नई दिल्ली – गवर्नेंस एडवाइजर और लेखक श्रीनाथ श्रीधरन तथा बोर्ड एवं लीडरशिप एडवाइजर अगमजीत डांग ने 19 अगस्त 2026 को अपनी नई किताब “एवेरथिन्ग स्टार्टस एट द टॉप: बिल्डिंग बोर्ड्स ऑफ़ द फ्यूचर” लॉन्च की।यह किताब विभिन्न सेक्टर्स में बोर्ड्स, प्रमोटर्स और लीडरशिप टीम्स के साथ लेखकों के काम और अनुभव पर आधारित है। वास्तविक परिस्थितियों से मिले अनुभवों के आधार पर किताब यह बताती है कि अनिश्चित और तेजी से बदलती दुनिया में संस्थानों को प्रभावी ढंग से गवर्न करने के लिए बोर्ड्स को किस तरह खुद को बदलने और विकसित करने की जरूरत है।किताब के लॉन्च के मौके पर लेखकों ने नई दिल्ली में एक इनविटेशन-ओनली लीडरशिप डायलॉग का आयोजन किया। इसमें प्रतिष्ठित बोर्ड चेयर्स, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स, सीईओ, रेगुलेटर्स, इन्वेस्टर्स और गवर्नेंस प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया। चर्चा का विषय बिल्डिंग बोर्ड्स ऑफ़ द फ्यूचर” रहा, जिसमें भविष्य के बोर्ड्स की भूमिका, बदलती कारोबारी परिस्थितियों और प्रभावी कॉरपोरेट गवर्नेंस की जरूरतों पर विचार-विमर्श किया गया।रूपा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित बिल्डिंग बोर्ड्स ऑफ़ द फ्यूचर ऐसे समय में सामने आई है, जब कॉरपोरेट इंडिया एक अहम बदलाव के दौर से गुजर रहा है। भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट्स में विस्तार की महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रही हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपना रही हैं, इंटरनेशनल कैपिटल आकर्षित कर रही हैं और तेजी से जटिल होते रेगुलेटरी व स्टेकहोल्डर एक्सपेक्टेशंस को मैनेज कर रही हैं। ऐसे में कॉरपोरेट बोर्ड की भूमिका पिछले कई दशकों में सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है।किताब में कहा गया है कि पिछले तीन दशकों में गवर्नेंस फ्रेमवर्क काफी मजबूत हुए हैं, लेकिन आज के बोर्ड्स के सामने परिस्थितियां पहले से बिल्कुल अलग हैं। टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस प्रैक्टिसेज के विकसित होने की गति से कहीं तेज बिजनेस मॉडल्स को बदल रही है। कंपनी की रेप्युटेशन कुछ ही घंटों में बदल सकती है। साइबर सिक्योरिटी, जियोपॉलिटिकल चुनौतियां, सक्सेशन प्लानिंग, स्टेकहोल्डर ट्रस्ट और इंस्टीट्यूशनल रेजिलिएंस अब ओवरसाइट और कॉम्प्लायंस जैसी पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ बोर्ड एजेंडा का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
ऐसे माहौल में गवर्नेंस अब सिर्फ जवाबदेही सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि तब सही निर्णय लेने की क्षमता है, जब परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट न हों।छह हिस्सों में संरचित यह किताब इस बात पर चर्चा करती है कि गवर्नेंस किस तरह बदला है, मौजूदा बोर्ड्स किन क्षेत्रों में पीछे रह रहे हैं, डायरेक्टर्स को किस तरह अलग तरीके से काम करने की जरूरत है, फ्यूचर-रेडी गवर्नेंस से क्या अपेक्षाएं होंगी और दुनिया के प्रमुख बोर्डरूम्स से भारत क्या सीख सकता है।