मुंबई – ट्राया हैल्थ ने भारत में पुरुषों के बालों के स्वास्थ्य पर हुए अध्ययन के नतीजे आज जारी किए। इस अध्ययन में देश भर के 5 लाख से ज्यादा पुरुषों को शामिल किया गया था। अध्ययन में यह बताया गया है कि भारत के बड़े क्षेत्रों में बाल झड़ने (हेयर लॉस) की समस्या कितनी बढ़ चुकी है, और शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य कारकों (इंटरनल हैल्थ मार्कर) के बारे में भी बताया गया जो इस समस्या के पीछे हैं।किसके बाल झड़ रहे हैं?इस अध्ययन में कुल 5,61,960 पुरुषों का आकलन किया गया और हेयर लॉस से जूझ रहे पुरुषों की औसत उम्र 29 साल है।आयु वर्ग कुल का प्रतिशतभारत में हेयर लॉस (बाल झड़ना) कोई अधेड़ आयु की समस्या नहीं है। यह पुरुषों में टवेंटीज़ में शुरु होती है और ट्राया के पीओवी में ज्यादातर मामलों में इस पर तब तक ध्यान नहीं दिया जाता जब तक यह काफी बढ़ न जाए। इस अध्ययन में शामिल 76.4 प्रतिशत पुरुष 35 साल से कम उम्र के हैं। यह कितना आगे बढ़ चुका है? अवस्था कुल का प्रतिशत औसत उम्र आधे से ज्यादा भारतीय पुरुष पहले से ही ऐडवांस स्टेज पर हैं। 5 में से 1 से भी कम लोग शुरुआती बिंदु में आए। अधिकांश पुरुष उस क्षण में चूक जाते हैं जो सबसे अधिक अहम होता है। प्रारंभिक अवस्था वह है जहां सबसे ज्यादा असरदार कदम उठाए जा सकते हैं। जहां हस्तक्षेप का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. फिर भी अधिकांश भारतीय पुरुष प्रारंभिक अवस्था से आगे निकल जाने के बाद यह ऐहसास करते हैं कि जब वे 25 साल के थे तब सबसे महत्वपूर्ण वक्त था कार्यवाही करने का। जब तक अधिकांश पुरुष समस्या को गंभीरता से लेते हैं, तब तक हेयर लॉस को आसानी से संभालने का वक्त खत्म हो चुका है।हेयर लॉस पर ध्यान देने और कार्यवाही करने के बीच लगभग एक दशक का फासला होता है। प्रारंभिक अवस्था से लेकर स्थिति आगे बढ़ जाने तक औसतन 10.7 साल का फासला होता है। एक आदमी जो पहली बार अपने मिड-टवेंटीज़ में किसी चीज़ को नोटिस करता है और ज्यादातर भारतीय आदमियों की तरह इंतज़ार करता है, वह एक दशक का अधिकांश हिस्सा उन चरणों से गुज़रने में बिता देगा जिन्हें धीमा किया जा सकता था। यह बढ़त अचानक नहीं होती। यह चुपचाप, लगातार और लगभग बिना व्यवधान के होती है। जब तक यह स्थिति उसके इर्दगिर्द के लोगों को दिखती है, तब तक कई साल बीत चुके होते हैं। बालों का झड़ना दूसरों को रातों-रात पता नहीं चलता। यह स्थिति आईने में, नहाते समय, मन के किसी कोने में धीरे-धीरे निर्मित होती है। ज्यादातर पुरुष कुछ करने से पहले सालों तक चुपचाप इस स्थिति को अपने साथ लिए चलते हैं। और जब तक उनके आस-पास के लोग ध्यान देते हैं, तब तक इस प्रक्रिया को चलते हुए आम तौर पर आधा दशक बीत चुका होता है। जिस पल यह चीज़ दिखाई देती है वह उसकी शुरुआत नहीं होती, वह कहीं बीच में होती है। इस अध्ययन में वह मुद्दा सामने आया जिस पर तत्काल ध्यान देना होगा, वह है भारी तादाद में बाल झड़ना। कुछ पुरुषों के बाल धीरे-धीरे कम नहीं हो रहे हैं, बल्कि पूरे स्कैल्प पर अचानक और बड़े पैमाने पर झड़ रहे हैं, और उनकी औसत उम्र सिर्फ 25.7 साल है। डेटासेट में बाकी सभी श्रेणियों के मुकाबले यह सबसे कम उम्र है। यह वो हेयर लॉस नहीं है जिसके बारे में अधिकतर लोग सोचते हैं। यह हर जगह, एक साथ, रोज़ाना हेयर लॉस में अचानक, काफी बढ़ोतरी है, उन पुरुषों में जो अभी अपने वयस्क जीवन शुरुआती सालों में हैं। यह शरीर द्वारा भेजा गया एक अति आवश्यक संकेत है। तनाव, जो एक सीमा पार कर गया है। मेटाबॉलिज्म पर निरंतर दबाव है। आंत की सेहत इस बात पर असर डालती है कि पोषक तत्व रोमकूपों तक कैसे पहुंचते हैं। स्कैल्प का इनफ्लेमेशन जो चुपचाप बढ़ रहा है। बाल समस्या नहीं हैं। चिंता नतीजे की है जो तेज़ी से, शीघ्रता से आ रहा है, और ज्यादातर मामलों में पुरुषों के पास यह समझने का कोई फ्रेमवर्क नहीं होता कि उनके साथ क्या हो रहा है या क्यों हो रहा है। ट्राया हैल्थ की सह-संस्थापक सलोनी आनंद कहती हैं, “इस स्टडी में शामिल आधे से ज्यादा पुरुष जब तक मदद लेने जाते हैं तब तक समस्या काफी आगे बढ़ चुकी होती है। 