहुंच को बढ़ाता है और परिवारों को एक्सपीरियंस इकोनॉमी में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति देता है।मोबिलिटी को फाइनेंस करना उत्पादकता, सुविधा और जीवन की गुणवत्ता में एक निवेश का प्रतिनिधित्व करता है। हमारी स्टडी इस बदलती मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें 82% उत्तरदाता इस बात से सहमत हैं कि किफायती क्रेडिट तक पहुंच जीवन के महत्वपूर्ण लक्ष्यों को पूरा करने में तेजी लाती है—चाहे वह वाहन खरीदना हो, घरेलू उपकरणों को अपग्रेड करना हो या अन्य महत्वाकांक्षी जरूरतों को पूरा करना हो।इसलिए, भारत की उपभोक्ता कहानी एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। भविष्य सुरक्षित करने और वर्तमान का मजा लेने के बीच का पारंपरिक समझौता धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। परिवार यह साबित कर रहे हैं कि संपत्ति का निर्माण करना, बचत को मजबूत करना और अनुभवों में निवेश करना ये सब एक साथ संभव है।जैसे-जैसे भारत की आकांक्षाएं विकसित हो रही हैं, मोबिलिटी आर्थिक अवसरों को व्यक्तिगत संतुष्टि से जोड़ने वाला सेतु बनती जाएगी। यह लोगों को नौकरियों तक पहुंचने, अवसरों की तलाश करने, पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाती है। कई मायनों में, सबसे समझदारी भरा निवेश अब केवल वह नहीं रह गया है जिसकी वैल्यू बढ़ती है, बल्कि यह वह निवेश हो सकता है जो लोगों को आगे बढ़ने, अनुभव करने और प्रगति करने की स्वतंत्रता देता है।आखिरकार बात यह निकलकर आती है कि एक भरे हुए वॉलेट को केवल इस बात से नहीं मापा जाता कि बचत में कितना बचा है। यह हर वीकेंड को यादगार बनाने के आत्मविश्वास में भी झलकता है। द्वारा आशीष तिवारी, चीफ मार्केटिंग एंड पीपल आफीसर, होम क्रेडिट इंडिया
