1. कृपया ‘रूम टू रीड इंडिया’ का थोड़ा परिचय दें? इस साल बच्चों के पढ़ने में दिलचस्पी लेने के तरीके को लेकर आपने क्या देखा है, और इससे भारत में बदलती पढ़ने की संस्कृति के बारे में क्या पता चलता है?रूम टू रीड पिछले 20 वर्षों से भारत में बच्चों को पढ़ने की बुनियादी क्षमता विकसित करने और उन्हें स्वतंत्र पाठक और सीखने वाला बनाने के लिए काम कर रहा है। भारत में हमारा काम 2003 से है और आज हम foundational literacy, शिक्षकों और कक्षाओं को मजबूत करने, बच्चों के लिए अच्छी गुणवत्ता की किताबों और लाइब्रेरी तक पहुंच बनाने और सरकार तथा शिक्षा प्रणालियों के साथ बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं।इस साल India Gets Reading 8.0 में हमने 47लाखबच्चों और 2 लाख से अधिक शिक्षकोंको 11 राज्यों में जोड़ा है। पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 40 लाख थी। यह वृद्धि अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन मेरे लिए इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पढ़ने को लेकर बच्चों, शिक्षकों और समुदायों में उत्साह दिखाई दे रहा है।मुझे लगता है कि इससे एक बहुत सकारात्मक बात सामने आती है बच्चों में पढ़ने की इच्छा कम नहीं हुई है बल्कि जब उन्हेंसही किताब, सही भाषा और पढ़ने का आनंद लेने का अवसरमिलता है, तो वे बहुत उत्साह से उससे जुड़ते हैं।लेकिन अब हमारी अगली चुनौती यह है कि इस उत्साह को केवल अभियान तक सीमित न रखें। हमें इसे बच्चों की रोज़मर्रा की सीखने की आदत में बदलना होगा। क्योंकि असली सवाल यह नहीं है कि बच्चा कितने शब्द पढ़ सकता है, बल्कि यह है किवह जो पढ़ रहा है, उसे कितना समझता है और उससे क्या अर्थ निकालता है।
2. मेरे शब्द, मेरी कहानी थीम बच्चों की अपनी आवाज़ और अनुभवों को महत्व देती है। पढ़ने की आदत को बच्चे के असल जीवन के अनुभवों से जोड़ना कितना ज़रूरी है, खासकर शुरुआती सालों में?यह बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर शुरुआती वर्षों में बच्चा तभी पढ़ने से जुड़ता है जब उसे लगता है कि “यह कहानी मेरी भी हो सकती है।पढ़ना केवल अक्षरों और शब्दों को पहचानना नहीं है। जब बच्चा किसी कहानी को अपने अनुभवों से जोड़ता है, तो वह उसे समझता है, सवाल करता है, अपने अनुभवों से जोड़ता है और अपनी राय बनाता है। यही असल comprehension है।इसीलिए “मेरे शब्द, मेरी कहानी”हमारे लिए केवल एक campaign theme नहीं है। इसका मतलब है कि बच्चे की भाषा, उसका परिवेश, उसके अनुभव और उसकी कल्पना भी पढ़ने की दुनिया का हिस्सा हों।उदाहरण के लिए, अगर बच्चा अपने घर, अपने गांव, अपने दोस्तों या अपने आसपास की दुनिया से जुड़ी कहानी पढ़ता है, तो किताब उसके लिए केवल एक textbook नहीं रहती। वह उसके लिएएक अनुभव और संवाद का माध्यमबन जाती है।और यही वह जगह है जहाँ reading, curiosity और self-expression एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
3. इस साल के कैंपेन में 2 लाख शिक्षकों के शामिल होने के साथ, बच्चों में पढ़ने को सिर्फ़ क्लासरूम की गतिविधि से बदलकर एक स्थायी आदत बनाने में शिक्षक क्या भूमिका निभाते हैं?शिक्षक इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। कोई भी campaign बच्चों को पढ़ने के लिए एक दिन, एक सप्ताह या एक महीने के लिए प्रेरित कर सकता है, लेकिन reading habit तभी बनती है जब शिक्षक और स्कूल उस अनुभव को लगातार बनाए रखते हैं।एक अच्छे शिक्षक की भूमिका सिर्फ़ यह सुनिश्चित करना नहीं है कि बच्चा किताब पढ़ ले। शिक्षक बच्चे को यह सिखाते हैं कि पढ़ते समय सवाल कैसे पूछें, कहानी को अपने अनुभव से कैसे जोड़ें, नए शब्दों का अर्थ कैसे समझें और जो पढ़ा है उसके बारे में अपनी बात कैसे रखें।इसलिए हम शिक्षक को केवल campaign का participant नहीं, बल्कि reading culture का creator मानते हैं।इस साल 2 लाख से अधिक शिक्षकों की भागीदारी हमें यह अवसर देती है कि campaign की ऊर्जा को classroom practice में बदला जाए जहाँ हर दिन थोड़ा समय पढ़ने के लिए हो, बच्चों को अलग-अलग किताबें उपलब्ध हों और पढ़ने पर बातचीत हो।आखिरकार, हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि बच्चा किताब इसलिए न खोले क्योंकि शिक्षक ने कहा है, बल्कि इसलिए खोले क्योंकिउसे पढ़ने में आनंद आता है और वह कुछ नया जानना चाहता है।
