नोएडा- देश में खाद्य सुरक्षा योजनाओं की सफलता के बावजूद भारत आज भी ‘हिडन हंगर’ (छिपी भूख) की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। लोगों को भरपेट भोजन तो मिल रहा है, लेकिन भोजन में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12, जिंक और अन्य आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बच्चों के मानसिक विकास, वयस्कों की कार्यक्षमता और देश की आर्थिक प्रगति पर बड़ा असर डाल रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, देश में 6 से 59 माह के करीब 67% बच्चे, 15 से 49 वर्ष की 57% महिलाएं और लगभग 25% पुरुष एनीमिया से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति बताती है कि केवल भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी पोषण गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व अतिरिक्त सचिव डॉ. राजेश कपूर ने कहा, अब केवल खाद्य सुरक्षा नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार, देश ने भूख कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन कैलोरी और पोषण एक जैसी चीजें नहीं हैं। यदि भोजन में आवश्यक विटामिन और खनिज नहीं हैं, तो शरीर कुपोषित ही रहता है। आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बच्चों के मस्तिष्क के विकास, स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है। वहीं जिंक की कमी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटाती है और आयोडीन की कमी बौद्धिक विकास में बाधा बनती है। वयस्कों में यही कमी थकान, कम कार्यक्षमता और बार-बार बीमार होने का कारण बनती है, जिससे देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास प्रभावित होता है। डॉ. कपूर ने कहा कि यह समस्या अब केवल गरीब तबके तक सीमित नहीं रही। तेजी से बढ़ते प्रोसेस्ड फूड, पॉलिश किए गए अनाज, मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता चलन और दालों, मोटे अनाज, हरी सब्जियों तथा फलों का कम सेवन मध्यम और उच्च आय वर्ग को भी पोषण की कमी की ओर धकेल रहा है। महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होने से जोखिम और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अब देश को कैलोरी आधारित सोच से बाहर निकलना होगा। इसके लिए सरकारी पोषण कार्यक्रमों में भोजन की गुणवत्ता और विविधता बढ़ाने, सूक्ष्म पोषक तत्वों की नियमित निगरानी तथा लोगों में संतुलित आहार के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। केवल सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित भोजन, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और विविध आहार को बढ़ावा देना होगा।भारत यदि विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करना चाहता है तो छिपी भूख (हिडन हंगर) से लड़ाई को राष्ट्रीय मिशन बनाना होगा। बेहतर पोषण से ही स्वस्थ, सक्षम और अधिक उत्पादक मानव संसाधन तैयार होंगे। उन्होंने POSHAN 2.0, एनीमिया मुक्त भारत, पीएम पोषण और ICDS जैसी योजनाओं को मजबूत आधार बताते हुए इनके प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

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