किताब के लॉन्च के मौके पर स्ट्रैटेजिक एडवाइजर, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और किताब के सह-लेखक श्रीनाथ श्रीधरन ने कहा भारत ने पिछले कई दशकों में कॉरपोरेट गवर्नेंस के ढांचे को मजबूत करने में काफी काम किया है। अब अगला कदम और ज्यादा रेगुलेशन नहीं, बल्कि बेहतर जजमेंट विकसित करना है। संस्थान अक्सर नियमों की कमी की वजह से असफल नहीं होते। वे तब असफल होते हैं, जब मुश्किल सवाल पूछे नहीं जाते, असहज सच्चाइयों को चुनौती नहीं दी जाती और बोर्ड पुराने तौर-तरीकों व धारणाओं के साथ सहज हो जाते हैं। आखिरकार, गवर्नेंस का मतलब संस्थानों को ऐसे भविष्य के लिए तैयार करना है, जिसे वे अभी देख भी नहीं सकते। यही वह बातचीत है, जिसे यह किताब शुरू करने की कोशिश करती है।एग्जीक्यूटिव एक्सेस इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और किताब के सह-लेखक अगमजीत डांग ने कहा बोर्ड्स, प्रमोटर्स और लीडरशिप टीम्स के साथ करीब से काम करते हुए हम खुद देखते हैं कि स्टेकहोल्डर्स की उम्मीदें किस तरह बदल रही हैं। आज के बोर्ड्स को पारंपरिक गवर्नेंस से कहीं आगे बढ़कर कई तरह की जटिल परिस्थितियों से निपटना पड़ता है। हम चाहते थे कि यह किताब प्रैक्टिकल और प्रासंगिक हो, वास्तविक बोर्डरूम अनुभवों पर आधारित हो और साथ ही बोर्ड्स को भविष्य के बारे में अलग तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करे।”
श्रीनाथ श्रीधरन के बारे में श्रीनाथ श्रीधरन बोर्ड्स, प्रमोटर्स और बिजनेस फैमिलीज को गवर्नेंस, बोर्ड इफेक्टिवनेस, लीडरशिप ट्रांजिशन, सक्सेशन प्लानिंग और इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में स्ट्रैटेजिक एडवाइज देते हैं। वह इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और सीईओ-कोच के रूप में भी कार्य करते हैं। इसके अलावा, वह ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में विजिटिंग फेलो हैं। वह एक सक्रिय मीडिया कॉलमनिस्ट भी हैं और गवर्नेंस, लीडरशिप, पब्लिक पॉलिसी और इंस्टीट्यूशन-बिल्डिंग जैसे विषयों पर उनके लेख और विचार भारत के प्रमुख अखबारों, बिजनेस पब्लिकेशंस और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में प्रकाशित होते हैं। श्रीनाथ श्रीधरन आठ प्रकाशित किताबों के लेखक हैं, जिनमें बेस्टसेलर परिवार और धंधा भी शामिल है। एवेरथिन्ग स्टार्टस एट द टॉप उनकी आठवीं प्रकाशित किताब है और कॉरपोरेट गवर्नेंस एवं बोर्ड्स के भविष्य पर उनका अब तक का सबसे व्यापक काम है।
अगमजीत डांग के बारे में अगमजीत डांग, एग्जीक्यूटिव एक्सेस इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) हैं। वह प्रमुख कंपनियों, प्रमोटर्स और बोर्ड्स को एग्जीक्यूटिव सर्च, बोर्ड एडवाइजरी, सक्सेशन प्लानिंग और लीडरशिप स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में सलाह देते हैं।उनका अनुभव फैमिली-ओन्ड बिजनेसेज, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, प्राइवेट इक्विटी-बैक्ड कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट्स के साथ काम करने का है। उनका खास फोकस लीडरशिप को मजबूत करने और बोर्ड इफेक्टिवनेस बढ़ाने पर रहता है। नई दिल्ली में हुआ यह लॉन्च “फ्यूचर ऑफ़ बोर्ड्स” नाम से होने वाली बातचीत की एक सीरीज की शुरुआत है, जिसे देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा। इस सीरीज में बोर्ड लीडर्स और कॉरपोरेट डिसीजन-मेकर्स एक साथ आएंगे और चर्चा करेंगे कि बिजनेस, टेक्नोलॉजी और समाज की बदलती जरूरतों के साथ गवर्नेंस को किस तरह विकसित होने की जरूरत है।
