नई दिल्ली – विश्व हेपेटाइटिस दिवस यह याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन के लिए सिर्फ ब्लड शुगर नियंत्रित करना काफी नहीं है, लीवर का स्वस्थ होना भी जरूरी है। मधुमेह के मरीजों में फैटी लीवर और हेपेटाइटिस का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।इस विषय पर आगे बताते हुए धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट और हेड, मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी,डॉ. अशोक कुमार कहते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण लीवर में चर्बी जमा होती है, जिससे सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और लीवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नियमित LFT, जरूरत पर हेपेटाइटिस-B, C की स्क्रीनिंग और हेपेटाइटिस-B का टीका जरूरी है। संतुलित आहार, व्यायाम, स्वस्थ वजन और शराब से बचाव से लीवर स्वस्थ रखा जा सकता है। समय पर जांच से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। स्वस्थ लीवर, बेहतर मधुमेह नियंत्रण में सहायक होता है। इसी क्रम पर आगे बताते हुए डॉ. वी. मोहन, अध्यक्ष एवं प्रमुख मधुमेह रोग विशेषज्ञ, डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशलिटी सेंटर कहते हैं, कि लीवर की सुरक्षा करना मधुमेह प्रबंधन से अलग काम नहीं है। यह उसी का एक जरूरी हिस्सा है।समय पर जांच और बचाव से गंभीर लीवर की बीमारियों को रोका जा सकता है।इस विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर मधुमेह के हर मरीज के लिए संदेश साफ है: लक्षणों का इंतजार न करें। अपनी अगली जांच में लीवर फंक्शन टेस्ट कराएं। अगर कोई जोखिम है तो हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग करवाएं और हेपेटाइटिस B का टीका लगवाएं यदि पहले से नहीं लगवाया है। इस अवसर पर डॉ. संजय गोजा, निदेशक, लिवर ट्रांसप्लांट एवं HPB सर्जरी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम कहते हैं – “लीवर की सुरक्षा में मधुमेह प्रबंधन का अहम योगदान रहता है समय पर जांच और बचाव से गंभीर लीवर की बीमारियों को रोका जा सकता है।

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