गुरुग्राम – पीबी फिनटेक की कॉर्पोरेट शाखा पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेस ने आज The Price of the Chair: Why the View from the Top is the Most Dangerous One in India किताब लॉन्च की। यह भारत में डायरेक्टर्स और ऑफिसर्स यानी D&O इंश्योरेंस पर पहली विस्तृत गाइड है।किताब ऐसे समय में आई है जब SEBI, MCA और NCLT अब सिर्फ कंपनियों को ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत डायरेक्टर्स को भी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस वजह से बोर्डरूम में पर्सनल लायबिलिटी का रिस्क तेजी से बढ़ा है।पुस्तक का मुख्य संदेश है – D&O इंश्योरेंस अब IPO से पहले की औपचारिकता नहीं, बल्कि मजबूत गवर्नेंस की जरूरत है। अक्सर कंपनियों को रिस्क का एहसास तब होता है जब इंश्योरेंस लेने में देर हो चुकी होती है। किताब में 10 अध्यायों वाली इस गाइड में कंपनी अधिनियम 2013, SEBI प्रवर्तन, IBC, MCA की अयोग्यता और ESG, AI बायस, साइबर रिस्क जैसे नए खतरों को कवर किया गया है। साथ में 2 गुमनाम केस स्टडी भी हैं – एक कंपनी जिसने समय पर D&O लिया और दूसरी जिसने टाल दिया। नतीजा दोनों का बिल्कुल अलग रहा। लेखकों का निष्कर्ष: फर्क रिस्क का नहीं, फैसले का था। डाटा बताता है कि भारत में D&O क्लेम पिछले 4 साल से लगातार बढ़ रहे हैं। 2024-25 में 32% की बढ़ोतरी हुई। कुल क्लेम में से 48% BFSI सेक्टर से हैं, लेकिन अब फार्मा, IT, FMCG में भी क्लेम बढ़ रहे हैं।पीबी फिनटेक के ज्वाइंट ग्रुप सीईओ सरबवीर सिंह ने कहा, यह प्रोडक्ट की पिच नहीं है, बल्कि हर फाउंडर और डायरेक्टर के लिए गाइडबुक है। पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेस के हेड सज्जा प्रवीण चौधरी ने कहा कि D&O को अब “चेकबॉक्स” की तरह नहीं, बल्कि गवर्नेंस के जरूरी हिस्से की तरह देखना होगा। पेनडाउन प्रेस द्वारा प्रकाशित 599 रुपये की यह किताब Amazon, Flipkart और Kindle पर उपलब्ध है। लॉन्च में ओरिएंटल इंश्योरेंस के सीएमडी संजय जोशी और इन्फोएज के संजीव बिखचंदानी भी मौजूद थे।