5 में से 1 से भी कम लोग ही इतनी जल्दी कार्यवाही कर पाते हैं कि उनके पास सबसे अधिक विकल्प मौजूद हों। हम सालों से मानते आए हैं कि भारतीय पुरुष जल्दी एक्शन नहीं लेते। शरीर के अंदर क्या हो रहा है? स्वास्थ्य मार्कर कुल का प्रतिशत  डैंड्रफ (रूसी) 62.6% तनाव 54.6% खराब नींद 29.5% आंत संबंधी समस्याएं 26.8% मेटाबॉलिज्म (चयापचय) 55.8% अंदरूनी स्वास्थ्य की तस्वीर डैंड्रफ (62.6 प्रतिशत): मालासेज़िया नाम का एक फंगस स्कैल्प पर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और लंबे समय तक चलने वाली हल्की इनफ्लेमेशन पैदा करता है। यह इनफ्लेमेशन रोमकूपों को उनकी वृद्धि के चरण से बहुत पहले ही बाहर कर देती है। बाल तेज़ी से झड़ते हैं और हर चक्र में पतले होकर वापस उगते हैं। तनाव (54.6 प्रतिशत): तनाव कोर्टिसोल के स्तर और हार्मोन संतुलन पर असर डालता है, ये दोनों ही सीधे बालों के बढ़ने के चक्र को खराब करते हैं। यह 21 साल की उम्र में तेज़ी से बढ़ता है और 50 साल तक हर आयु वर्ग में 54 प्रतिशत से ज्यादा रहता है। मेटाबॉलिज्म (55.8 प्रतिशत): यह पोषण की कमी और मेटाबॉलिक प्रेशर को दिखाता है। जिस शरीर में मेटाबॉलिज्म कम हो उसमें बालों की वृद्धि को प्राथमिकता नहीं मिलती। सबसे कम उम्र के समूह में यह 61.2 प्रतिशत है। खराब नींद (29.5 प्रतिशत): कोशिकाओं की मरम्मत और हार्मोन नियमन पर असर डालती है, जो दोनों ही सेहतमंद बालों की वृद्धि के लिए ज़रूरी हैं। नींद उम्र के साथ धीरे-धीरे खराब होती जाती है आंतों की समस्याएं (26.8 प्रतिशत): आंतों के ठीक से काम न करने से पोषक तत्वों के अवशोषित होने के तरीके पर असर पड़ता है। अगर किसी आदमी की आंतें ठीक से काम नहीं कर रहीं हों तो पर्याप्त खाने के बावजूद भी उसके रामकूपों के स्तर पर पोषण की कमी हो सकती है। ये कोई अलग-अलग समस्याएं नहीं हैं। ये अंदरूनी स्वास्थ्य की एक ही तस्वीर है, और बालों पर ही इनका असर सबसे पहले दिखता है।  उम्र कैसे तस्वीर बदलती है उम्र डैंड्रफ तनाव खराब नींद आतों की समस्या मेटाबॉलिज डैंड्रफ कम उम्र के पुरुषों में सबसे ज्यादा होता है। 15-25 साल की उम्र में 71.9 प्रतिशत डैंड्रफ किसी भी आयु समूह में किसी भी मार्कर की सबसे ज्यादा दर है। यह उम्र के साथ कम हो जाता है, लेकिन बीस साल की उम्र के पुरुषों में यह रोमकूपों को जो नुकसान पहुंचाता है, वह आगामी वर्षों में बढ़ता जाता है। तनाव 21 साल की उम्र में आता है और कभी जाता नहीं है। यह 15-20 साल की उम्र में 45.8 प्रतिशत से बढ़कर 21-25 साल की उम्र में 54.9 प्रतिशत हो जाता है और 50 साल की उम्र तक हर एज ग्रुप में 54 से 57 प्रतिशत के बीच रहता है। ऐसी कोई उम्र नहीं है जब भारतीय पुरुषों पर तनाव का बोझ काफी कम हो जाए।उन्नत अवस्था में बाल झड़ने की दर हर आयु वर्ग के साथ तेजी से बढ़ती है। 15-20 की उम्र में 26.8 प्रतिशत से 41-50 की उम्र में 77.4 प्रतिशत तक। एक आदमी के थर्टीज़ के आखिर तक, इस बात की संभावना होती है कि उसके बाल झड़ना पहले से ही उन्नत अवस्था पर पहुंच चुका हो। उम्र के डेटा से पता चलता है कि यह कोई ऐसी स्थिति नहीं है जो अचानक आ जाए। यह वयस्क जीवन के शुरुआती सालों से ही धीरे-धीरे बनती है। किशोरावस्था के आखिर में एक आदमी की अंदरूनी सेहत की तस्वीर पहले से ही उसके बीस ट्वेंटीज़ के आखिर में बाल झड़ने के हालात तय कर रही होती है।भारतीय पुरुषों में टवेंटीज़ में बाल झड़ने की समस्या हो रही है। थर्टीज़ में यह बढ़ती है। और फोर्टीज़ में अपने सबसे ऐडवांस स्टेज पर पहुंचती है, तब तक ज्यादातर पुरुष एक दशक तक बिना कुछ किए वक्त बिता चुके होते हैं।शरीर पर वयस्कता के शुरुआती सालों से ही दबाव होता है। सिर के बालों पर ही यह दबाव सबसे पहले दिखाई देता है। और ज्यादातर भारतीय पुरुषों के लिए, यह संकेत वर्षों से पढ़ा नहीं गया है। भारतीय पुरुषों में बाल झड़ना अनिवार्य नहीं है। लेकिन इसके लिए यह समझना जरूरी है कि शरीर के अंदर असल में क्या हो रहा है।

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