नई दिल्ली – यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन दिल्ली ने इंडिया एक्सपीरियंशियल लर्निंग प्रोग्राम के अंतर्गत यूके से आए स्टूडेंट्स का स्वागत किया। यह 10 दिन की एक लर्निंग पहल है, जिसमें यूके और भारत के स्टूडेंट्स सामाजिक और पर्यावरण से जुड़ी असल चुनौतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं।आईईएलपी एक अनोखा यूके-भारत स्टूडेंट मोबिलिटी प्रोग्राम है, जिसे यूके में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन इंडिया सेंटर ने तैयार किया है। इस प्रोग्राम में कुल 33 प्रतिभागी शामिल हैं, जिसमें साउथैम्पटन यूके के 18 स्टूडेंट्स, साउथैम्पटन दिल्ली के 11 स्टूडेंट्स और जेएनयू व डीयू के 4 रिसर्च स्कॉलर्स शामिल हैं। यह इंटरनेशनल एक्सपीरियंशियल एजुकेशन का एक विशेष मॉडल है,जिसमें स्टूडेंट्स को पॉलिसीमेकर्स, सरकारी संस्थाओं और लोकल कम्युनिटी से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है।यूके से आए स्टूडेंट्स जियोग्राफी, मेडिसिन, लॉ, कंप्यूटर साइंस, बायोलॉजी, साइकोलॉजी, फैशन मार्केटिंग मैनेजमेंट, केमिकल इंजीनियरिंग, अकाउंटिंग एंड फाइनेंस, बिजनेस मैनेजमेंट और फिलॉसफी जैसे अलग-अलग विषयों से हैं।इस प्रोग्राम के तहत स्टूडेंट्स ने चार बड़े मुद्दों पर प्रोजेक्ट्स पर काम किया। पहला दिल्ली एनसीआर में साफ हवा और सस्टेनेबिलिटी, दूसरा यमुना को फिर से जीवित करना और पानी की बचत, तीसरा – उत्तराखंड में हरिद्वार और ऋषिकेश में रिस्पॉन्सिबल इको-टूरिज्म, और चौथा चंद्रज्योति अभियान के जरिए कम्युनिटी-लेड सिविक ट्रांसफॉर्मेशन। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन दिल्ली में प्रतिभागियों ने अपने वे प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए जो उन्होंने पाँच सप्ताह की वर्चुअल इंटर्नशिप में तैयार किए थे। इनमें उन्होंने दिखाया कि लोकल स्थिति के अनुसार कम्युनिटी की अगुवाई में प्रैक्टिकल सॉल्यूशन कैसे बनाए जा सकते हैं। ये थीम सरकारी और गैर सरकारी स्टेकहोल्डर्स से सलाह करके चुनी गई थीं।प्रोग्राम के बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन दिल्ली की एकेडमिक प्रोवोस्ट प्रोफेसर एलोइस फिलिप्स ने कहा, आईईएलपी स्टूडेंट्स को क्लासरूम से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जुड़ने का अवसर देता है, जहाँ अलग-अलग कल्चर और अलग-अलग सब्जेक्ट्स के लोग साथ काम करते हैं। यूके और भारत के स्टूडेंट्स को साथ लाकर यह प्रोग्राम उनकी ग्लोबल सोच को सुदृढ़ करता है।
