नई दिल्ली – इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईबीएआई) ने आज रजत जयंती सम्मलेन में अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाई। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, नियामकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भारत के बीमा ब्रोकिंग व्यवसाय के विकास पर विचार किया और बीमित भारत सुरक्षित भारत के विषय के तहत इस क्षेत्र के विकास के अगले चरण पर चर्चा की। इस सम्मलेन में 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में बीमा ब्रोकरों की उल्लेखनीय भूमिका पर ज़ोर दिया गया।आईआरडीएआई के अध्यक्ष (चेयरमैन), श्री अजय सेठ इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए और उन्होंने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने इस अवसर पर इस क्षेत्र की उल्लेखनीय वृद्धि के की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले दशक के दौरान जीवन बीमा में 2.5–2.6 गुना और साधारण बीमा में 3.6 गुना की बढ़ोतरी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि बीमा ब्रोकर अब साधारण बीमा व्यवसाय में 42% का योगदान दे रहे हैं, जो सात-आठ साल पहले लगभग 30% था। उन्होंने ब्रोकरों से आग्रह किया कि वे किफायत, जोखिम में कमी और पॉलिसीधारकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें।
भारत के बीमा ब्रोकिंग व्यवसाय के 25 साल पूरे होने के अवसर पर, इस सम्मलेन में पॉलिसी दिलाने में मदद करने से लेकर जोखिम के संबंध में भरोसेमंद परामर्श प्रदान करने तक उद्योग के उल्लेखनीय विकास पर चर्चा की गई। ब्रोकरों ने पिछले दो दशकों में निष्पक्ष और ग्राहकों के अनुकूल बीमा समाधानों तक पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। साथ ही, उन्होंने देश भर में बीमा के प्रति जागरूकता और वित्तीय मज़बूती को बढ़ावा दिया है। आईबीएआई ने अक्टूबर 2025 में माननीय वित्त मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण से मुलाकात भी की थी और बीमा क्षेत्र से जुड़े जीएसटी सुधारों के लिए सरकार को बधाई दी थी।इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईबीएआई) के अध्यक्ष (प्रेसिडेंट), श्री नरेंद्र भरिंदवाल ने कहा आईबीएआई के 25 साल पूरे होने पर, हम न सिर्फ अपने सफर के इस महत्वपूर्ण पड़ाव का, बल्कि भारत के बीमा ब्रोकिंग पेशे में हुए शानदार बदलाव का भी जश्न मना रहे हैं। ब्रोकर अब सिर्फ पॉलिसी दिलाने का ही काम नहीं करते, बल्कि अब वे जोखिम से जुड़ी सलाह देने वाले भरोसेमंद सलाहकार भी बन गए हैं। वे ग्राहकों को जोखिम समझने और उचित सुरक्षा पाने में मदद करते हैं। विकास के अगले चरण में बीमा को अपेक्षाकृत अधिक लोगों तक पहुंचना, इसे बेहतर ढंग से समझाना और हर व्यक्ति के लिए इसे प्रासंगिक बनाना आवश्यक है। हम टेक्नोलॉजी अपना कर, क्षमता का विस्तार कर और जानकारी साझा कर इस पेशे को मज़बूत बनाने के साथ-साथ छोटे और मंझोले ब्रोकरों की मदद करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। आने वाले दिनों में, हमें दीर्घकालिक स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि बीमा परितंत्र मज़बूत तथा ज़िम्मेदार बना रहे और दीर्घकालिक स्तर पर पॉलिसीधारकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सके। हम नवोन्मेष, दीर्घकालिक स्थिरता और गठजोड़ के ज़रिए, मज़बूत परितंत्र का निर्माण करना चाहते हैं, जो 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ से जुड़े भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हो।इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईबीएआई) के मानद सचिव (ऑनरेरी सेक्रेटरी), श्री निर्मल बज़ाज़ ने कहा:
“पिछले दो दिनों के विचार-विमर्श से एक बार फिर यह संदेश मिला कि बीमा क्षेत्र का भविष्य गठजोड़, नवोन्मेष और पॉलिसीधारकों के हितों को प्राथमिकता देने में निहित है। जोखिम के स्वरूप में बदलाव और ग्राहकों की बदलती उम्मीदों के साथ, आवश्यक है कि उद्योग अपनी पेशेवर क्षमता बढ़ाता रहे, ज़िम्मेदारी से टेक्नोलॉजी अपनाए और देश भे में बीमा के बारे में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए मिलकर काम करे।इस सम्मलेन में एआई तथा इंश्योरटेक, स्वास्थ्य बीमा की किफायती दरों, जीवन बीमा के वितरण, गिफ्ट सिटी के ज़रिए पुनर्बीमा (री-इंश्योरेंस) के अवसर, साइबर तथा भू-राजनैतिक जोखिम, ग्रामीण एवं कृषि बीमा और नियामकीय स्तर पर बदलाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सभी सत्रों में इस बात पर सहमति बनी कि ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने और देश के कोने-कोने में बीमा के सार्थक विस्तार के लिए बेहतर गठजोड़, अधिक वित्तीय जागरूकता और ज़िम्मेदारी से टेक्नोलॉजी को अपनाना आवश्यक है।

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