4. National Literacy Summit, India Gets Reading 8.0 का समापन है। इस साल के campaign से क्या मुख्य बातें सीखी गई हैं जिन्हें Room to Read आगे ले जाना चाहता है? और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है?इस साल की सबसे बड़ी सीख मेरे लिए यही है कि reading culture बनाने के लिए participation जरूरी है, लेकिन participation पर्याप्त नहीं है।47लाखबच्चों और 2 लाख से अधिक शिक्षकोंको एक साथ जोड़ना एक बहुत बड़ा moment है। लेकिन अब हमें अगला सवाल पूछना होगा क्या बच्चे नियमित रूप से पढ़ रहे हैं? क्या वे जो पढ़ रहे हैं उसे समझ रहे हैं? क्या वे उस पर सवाल कर पा रहे हैं? और क्या वे पढ़ने को सीखने और आनंद दोनों से जोड़ पा रहे हैं?
Room to Read के लिए यही अगला focus है reading words से reading with understanding तक जाना।दूसरी सीख यह है कि बच्चों को पढ़ने के लिए सिर्फ़ textbook पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसी किताबें चाहिए जो उनकी भाषा और जीवन से जुड़ी हों, जिनमें वे अपने आसपास की दुनिया को देख सकें और जोउनकी कल्पना को आगे बढ़ाएं।
चुनौतियां भी हैं। भारत में बच्चों की learning levels एक ही कक्षा के भीतर भी बहुत अलग हो सकती हैं। इसलिए केवल grade-level textbook के आधार पर पढ़ाना हर बच्चे के लिए पर्याप्त नहीं है। हमें assessment, differentiated teaching, appropriate learning materials और शिक्षक support इन सभी को साथ लेकर चलना होगा।
और सबसे बड़ी चुनौती शायद यही है कि campaign की ऊर्जा कोसतत classroom और community practice में कैसे बदला जाए।
5. आगे देखते हुए, भारत को किन बड़ी कमियों को दूर करने की ज़रूरत है ताकि हर बच्चा न सिर्फ़ पढ़ना सीखे, बल्कि खुशी और खुद को व्यक्त करने के लिए पढ़ने का आत्मविश्वास और प्रेरणा भी विकसित करे?मेरे हिसाब से हमें तीन स्तरों पर काम करना होगा।पहला हर बच्चे को मजबूत foundational literacy देनी होगी।बच्चा केवल शब्दों को पढ़ ले, इतना काफी नहीं है। उसे पढ़े हुए को समझने, उसका अर्थ निकालने, सवाल करने और अपने शब्दों में व्यक्त करने की क्षमता चाहिए। यही आगे की सारी learning की नींव है।दूसरा बच्चों को अच्छी किताबों तक नियमित पहुंच देनी होगी।भारत में अलग-अलग भाषाओं और संदर्भों में high-quality children’s literature की उपलब्धता और पहुंच को और मजबूत करना होगा। बच्चा तभी पढ़ने का आनंद लेगा जब उसके पास ऐसी किताबें हों जिनसे वह जुड़ सके।तीसरा हमें reading को school activity से आगे लेकर जाना होगा।घर, स्कूल और समुदाय तीनों जगह पढ़ने का माहौल बनना चाहिए। शिक्षक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन परिवार और समुदाय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
और आज यह बातचीत इसलिए और महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हम एक digital और AI-enabled दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं। बच्चों के सामने information कम नहीं, बल्कि और अधिक होगी। इसलिए उन्हें केवल information पढ़ना नहीं, बल्किउसे समझना, सवाल करना, अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखना और सही अर्थ निकालनाआना चाहिए।
इसलिए मेरे लिए literacy का अंतिम लक्ष्य सिर्फ़ यह नहीं है कि बच्चा पढ़ सकता है। अंतिम लक्ष्य यह है कि बच्चापढ़कर समझ सके, समझकर सवाल कर सके और अपनी बात कहने का आत्मविश्वास रख सके।यही एक मजबूत reading culture की असली पहचान होगी।

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