नई दिल्ली – दिल्ली एनसीटी के लिए पहली क्षेत्रीय सलाहकार समिति (RAC) बैठक का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों द्वारा भाग लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. सपना पोती, निदेशक स्ट्रैटेजिक एलायंस, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा की गई। बैठक में श्री नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय, प्रो. राम सिंह निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एवं मौद्रिक नीति समिति के सदस्य, डॉ. च. श्रीनिवास राव, निदेशक एवं कुलपति, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री टी.डी. शिवकुमार, मुख्य महाप्रबंधक, एक्सिम बैंक, श्री डी. साहू महाप्रबंधक एवं संयोजक, एसएलबीसी दिल्ली सहित आईआईटी दिल्ली, आईएआरई (पूसा कृषि), एनआईआरडीपीआर, केवीके.आईसीएआर, एसयूएलएम तथा अन्य प्रमुख विकास साझेदारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.बैठक का विषय था स्मार्ट और सतत दिल्ली के लिए नवाचार, स्थिरता और कौशल: कचरे से संपदा,मूल्य आधारित उद्यम । इस बहु-हितधारक बैठक में सरकार, वित्तीय संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के बीच समन्वय पर बल दिया गया, ताकि दिल्ली की कचरा समस्या को एक सतत विकास अवसर में बदला जा सके, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और स्थायी आजीविका के अवसर बढ़ें। श्री नवीन कुमार राय ने नवाचार और उसके कार्यान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए पायलट परियोजनाओं, इन्क्यूबेशन सहायता और सफल तकनीकों के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कचरा प्रबंधन के लिए वैल्यू-चेन आधारित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की, जिसमें कचरे का स्रोत पर पृथक्करण तथा विभिन्न श्रेणियों—जैसे ई-वेस्ट, प्लास्टिक कचरा, निर्माण संबंधी कचरा, बागवानी कचरा और बाजार संबन्धित कचरा का अलग-अलग प्रसंस्करण शामिल है। इस दृष्टिकोण से दक्षता बढ़ाने, हरित रोजगार सृजित करने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।मंदिरों के फूलों से खाद और अगरबत्ती बनाना तथा कपड़ों का पुनर्चक्रण कर बैग और दरी बनाना जैसे उदाहरण प्रस्तुत किए गए, जिन्हें विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। डॉ. सपना पोती ने बताया कि प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय विभिन्न मंत्रालयों, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर कार्य कर रहा है। उन्होंने मंथन प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया, जो उद्योग की जरूरतों को नवोन्मेषकों से जोड़ता है और ₹10,000 करोड़ से अधिक के परियोजनाओं के साथ जुड़ा है। इसके अलावा “उत्थान” (टियर-2/3 कॉलेजों का सशक्तिकरण), स्मार्ट विलेज सेंटर (ग्रामीण तकनीक विस्तार, नाबार्ड सहयोग से), और सक्षम (स्कूल स्तर नवाचार) जैसे कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप्स में तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण उसका जमीनी स्तर पर कम उपयोग हो रहा है। प्रो. राम सिंह ने कहा कि कचरे से संपदा (waste-to-wealth) को केवल कचरा प्रबंधन के रूप में न देखकर सर्कुलर इकोनॉमी के व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। उन्होंने भारत की आयात निर्भरता के संदर्भ में कचरे से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति के महत्व पर जोर दिया। ई-वेस्ट, प्लास्टिक, बैटरी और जैविक कचरे को महत्वपूर्ण संसाधनों, खनिजों और ऊर्जा के स्रोत के रूप में चिन्हित किया गया। बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई कि कचरे को निपटान समस्या के बजाय एक आर्थिक संसाधन के रूप में पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता है। दिल्ली में वर्तमान में गाज़ीपुर, भलस्वा और ओखला जैसे लैंडफिल स्थलों पर भारी मात्रा में पुराना कचरा मौजूद है, जबकि प्रतिदिन लगभग 11,862 टन कचरा उत्पन्न होता है। इसमें लगभग 70% कचरे का प्रसंस्करण हो रहा है, जबकि लगभग 80% कचरे में आर्थिक मूल्य निहित है। कचरे की संरचना लगभग 50% जैविक, 35% पुनर्चक्रण योग्य और 20% निष्क्रिय इस बात को दर्शाती है कि कम्पोस्टिंग, रिसाइक्लिंग, बायो-CNG और वेस्ट-टू-एनर्जी समाधान के माध्यम से इसका बेहतर उपयोग संभव है। वित्तीय संस्थानों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। एसएलबीसी के माध्यम से बैंकों ने कचरे से संपदा आधारित उद्यमों, स्टार्टअप्स और SHG पहलों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही, नगर निगमों और नागरिक निकायों की भागीदारी को भी सफलता के लिए आवश्यक माना गया, विशेषकर बुनियादी ढांचे, परियोजना क्रियान्वयन और वित्तपोषण मॉडल (जैसे नगर निगम बॉन्ड) में।
बैठक के अंत में इस बात पर सहमति बनी कि विचार-विमर्श को ठोस कार्यान्वयन में बदला जाए। सभी हितधारकों ने पायलट परियोजनाओं को आगे बढ़ाने, ऋण सुविधाओं को मजबूत करने और बड़े स्तर पर ऐसे उद्यम विकसित करने का संकल्प लिया, जो हरित रोजगार सृजन के साथ-साथ दिल्ली को स्वच्छ और सतत बनाएंगे।
