नई दिल्ली – रूम टू रीड इंडिया ने आज इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय साक्षरता शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया, जो उसके प्रमुख राष्ट्रीय पठन अभियान इंडिया गेट्स रीडिंग के आठवें संस्करण के समापन का अवसर था। 15 अगस्त से 8 सितंबर तक मेरे शब्द, मेरी कहानी (My Words, My Story) विषय के अंतर्गत चलाए गए इस अभियान ने शब्दों को पढ़ने की क्षमता से आगे बढ़कर बच्चों को प्रश्न पूछने, कल्पना करने और अपनी भाषा में स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। सम्मेलन में रूम टू रीड इंडिया को अनेक स्थानों पर आयोजित रीड-ए-थॉन में सर्वाधिक प्रतिभागी श्रेणी में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान संगठन की ओर से रूम टू रीड इंडिया ने प्राप्त किया। 8 सितंबर को आयोजित इस वर्ष के रीड-ए-थॉन में बच्चे, शिक्षक, परिवार, समुदाय और सरकारी प्रतिनिधि एक साथ पढ़ने के लिए जुड़े। भागीदारी के सत्यापन के बाद इसमें 47.6 लाख से अधिक बच्चों और 2.27 लाख से अधिक शिक्षकों की सहभागिता दर्ज की गई। बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित 11 राज्यों में कुल 53 लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए पूर्णिमा गर्ग, कंट्री डायरेक्टर, रूम टू रीड इंडिया, ने कहा NIPUN Bharat ने बुनियादी शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है और ध्यान सही मायनों में सीखने के परिणामों पर केंद्रित हुआ है। अब चुनौती इस गति को बनाए रखने और इसे कक्षा के भीतर वास्तविक सीखने में परिवर्तित करने की है, जहाँ बच्चे केवल शब्दों को पढ़ना ही नहीं बल्कि उन्हें समझना और उन पर प्रतिक्रिया देना भी सीखें। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चे क्या पढ़ रहे हैं। उनकी उम्र और भाषा के अनुरूप साहित्य, उसे प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक और पढ़ने को विद्यालयी जीवन का नियमित हिस्सा बनाने वाली व्यवस्थाएँ, इन सभी का बड़े पैमाने पर मिलकर कार्य करना आवश्यक है। तभी देश के किसी दूरस्थ जिले का बच्चा भी उतना ही सक्षम पाठक बन सकेगा जितना भारत के किसी अन्य हिस्से का बच्चा। इस शिखर सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तकालय विशेषज्ञों ने इस विषय पर चर्चा की कि बच्चों को केवल शब्द पढ़ने से आगे बढ़ाकर सार्थक पठन तक कैसे पहुँचाया जाए। श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी, आईआरएस, अतिरिक्त सचिव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने केवल पहुँच से आगे भारत में बुनियादी शिक्षा को सशक्त बनाना विषय पर मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा पिछले पाँच वर्षों में NIPUN Bharat मिशन ने प्रारंभिक शिक्षा स्तर को विद्यालयी शिक्षा का औपचारिक हिस्सा बनाया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। 8.8 लाख विद्यालयों में पाँच करोड़ से अधिक बच्चों को ‘विद्या प्रवेश’ स्कूल तैयारी मॉड्यूल का लाभ मिला है। PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में ग्रामीण और सरकारी विद्यालयों का प्रदर्शन निजी विद्यालयों से बेहतर पाया गया। फिर भी अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। पहुँच की व्यवस्था अधिकांशतः उपलब्ध है; अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षक की है। 260 प्रकाशकों की 7,000 से अधिक पुस्तकों वाले राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय और लगभग 127 भाषाओं में भाषा प्राइमरों के माध्यम से हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा प्रारंभिक अवस्था में पढ़ना सीख सके, ताकि वह जीवनभर सीखने के लिए पढ़ सके। दिनभर चली चर्चाओं में साक्षरता और साहित्य जगत की विविध विशेषज्ञताओं को शामिल किया गया। वक्ताओं में डॉ. पेगी मोहन, करोलिना ब्रज़ोज़ोव्स्का, डॉ. शैलजा मेनन, प्रो. रेखा शर्मा सेन, डॉ. सुनीला जॉन, विजी थियागराजन, कार्स्टन वान रीजन, लेखक एवं कवि जेरी पिंटो, लक्ष्मी करुणाकरन, प्रभा डी. सुदागडे, रूही सहगल, अनुपमा बेनाचिनामारादी, बंटी पाई तथा थेजस्वी शिवानंद सहित अनेक विशेषज्ञ शामिल थे। इंडिया गेट्स रीडिंग के आठवें संस्करण के समापन के अवसर पर इस शिखर सम्मेलन ने अभियान के मूल संदेश को पुनः स्थापित किया कि बच्चों के लिए केवल शब्दों को पढ़ लेना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसी कहानियाँ भी मिलनी चाहिए जो उन्हें सोचने, प्रश्न पूछने और स्वयं को पहचानने का अवसर दें। हर बच्चा अपनी भाषा, अपनी आवाज़ और अपने जीवन के अनुभवों को पुस्तकों तक लेकर आता है। घर में बोली जाने वाली भाषाओं में उपलब्ध कहानियाँ पढ़ने को ऐसा अनुभव बनाती हैं जिसमें बच्चे सोच सकें, सवाल उठा सकें और स्वयं को खोज सकें।

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