नई दिल्ली – राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र ने सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा समिट 2026 का आयोजन किया, जिसमें देश और विदेश के अग्रणी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा जैसे दुर्लभ और जटिल कैंसर पर विशेष चर्चा की गई, जिसके उपचार के लिए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम और विशेष चिकित्सा दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।हाल ही में नई दिल्ली के रोहिणी स्थित होटल क्राउन प्लाज़ा में आयोजित इस दो दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन का उद्देश्य सारकोमा उपचार के क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक चिकित्सा अनुभवों को एक साथ लाना था। भारत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ-साथ एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर (अमेरिका) और सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी (दक्षिण कोरिया) के विशेषज्ञों ने भी सम्मेलन में भाग लिया और सारकोमा उपचार में हो रहे वैश्विक विकास पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर आरजीसीआईआरसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने कहा,सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा एक जटिल कैंसर है, जिसके लिए विशेषज्ञों की संयुक्त और समन्वित चिकित्सा अत्यंत आवश्यक है। सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा समिट 2026 जैसे मंच विभिन्न देशों और चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर ज्ञान के आदान-प्रदान और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार पद्धतियों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। आरजीसीआईआरसी में हम शोध, शैक्षणिक सहयोग और रोगी-केंद्रित नवाचारों के माध्यम से विशेषीकृत कैंसर उपचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह सम्मेलन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में सारकोमा उपचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी, नियोएडजुवेंट थेरेपी, सर्जिकल मैनेजमेंट, लिम्ब साल्वेज तकनीक, रेडिएशन थेरेपी, ओलिगोमेटास्टेटिक रोग, ऑस्टियोसारकोमा, एक्स्ट्रास्केलेटल इविंग्स सारकोमा तथा जटिल रोगियों के केस-आधारित विश्लेषण शामिल थे। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, प्लेनरी सत्र, सर्जिकल मास्टरक्लास, मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड चर्चा, विशेषज्ञों से संवाद और इंटरैक्टिव केस पैनल भी आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को व्यापक शैक्षणिक अनुभव प्राप्त हुआ।डॉ. उल्लास बत्रा, सह-निदेशक मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं चीफ, थोरैसिक मेडिकल ऑन्कोलॉजी, आरजीसीआईआरसी तथा आयोजन समिति के सदस्य, ने कहा, “सारकोमा के उपचार में सटीक पैथोलॉजी और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई डायग्नोस्टिक तकनीकों और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी की मदद से अब हम ट्यूमर की बेहतर पहचान कर सकते हैं, उपचार को अधिक सटीक बना सकते हैं और प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार कर सकते हैं।डॉ. हिमांशु रोहेला, ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट, आरजीसीआईआरसी एवं आयोजन समिति के सदस्य, ने कहा,सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के प्रभावी उपचार के लिए सटीक निदान, सही स्टेजिंग और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय आवश्यक है। इस सम्मेलन ने विशेषज्ञों को जटिल मामलों पर चर्चा करने, नए शोध साझा करने और उपचार संबंधी व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।सम्मेलन में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि दुर्लभ कैंसरों के बेहतर उपचार के लिए मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने बताया कि सर्जन, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के संयुक्त विचार-विमर्श से जटिल, दोबारा होने वाले और उच्च जोखिम वाले मामलों में मरीज के लिए सबसे उपयुक्त उपचार योजना तैयार की जा सकती है।सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा समिट 2026 के माध्यम से आरजीसीआईआरसी ने एक बार फिर दुर्लभ और जटिल कैंसरों के लिए विशेष शैक्षणिक मंच उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। नैतिकता, सहानुभूति और उत्कृष्टता के अपने मूल्यों के साथ संस्थान बहु-विषयक विशेषज्ञता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित कैंसर उपचार को बढ़ावा देते हुए देशभर के मरीजों के बेहतर उपचार परिणाम सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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