नई दिल्ली – स्माइल फाउंडेशन ने अपने इंटीग्रेटेड कम्युनिटी हेल्थकेयर प्रोग्राम के जरिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ दी हैं। एक ही साल में इतने लोगों की सहायता अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। साल 2006 में इस कम्युनिटी हेल्थकेयर प्रोग्राम की शुरुआत के बाद से, स्माइल फाउंडेशन अब तक कुल मिलाकर 70 लाख से अधिक लोगों का इलाज कर चुका है। भारत देश में मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों, आर्थिक तंगियों और मेडिकल सुविधाओं की सही पहुँच न होने की वजह से हर किसी को इलाज मिलना आज भी आसान नहीं है। इस चुनौती से निपटने के लिए, स्माइल फाउंडेशन ने एक ऐसा प्राइमरी हेल्थकेयर मॉडल तैयार किया है जो देश के हर इलाके और वहाँ के लोगों की जरूरतों के बिल्कुल अनुकूल है। भारत की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में कई दिक्कतें हैं, जैसे लोगों को अपनी जेब से बहुत ज़्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है, सरकारी अस्पतालों में भारी भीड़ रहती है और कमजोर तबके के लोग समय पर डॉक्टर के पास नहीं जाते। इस कमी को दूर करने और सरकारी प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए स्माइल फाउंडेशन ने एक खास स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार किया है। यह कार्यक्रम मोबाइल मेडिकल वैन, डिजिटल बदलावों, जागरूकता अभियानों और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने वाले उपायों पर मिलकर काम करता है। अभी देश भर में ऐसी 143 परियोजनाएँ चल रही हैं। इनमें 124 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, छह स्थाई क्लीनिक, छह मोबाइल टेली-मेडिसिन यूनिट्स, दो मोबाइल डेंटल वैन, चार माँ-बच्चे और किशोरों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी परियोजनाएँ (आरएमएनसीएएच+एन) के साथ-साथ एक बोट क्लीनिक परियोजना भी शामिल है। स्माइल फाउंडेशन का यह स्वास्थ्य कार्यक्रम 22 राज्यों के 90 जिलों में चल रहा है, जिसमें 22 एस्पिरेशनल जिले भी शामिल हैं। यह प्रोग्राम सरकार के आयुष्मान भारत, नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिसीज़ और पोषण अभियान के लक्ष्यों के साथ मिलकर आगे बढ़ रहा है। साथ ही, यह अच्छे स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल – 3 को पूरा करने में भी मदद कर रहा है। साल 2025-26 के दौरान, स्माइल फाउंडेशन ने अपने मोबाइल मेडिकल और टेलीमेडिसिन नेटवर्क के जरिए 17.80 लाख लोगों का इलाज किया। बीमारियों से बचाने वाली सेवाओं ने 1.15 लाख लोगों की मदद की और बड़े स्तर पर की गई हेल्थ जांच से 1.57 लाख लोगों को लाभ हुआ। इस जांच में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और एनीमिया पर विशेष ध्यान रहा। साथ ही, स्वास्थ्य जागरूकता कैंप और स्कूलों में स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किए गए ताकि बच्चों में साफ-सफाई, सही पोषण और नियमित चेक-अप की आदत शुरू से ही पड़े। लद्दाख के ऊँचे पहाड़ी गाँव हों या जैसलमेर का रेगिस्तान, ब्रह्मपुत्र के टापू हों या शहरों की तंग बस्तियाँ, स्माइल फाउंडेशन हर उस जगह इलाज पहुँचा रहा है, जहाँ मेडिकल सुविधाएँ आसानी से नहीं मिलतीं। इसके साथ ही, ट्रक ड्राइवर्स, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और ऑटोमोबाइल सेक्टर के कामगारों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए स्वास्थ्य कार्यक्रम भी चल रहे हैं। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़कर स्माइल फाउंडेशन ने तकनीक पर आधारित व्यवस्था को अपनाया है। इसमें मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस, रियल-टाइम डैशबोर्ड, जीपीएस -बेस्ड ट्रैकिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स शामिल हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होती है। ये नए तकनीकी बदलाव दवाओं के मैनेजमेंट, बीमारियों को समझने, समय पर निगरानी रखने और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ बेहतर तालमेल बनाने में मदद करते हैं। इससे सरकारी अस्पतालों पर बोझ कम होता है और कम आय वाले परिवारों का इलाज का खर्च भी घटता है। स्माइल फाउंडेशन के सह-संस्थापक और कार्यकारी ट्रस्टी सांतनु मिश्रा ने कहा,हमारे डॉक्टर, नर्स, ज़मीनी कार्यकर्ता और पार्टनर्स देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सेवाएं दे रहे हैं। हम अपने सहयोगियों और लोकल प्रशासन के आभारी हैं, जिनके साथ मिलकर हम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों से जुड़ पा रहे हैं और हर नागरिक तक बेहतरीन प्राइमरी हेल्थकेयर पहुँचा पा रहे हैं।
